Friday, 12 April 2019

ज्योतिसार : हिन्दुओं का अद्भुत तीर्थ

   ज्योतिसार तीर्थ को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। ज्योतिसार तीर्थ हिन्दुओं का पवित्र स्थल है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद् भगवत गीता का उपदेश दिया था।

   यहां स्थित विशाल वट वृक्ष गीता उपदेश का साक्षी है। भारत के हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित ज्योतिसार तीर्थ को धर्म शास्त्रों में विशेष महत्व दिया गया है। खास यह कि बरगद का यह विशाल वृक्ष बेहद लोकप्रिय है। 

   कारण इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था। इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण एवं अर्जुन की प्रतिमा विद्यमान है। भगवान श्री कृष्ण रथ पर सवार सारथी के रूप मेें हैं तो उसी रथ पर अर्जुन हाथ जोड़ कर उपदेश का श्रवण कर रहे हैं। 

   मान्यता है कि इस अद्भुत मूर्ति की स्थापना 1967 में कांची काम कोेटि के पीठाधीश्वर शंकराचार्य ने की थी। खास यह कि महाभारत एवं गीता उपदेश पर आधारित लाइट एण्ड साउण्ड शो नित्य सांझ यहां होता है।

   ज्योतिसार तीर्थ ने भव्य-दिव्य महातीर्थ का स्वरूप धारण कर लिया है। खास यह कि इस स्थान का धार्मिक, पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। 
  मान्यता है कि यह पवित्र स्थान गीता का उद्भव स्थल है। महाभारत युद्ध ज्योतिसार तीर्थ स्थल से ही प्रारम्भ हुआ था। 

   कहावत है कि आदि शंकराचार्य ने हिमालय में रहने के दौरान इस स्थान की पहचान की थी। लोक प्रचलित मान्यता है कि इस दिव्य स्थान पर आदि शंकराचार्य ने श्रीमद् भागवत गीता का चिंतन-मनन एवं दर्शन किये थे।

   मान्यता है कि 1895 में कश्मीर के राजा ने इस स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण कराया था। तदोपरांत 1924 में दरभंगा के राजा ने बरगद के वृक्ष के चौतरफा पत्थर का ऊंचा मंच बनवाया था।
  वस्तुत: ज्योतिसार हरियाणा का एक छोटा सा कस्बा है लेकिन इसके धार्मिक महत्व ने ज्योतिसार तीर्थ को शिखर की ख्याति दर्ज करायी।

  कुरुक्षेत्र-पहोवा मार्ग पर थानेसर से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित ज्योतिसार तीर्थ श्रद्धा, आस्था एवंं विश्वास का अद्भुत स्थल है। मान्यता है कि इस स्थान पर भगवान श्री कृष्ण की सदैव कृपा रहती है। 

  विशेषज्ञ ज्योतिसार तीर्थ की शाब्दिक व्याख्या भी करते हैं। ज्योति का आशय प्रकाश से है तो वहीं सार का आशय तालाब से है। 
  इसी स्थान पर भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को विराट स्वरूप के दर्शन दिये थे। पौराणिक कथानक है कि कुरु ने इस क्षेत्र को बार-बार जोेता था। जिससे इस क्षेत्र का नाम कुरुक्षेत्र हो गया। 

   कुरु का परिश्रम देख कर देवराज इन्द्र ने परिश्रम का कारण जानना चाहा तो कुरु ने कहा था कि जो भी व्यक्ति यहां मारा जायेगा या मृत्यु को प्राप्त होगा, वह सीधे पुण्य लोक में जाएगा। देवराज इन्द्र हास-परिहास कर देवलोक को चले गये।

  विशेषज्ञों की मानें तो यह स्थान प्रजापति की उत्तरवेदी कहलाता है। गीता जयंती पर ज्योतिसार तीर्थ की विशिष्ट सजावट एवं श्रंगार किया जाता है। 
   दिव्यता-भव्यता के साथ धार्मिक आयोजन किये जाते हैं। पूजन-अर्चन एवं यज्ञ-हवन आदि विशेष होते हैं। आस्था एवं विश्वास का जनसैलाब दर्शनीय होता है। 

   ज्योतिसार तीर्थ परिसर में एक विशाल जलाशय है। इस जलाशय में श्रद्धालु दर्शन पूजन से पहले स्नान करते है। जलाशय में स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु भगवान श्री कृष्ण एवं महादेव शिव के दर्शन करते हैं।
  खास यह कि विशाल वट वृक्ष पर श्रद्धालु धागा बांध कर मनौती मानते है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि इससे उनकी इच्छाओं की पूर्ति होती है।

   ज्योतिसार तीर्थ की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली है। एयरपोर्ट से ज्योतिसार तीर्थ की दूरी करीब 160 किलोमीटर है। 
   पर्यटक या श्रद्धालु चण्डीगढ़ एयरपोर्ट से भी ज्योतिसार तीर्थ की यात्रा कर सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन कुरुक्षेत्र जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी ज्योतिसार तीर्थ की यात्रा कर सकते हैं।
29.963521,76.771827

No comments:

Post a Comment

तारापीठ मंदिर: धार्मिक पर्यटन    शक्ति उपासना स्थल तारापीठ को अद्भुत एवं विलक्षण धार्मिक स्थल कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। ज...