हिडिम्बा मंदिर: अद्भुत वास्तुशिल्प
हिडिम्बा मंदिर के वास्तुशिल्प को विलक्षण एवं अद्भुत कहा जाना चाहिए। जी हां, हिडिम्बा मंदिर की दर्शनीयता देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है।
हिडिम्बा मंदिर वस्तुत: पाण्डव बंधु भीम की पत्नी हिडिम्बा को समर्पित है। भारत के शानदार प्रांत हिमाचल प्रदेश के मनाली स्थित यह दिव्य-भव्य मंदिर अति प्राचीन है।
धार्मिक स्थान होने के साथ-साथ हिडिम्बा मंदिर एक बेहतरीन पर्यटन केन्द्र के तौर पर भी जाना पहचाना जाता है।
घने-सघन वन क्षेत्र में स्थित हिडिम्बा मंदिर एक भव्य गुफा के निकट स्थित है। सघन वन क्षेत्र में अवस्थित के कारण हिडिम्बा मंदिर क्षेत्र को साधना-ध्यान एवं कर्मकाण्ड के लिए विशिष्ट माना जाता है।
खास यह कि मंदिर अपनी खास वास्तुकला के लिए विशेष तौर से प्रसिद्ध है। अभयारण्य में स्थित हिडिम्बा मंदिर लकड़ी की शानदार नक्काशी के लिए वैश्विक ख्याति रखता है।
इसका मुख्य ऊपरी आकार विशेष तौर से पर्यटकों एवं श्रद्धालुओें को आकर्षित करता है। इसे प्राचीन गुफा मंदिर के तौर पर भी जाना पहचाना जाता है।
हिडिम्बा मंदिर का इतिहास यहां एक अभिलेख में रेखांकित है। विशेेषज्ञों की मानें तो हिडिम्बा मंदिर का निर्माण राजा बहादुर सिंह ने कराया था।
पैगोड़ा शैली में निर्मित यह दिव्य-भव्य मंदिर अति सुन्दर है। खास यह कि हिन्दुओं का यह मंदिर मनाली शहर से बाहर एक दिव्य पहाड़ी पर स्थित है।
मनाली सैर करने आने वाले पर्यटक देवी हिडिम्बा के दर्शन करने हिडिम्बा मंदिर जरूर जाते हैं। देवदार के शानदार एवं सुन्दर वृक्षों से घिरे इस भव्य मंदिर की खूबसूरती बर्फबारी में आैर भी अधिक निखर आती है। मान्यता है कि देवी हिडिम्बा हिमाचल के कुल्लु राजवंश की कुल देवी भी हैं।
खास यह कि मनाली का यह धार्मिक स्थान मनाली हिल स्टेशन से मात्र एक किलोमीटर दूर स्थित है। लकड़ी से निर्मित इस मंदिर में वस्तुत: चार छतें हैं।
नीचे की तीन छतों का निर्माण देवदार की लकड़ी से किया गया है। खास यह कि मंदिर की चौथी एवं शीर्ष छत तांबा एवं पीतल धातु से बनी है।
खास यह कि इन छतों का आकार-प्रकार भिन्न है। नीचे की छत सबसे बड़ी एवं सबसे उपर की छत सबसे छोटी है।
खास यह कि सबसे उपर की सबसे छोटी छत वस्तुत: एक कलश की भांति नजर आती है। करीब चालीस मीटर ऊंचे शंकु आकार मेंं निर्मित इस मंदिर की दीवार खास तौर से पत्थर की हैं।
प्रवेश द्वार पर सुन्दर नक्काशी दर्शनीय है। गर्भगृह में एक विशाल शिला पर देवी का विग्रह स्वरूप है। यह विग्रह स्वरूप ही पूजित है। यहां पर भीम पुत्र घटोत्कच का भी मंदिर है। वस्तुत: हिडिम्बा एक राक्षसी थी लेकिन इस मंदिर में हिडिम्बा को देवी के रूप में पूजा जाता है।
मान्यता है कि हिडिम्बा अपने भाई से बदला लेना चाहती थी। हिडिम्बा ने जब भीम को देखा तो हिडिम्बा मोहित हो गयी। भीम से हिडिम्बा को एक पुत्र घटोत्कच हुआ।
मान्यता है कि भीम ने हिडिम्बा के भाई हिडिम्ब को इसी स्थान पर मारा था। महाभारत की हडिंबा ही हिमाचल की कुल देवी हैं।
मान्यता है कि इस सघन वन क्षेत्र में हिडिम्ब का राज था। महाभारत काल की कथानक की मानें तो पाण्डव इस वन क्षेत्र में प्रवास कर रहे थे।
कई प्रसंग के बाद इसी वन क्षेत्र में भीम का राक्षसी हिडिम्बा के साथ विवाह हुआ था। विवाह के पश्चात हिडिम्बा मानवी बन गयी थी।
इसे दैवीय चमत्कार माना जाता है। जिस स्थान पर देवीकरण हुआ, उसे मनाली माना गया। इसी परिप्रेक्ष्य में हिडिम्बा देवी को ग्राम देवी भी कहा जाता है। पहाड़ी शैली का यह मंदिर विशेष ख्याति रखता है।
भगवान श्री कृष्ण ने हिडिम्बा को जन कल्याण के लिए प्रेरित किया था। जिसके परिणाम स्वरूप हिडिम्बा को देवी का स्थान प्राप्त हुआ। मान्यता है कि देवी हिडिम्बा के दर्शन मात्र से मनौती पूर्ण होती है। यहां धार्मिक उत्सव खास तौर से दर्शनीय होते हैं।
हिडिम्बा मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट कुल्लू-मनाली एयरपोर्ट भुन्टर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिन्दर नगर जंक्शन है। श्रद्धालु या पर्यटक सड़क मार्ग से भी हिडिम्बा मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
32.247330,77.183620
32.247330,77.183620











No comments:
Post a Comment