Wednesday, 17 April 2019

वशिष्ठ मंदिर: विलक्षण वास्तुशिल्प

   वशिष्ठ मंदिर के वास्तुशिल्प को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, इस विशाल मंदिर का वास्तुशिल्प विलक्षण एवं अति दर्शनीय है। 

   भारत के हिमाचल प्रदेश के मनाली जिला का यह मंदिर काफी कुछ विशिष्ट है। वस्तुत: यह मंदिर ऋषि वशिष्ठ मुनि को समर्पित है। मनाली से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित यह शानदार मंदिर विशिष्टताओं के कारण विशेष ख्याति रखता है। 

   मान्यता है कि ऋषि वशिष्ठ प्राचीन काल मे यहां साधना करते थे। खासियत यह कि मंदिर परिसर का झरना आैषधीय गुणों से परिपूरित है। यह सल्फर बसंत के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। मंदिर मनाली के एक छोटे से गांव वशिष्ठ में स्थापित है।

  मान्यता है कि मंदिर 4000 साल से भी अधिक प्राचीन है। व्यास नदी के निकट स्थापित इस मंदिर की दिव्यता-भव्यता अति दर्शनीय है।
  मान्यता है कि सप्त ऋषियों में वशिष्ठ ऋषि का आशीर्वाद यहां भक्तों को मिलता है।
   किवदंती है कि ऋषि बाल हत्याओं से दुखी होकर व्यास नदी में प्राण त्यागना चाहते थे लेकिन नदी ने ऋषि वशिष्ठ के प्राण लेने से इंकार कर दिया।

  बाद में आश्रय स्थली को वशिष्ठ गांव के नाम से पहचाना जाना लगा। खास यह कि वशिष्ठ मंदिर को मनाली के प्रसिद्ध स्थानों में गिना जाता है। मान्यता है कि जिस नदी को ऋषि वशिष्ठ गांव ले गये थे, उसका नाम विपाशा था। 

   विपाशा का आशय बंधन से मुक्ति होता है। इस विपाशा नदी को ही व्यास नदी के तौर पर जाना जाता है। मंदिर के गर्भगृह में महर्षि वशिष्ठ की प्रतिमा विद्यमान हैै। मंदिर का अधिसंख्य भाग लकड़ी से बना है।

   लकड़ी की नक्काशी अति दर्शनीय है। खास यह कि मंदिर का जलाशय आैषधीय गुणों से परिपूरित है। इस जल में स्नान करने से श्रद्धालुओं को त्वचा रोगों से निजात मिल जाता है। 

  मान्यता है कि इस झरना-जलाशय में स्नान करने से शरीर का आध्यात्मिक एवं शारीरिक कायाकल्प होता है। इस जल को आैषधीय एवं उपचारिक जल भी माना जाता है। 

  निकट ही एक प्राचीन मंदिर है। इसे राम मंदिर के तौर पर जाना पहचाना जाता है। मंदिर में राम, सीता, लक्ष्मण, की प्रतिमायें प्राण प्रतिष्ठित हैं। खास यह कि इस गांव को वैष्णव पंथ का गांव माना जाता है। 

  सुरम्य एवं शांत स्थान मंदिर की दिव्यता-भव्यता अति दर्शनीय है। इसे धार्मिक पर्यटन क्षेत्र भी कहा जा सकता है। कारण धर्म के साथ ही श्रद्धालु पर्यटन का भी आनन्द ले सकते हैं। 

   पर्वतीय क्षेत्र में होने के कारण मंदिर की सुन्दरता भी अद्भुत प्रतीत होती है। खास यह कि मंदिर में दर्शन के लिए विदेशी भी बड़ी तादाद में आते हैं। 

   मान्यता है कि ऋषि वशिष्ठ के इस मंदिर से कोई भी निराश नहीं लौटता है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि ऋषि दर्शन से ही समस्त इच्छाओं की पूर्ति हो जाती है।

   वशिष्ठ मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भुन्तर एयरपोर्ट कुल्लू-मनाली है। 
   पर्यटक चण्डीगढ़ एयरपोर्ट से भी मंदिर की यात्रा कर सकते है। निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर जंक्शन है। श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
32.251919,77.195869

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