वृंदावन: महातीर्थ एवं धार्मिक पर्यटन
वृंदावन को हिन्दुओं का महातीर्थ एवं धार्मिक पर्यटन कहा जाना चाहिए। वृंदावन वस्तुत: मथुरा का एक अति विकसित गांव है।
हालांकि मथुरा के इस सुन्दर गांव ने अब एक विशाल तीर्थ का स्वरूप धारण कर लिया है। वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा महातीर्थ है। भारत के उत्तर प्रदेश केे धार्मिक शहर मथुरा से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित वृंदावन भगवान श्री कृष्ण एवं राधा रानी के प्रेम, वात्सल्य एवं अनुराग से सराबोर है।
मान्यता है कि वृंदावन के कण-कण में भगवान श्री कृष्ण का वास है। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित बांके बिहारी मंदिर एवं राधा वल्लभ लाल जी मंदिर वृंदावन के अति प्राचीन मंदिर हैं। अब तो भगवान श्री कृष्ण राधा के मंदिरों की एक शानदार एवं अद्भुत मंदिरों की श्रंृखला विद्यमान है।
वृंदावन को अब गांव के बजाय एक सुन्दर धार्मिक शहर कहा जा सकता है। खास यह कि वृंदावन के मंदिरों का अपना एक खास धार्मिक आकर्षण है। वृंदावन के राधा रमण मंदिर, राधा दामोदर मंदिर, राधा श्याम सुन्दर मंदिर, गोपीनाथ मंदिर, गोकुलेश मंदिर, श्री कृष्ण बलराम मंदिर, पागल बाबा का मंदिर, रंगनाथ जी का मंदिर, प्रेम मंदिर, श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर, इस्कॉन मंदिर एवं निधि वन अति दर्शनीय हैं।
निधि वन को भगवान श्री कृष्ण, राधिका एवं गोपिकाओं का रास स्थल माना जाता है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण अभी भी रात्रि में निधि वन में रास लीला रचाते हैं। वस्तुत: वृंदावन भगवान श्री कृष्ण की लीला स्थली है। धर्म एवं आध्यात्म प्रेमी एवं कृष्ण भक्त श्रृद्धालुुओं के समक्ष वृंदावन का नाम आते ही अनुराग, प्रेेम एवं वात्सल्य की तरंगे प्रस्फुटित होेने लगती हैं।
वृंदावन को वृज का ह्मदय माना जाता है। योगेश्वर श्री कृष्ण की दिव्य अलौकिक लीलाएं वृंदावन में श्रृद्धालुओं को पुलकित करती हैं। वृंदावन को वृज का ह्मदय इस लिए भी कहा जाता है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण एवं राधा की दिव्य लीलाएं वृंदावन के कण कण में विद्यमान हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो वृंदावन को पृथ्वी का उत्तम एवं दिव्य भाग माना जाता है। इसे सुख का आश्रम एवं पूर्ण ब्रह्म का स्थान माना जाता है। शायद इसी लिए अनादि काल से वृंदावन श्रद्धा का केन्द्र बना हुआ है। वृंदावन की प्राकृतिक छटा भी निराली है। वृंदावन के तीन ओर यमुना का प्रवाह है।
आस्था एवं विश्वास की दृष्टि से देखें तो वृंदावन को संत, महात्माओं एवं महापुरुषों ने धार्मिक महत्व से खास तौर सजाया संवारा है। चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास, श्री हितहरिवंश, महाप्रभु वल्लभाचार्य आदि का धार्मिक वैभव वृंदावन में अति दर्शनीय है। खास यह कि सांझ होते ही वृंदावन धर्म एवं आध्यात्म से झूम उठता है तो वहीं वृंदावन का कोना-कोना रंग बिरंगी रोशनी से झिलमिला उठता है।
इसे धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक एवं धरोहर शहर से अलंकृत किया जा सकता है। वृंदावन में असंख्य ऐतिहासिक धरोहर विद्यमान हैं। आश्रम एवं साधना स्थल वृंदावन की शान एवं शोभा हैं। यमुना के तट पर रचा बसा वृंदावन यमुना के घाटों की एक समृद्ध विरासत भी रखता है। यमुना के घाटों की एक विशाल श्रंृखला वृंदावन में विद्यमान है।
