भीमाकाली मंदिर: अद्भुत वास्तुशिल्प
भीमाकाली मंदिर के वास्तुशिल्प को विलक्षण एवं अद्भुत कहा जाना चाहिए। जी हां, भीमाकाली मंदिर का वास्तुशिल्प अति दर्शनीय एवं अद्भुत है।
मिश्रित स्थापत्य कला की यह शानदार संरचना वैश्विक ख्याति रखती है। भारत के हिमाचल प्रदेश के सराहन स्थित माता काली का यह दिव्य-भव्य स्थान विशिष्टताओं से परिपूरित है।
वस्तुत: यह विशाल मंदिर माता काली को समर्पित है। इसकी मान्यता हिन्दुओं के महातीर्थ के रूप में है।
खास यह कि इस मंदिर की संरचना में हिन्दू एवं बौद्ध स्थापत्य कला का सम्मिश्रण दर्शनीय है। वास्तुशिल्प की नक्काशी अति दर्शनीय है। कंगूरा डिजाइन आधारित छतों की संरचना विशिष्टता को दर्शाती हैं।
करीब 2000 वर्ष प्राचीन यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए देश दुनिया में खास तौर से जाना पहचाना जाता है। खास यह कि कर्मकांड एवं आरती को छोड़ कर यह मंदिर अधिकतर समय बंद रहता है।
यह प्राचीन मंदिर केवल कुछ समय के लिए ही खुलता है। भीमाकाली मंदिर के विशाल परिसर में एक अन्य मंदिर है। यह दिव्य-भव्य मंदिर भी काली जी को समर्पित है। इस मंदिर में माता काली की प्रतिमा विद्यमान है।
इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1943 में किया गया था। मंदिर परिसर में रघुनाथ जी एवं भैंरो के नरसिंह तीर्थ को समर्पित दो अन्य मंदिर भी हैं। भीमाकाली मंदिर की मान्यता शक्तिपीठ की है।
मान्यता है कि माता काली वैवाहिक जीवन के सुख एवंं दीर्घायु की देवी हैं। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की पत्नी सती का बायां कान यहांं गिरा था।
लिहाजा इस स्थान को शक्तिपीठ के तौर पर मान्यता है। माता काली का यह स्थान धार्मिक होने के साथ ही एक शानदार पर्यटन क्षेत्र भी है।
पर्वतीय क्षेत्र में बहुमंजिला मंदिर काफी कुछ विशिष्टता रखता है। मंदिर के शीर्ष तल में माता काली का विग्रह स्थापित है।
रामपुर बुशहर से करीब 30 किलोमीटर दूर सराहन में स्थित भीमाकाली मंदिर शांति एवं सुरम्यता का विशिष्ट क्षेत्र है। शानदार पर्वत श्रंखला के मध्य स्थित यह विशिष्ट धार्मिक स्थान अति दर्शनीय है।
पहाड़ों के मध्य आस्था, विश्वास एवं श्रद्धा का संगमन काफी कुछ खास बना देता है। इस लिहाज यह मंदिर बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है। खास तौर से यहां का नैसर्गिक सौन्दर्य अति दर्शनीय है। मान्यता है कि यह इलाका प्राचीन काल में राजसी परिवार की राजधानी रह चुका है।
सराहन का यह इलाका शिमला से करीब 175 किलोमीटर दूर स्थित है। खास यह कि इस दिव्य-भव्य मंदिर में माता काली की आरती होती है तो पूरा पर्वतीय इलाका ध्वनि विशेष से अनुगूंजित हो उठता है।
ऐसा प्रतीत होता है, जैसे देवलोक से देव अवतरण हो रहा हो। मान्यता है कि भीमाकाली मंदिर में दर्शन से श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति होती है।
चौतरफा शांति एवं पर्वतीय सौन्दर्य का अवलोकन मन मस्तिष्क को प्रफुल्लित करता है। बादलों एवं पहाड़ों की गोद में संरचित यह मंदिर अद्भुत एवं अद्वितीय है।
भीमाकाली मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भुंतर एयरपोर्ट कुल्लू-मनाली है। निकटतम रेलवे स्टेशन शिमला जंक्शन है। हालांकि पर्यटक सड़क मार्ग से भी भीमाकाली मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
30.725130,77.184890
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