Monday, 20 May 2019

सारनाथ: बौद्ध धर्म का महातीर्थ

    सारनाथ को बौद्ध धर्म का महातीर्थ कहा जाना चाहिए। भगवान बुद्ध का मंदिर सारनाथ का मुख्य आकर्षण है। खास यह कि सारनाथ बौद्ध महातीर्थ देश दुनिया में खास ख्याति रखता है। 

   दुनिया के बौद्ध धर्मावलंबियों का यह महातीर्थ आस्था एवं ज्ञान का केन्द्र है। भारत के उत्तर प्रदेश के जनपद वाराणसी स्थित सारनाथ बौद्ध धर्म अनुयायियों का वैश्विक केन्द्र है। विशेषज्ञों की मानें तो बोध गया में ज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान गौतम बुद्ध ने सारनाथ में पहला उपदेश दिया था। 

  इस स्थान को धर्म चक्र प्रवर्तन नाम से जाना पहचाना जाता है। धर्म चक्र प्रर्वतन का आशय है कि धर्म चक्र की गति। इसी स्थान से बौद्ध मत के प्रचार-प्रसार हुआ था। इस स्थान को बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थ में से एक माना जाता है। 

   खास यह कि जैन ग्रंथों में इसे सिंहपुर के नाम से जाना पहचाना जाता है। मान्यता है कि जैन धर्म के 11 वें तीर्थंकर श्रेयांसनाथ का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ था। सारनाथ एवं आसपास आकर्षक स्थानों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान हैं।

  सारनाथ का मुख्य आकर्षण सारनाथ भगवान बुद्ध मंदिर, अशोक का चतुर्मुख सिंहस्तम्भ, धामेख स्तूप, चौखण्डी स्तूप, राजकीय संग्रहालय, जैन मंदिर, चीनी मंदिर, मूलगंध कुटी एवं नवीन विहार आदि इत्यादि हैं। 

   खास यह कि संसार के विभिन्न देशों के बौद्ध तथा पर्यटक इस विशिष्ट पर्यटन स्थल सारनाथ की दर्शनीयता के लिए आते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो 1905 में पुरातत्व विभाग ने खुदाई की। इसके बाद सारनाथ का जीर्णोद्धार किया गया। 
  भगवान बुद्ध मंदिर: भगवान बुद्ध मंदिर वस्तुत: भगवान बुद्ध को समर्पित है। मंदिर के मुख्य आसन पर भगवान बुद्ध की अद्भुत प्रतिमा विद्यमान है। भगवान गौतम बुद्ध की यह प्रतिमा सोने की है। लिहाजा प्रतिमा का विशेष आकर्षण है।


   भगवान गौतम बुद्ध के दर्शन करने विदेशी पर्यटक एवं श्रद्धालु बड़ी तादाद में आते हैं। इस मंदिर को मूलगंध कुटी विहार के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। मूलगंंध कुटी विहार वस्तुत: धर्मराजिका स्तूप से उत्तर दिशा में स्थित है।

   भारत भ्रमण पर आये चीनी यात्री ह्वेन त्सांग ने इसका उल्लेख किया था। इसकी ऊंचाई 200 फुट है। मूलगंध कुटी विहार नाम से विख्यात इस मंदिर की नक्काशी अति दर्शनीय है। विशेषज्ञों की मानें तो इसका निर्माण गुप्तकाल में किया गया था। चारो ओर मिट्टी एवं चूने से बना पक्का फर्श शानदार है। 
  चौखण्डी स्तूप: चौखण्डी स्तूप वस्तुत: सारनाथ के अवशिष्ट स्मारकों से अलग है। इस स्थान पर गौतम बुद्ध ने अपने पांच शिष्यों को सर्वप्रथम उपदेश दिया था। 
  स्मारक स्वरूप इस स्तूप का निर्माण किया गया था। यह स्तूप 91.44 मीटर ऊंचा है। इसकी पहचान चौखण्डी स्तूप की है।
  अशोक स्तम्भ: अशोक स्तम्भ मुख्य मंदिर से पश्चिम दिशा में स्थित है। यह अशोक कालीन प्रस्तर स्तम्भ है। इसकी ऊंचाई करीब 17.55 मीटर है। वर्तमान समय में इसकी ऊंचाई 2.03 मीटर है। स्तम्भ का उपरी हिस्सा सारनाथ संग्रहालय में शोभायमान है। 
  सारनाथ संग्रहालय: सारनाथ संग्रहालय गुप्तकालीन सम्पदाओं एवं भगवान गौतम बुद्ध के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित संग्रहालय है। संग्रहालय में गुप्तकालीन कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया है। 
   भगवान बुद्ध की विभिन्न प्रतिमाएं यहां दर्शित हैं। सारनाथ की मूर्तिकला की विशेष शैली यहां खास तौर से दिखती है। मूर्तियों का आत्मिक सौन्दर्य विशेष तौर से दिखता है।

  सारनाथ महातीर्थ की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट बाबतपुर वाराणसी है। 
  बाबतपुर से सारनाथ की दूरी 30 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
25.377627,83.027600

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