इनकी दर्शनीयता श्रृद्धालुओं को रोमांचित करती है। इन घाटों में मुख्य रूप से श्रीवाराहघाट, कालीयदमन घाट, सूर्य घाट, युगल घाट, श्री बिहार घाट, श्री आंधेर घाट, इमलीतला घाट, श्रंृगार घाट, श्री गोविन्द घाट, चीर घाट, श्री भ्रमर घाट, श्री केशी घाट, धीर समीर घाट, श्री राधा बाग घाट, श्री पानी घाट, आदि बद्री घाट एवं राज घाट आदि हैं।
कुसुम सरोवर: कुसुम सरोवर वृंदावन का एक खास आकर्षण है।
श्री वाराह घाट: श्री वाराह घाट वृंदावन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित यमुना का यह अति प्राचीन घाट है। तट केे उपर श्री वाराह देव विराजमान हैं। निकट ही ऋषि गौतम का आश्रम विद्यमान है।
श्री वाराह घाट: श्री वाराह घाट वृंदावन के दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित यमुना का यह अति प्राचीन घाट है। तट केे उपर श्री वाराह देव विराजमान हैं। निकट ही ऋषि गौतम का आश्रम विद्यमान है।
कालीय दमन घाट: कालीय दमन घाट भी यमुना का अति प्राचीन घाट है। कालीय दमन कर भगवान श्री कृष्ण के लौटने से पहले इसी घाट पर बृजवासियों एवं गोपियों ने आंसुओं से भूमि का तर बतर कर दिया था। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण की मंगल कामना के लिए ब्राह्मणों ने गायों का दान किया था।
सूर्य घाट: सूर्य घाट का प्राचीन नाम आदित्य घाट है। घाट के उपर एक विशाल टीला है। इसे आदित्य टीला कहते हैं। इस टीले पर श्री सनातन गोस्वामी का मदन मोहन मंदिर विद्यमान है। यहीं पर प्रस्कंदन तीर्थ भी है।
युगल घाट: युगल घाट के निकट ही सूर्य घाट स्थित है। युगल घाट के शीर्ष पर युगल बिहारी का प्राचीन मंदिर है। केशी घाट के निकट जुगल किशोर का एक आैर मंदिर है।
बिहार घाट: बिहार घाट एक अति प्राचीन घाट है। मान्यता है कि इस घाट पर भगवान श्री कृष्ण जलक्रीड़ा करते थे।
श्री श्रंृगार घाट: श्री श्रंृगार घाट पर भगवान श्री कृष्ण राधिका का श्रंृगार करते थे।
चीर घाट: चीर घाट वस्तुत: भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली था। यमुना में स्नान करती गोपिकाओं के वस्त्र हरण कर भगवान श्री कृष्ण कदम्ब के वृक्ष पर टांग दिया करते थे। शायद इसी लिए इसे चीर घाट केे नाम से जाना पहचाना जाता है।
राज घाट: राज घाट आदि बद्री घाट के दक्षिण में स्थित है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण नाविक बन कर सखियों एवं राधिका को यमुना पार कराया करते थे।
बिहार घाट: बिहार घाट एक अति प्राचीन घाट है। मान्यता है कि इस घाट पर भगवान श्री कृष्ण जलक्रीड़ा करते थे।
श्री श्रंृगार घाट: श्री श्रंृगार घाट पर भगवान श्री कृष्ण राधिका का श्रंृगार करते थे।
चीर घाट: चीर घाट वस्तुत: भगवान श्री कृष्ण की क्रीड़ा स्थली था। यमुना में स्नान करती गोपिकाओं के वस्त्र हरण कर भगवान श्री कृष्ण कदम्ब के वृक्ष पर टांग दिया करते थे। शायद इसी लिए इसे चीर घाट केे नाम से जाना पहचाना जाता है।
राज घाट: राज घाट आदि बद्री घाट के दक्षिण में स्थित है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण नाविक बन कर सखियों एवं राधिका को यमुना पार कराया करते थे।
बृंदावन की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैंं। निकटतम एयरपोर्ट आगरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। आगरा एयरपोर्ट से वृंदावन की दूरी करीब 53 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है। पर्यटक या श्रृद्धालु सड़क मार्ग से भी वृंदावन की यात्रा कर सकते हैं।
27.577090,77.694880
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