Thursday, 14 March 2019

शारदा सिद्धपीठ: हिन्दुओं का तीर्थधाम

    शारदा मंदिर को सिद्धपीठ कहा जाना चाहिए। शारदा मंदिर हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थधाम भी है। भारत के मध्य प्रदेश के सतना जिला का यह प्रसिद्ध देवी स्थान बेहद लोकप्रिय है।

   खास यह कि श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का केन्द्र शारदा मंदिर को मैहर मंदिर के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। मैहर वस्तुत: सतना जिला का एक छोटा शहर है। मंदिर मुख्यत: माता शारदा को समर्पित है।

  नैसर्गिक रूप से समृद्ध कैमूर तथा विंध्य पर्वत श्रंखला के मध्य स्थित माता शारदा देवी का यह मंदिर समुद्र तल से करीब 367 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। तमसा नदी के तट पर त्रिकूट पर्वत पर विद्यमान शारदा पीठ को सिद्धपीठ माना जाता है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो यह ऐतिहासिक मंदिरों की श्रंखला में 108 सिद्धपीठ में से एक है। इसे भगवान नरसिंह पीठ के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। बताते हैं कि आल्हा एवं ऊदल दोनों भाई मां शारदा के अनन्य उपासक थे। 

   पर्वत की तलहटी में आल्हा-ऊदल का तालाब एवं अखाड़ा आज भी विद्यमान है। खास यह कि मां शारदा के साथ ही नरसिंह देव की प्रतिमा भी प्राण प्रतिष्ठित है। यह प्रतिमा अति प्राचीन है। मां शारदा का यह स्थान सती के अवशेष से ताल्लुक रखता है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो मैहर के इस त्रिकूट पर्वत पर सती के आभूषण अर्थात गले का हार गिरा था। माई का हार गिरने की कथा प्रचलित होने से इस स्थान को मैहर कहा जाने लगा। 

  बताते हैं, जिन स्थानों पर सती के शव अवशेष गिरे, वहां शक्तिपीठ की स्थापना की गयी। मैहर वस्तुत: मैहर रियासत की राजधानी रहा।
   शारदा देवी का यह मंदिर शहर से करीब 5 किलोमीटर दूर त्रिकूट पर्वत पर स्थित है। मंदिर के निकट ही प्राचीन शिलालेख हैं। जिसमें मंदिर की प्राचीनता का उल्लेख है। 

   विशेषज्ञोें की मानें तो मंदिर का ताल्लुक शैव संत से समाज से है। बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म का भी उल्लेख यहां मिलता है। 
  बिशेषज्ञों की मानें तो शारदा देवी के इस स्थान को प्राचीनकाल में जंगल की देवी भी कहा जाता था। कारण त्रिकूट पर्वत का यह इलाका प्राचीनकाल में अति घना जंगल ही था। 

   शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में शारदा देवी शक्तिपीठ पर भारी मेला का आयोजन होता है। इस दिव्य-भव्य मेला में भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आना होता है। मान्यता है कि मां शारदा के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं का कल्याण होता है।

  मनौती के लिए यहां धागा बांधने की परम्परा है। इच्छित मनोकामनाएं पूर्ण होने पर श्रद्धालु मां के दरबार में मत्था टेकने आते हैं।

   मां शारदा मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। मैहर का निकटतम एयरपोर्ट जबलपुर एवं रीवा हैं। जबलपुर एयरपोर्ट से शारदा पीठ की दूरी करीब 145 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेेशन मैहर जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
24.256900,80.763800

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