मनसा देवी मंदिर: अद्भुत महिमा
मनसा देवी की महिमा अद्भुत एवं निराली कही जानी चाहिए। जी हां, मनसा देवी की महिमा अद्भुत है। भारत के उत्तराखण्ड के हरिद्वार शहर में स्थित मनसा देवी के दर्शन मात्र से ही मानव जीवन का कल्याण हो जाता है।
मनसा देवी का यह स्थान हरिद्वार से करीब 3 किलोमीटर दूर स्थित है। मनसा देवी माता का यह मंदिर शक्तिपीठ की मान्यता रखता है।
मान्यता है कि मनसा देवी के दर्शन मात्र से मानव जीवन के कष्टों का निवारण होता है। वस्तुत: मनसा देवी को भगवान शिव की मानस पुत्री के तौर पर पूजा जाता है।
मान्यता है कि मनसा देवी का प्रादुर्भाव भगवान शिव के मस्तक से हुआ था। लिहाजा देवी का नामकरण मनसा हुआ।
महाभारत में मनसा देवी को जरत्कारु से उल्लेख किया गया है। विशेषज्ञों की मानें तो मनसा देवी को नागराज वासुकी की बहन माना जाता है।
नागराज वासुकी की इच्छा थी कि उनको बहन की प्राप्ति हो लिहाजा भगवान शिव ने नागराज को बहन के रूप मेंं मनसा देवी को दिया था। इस कन्या का तेज इतना अधिक प्रबल था कि नागराज वासुकी नागलोक को पलायन कर गया था।
किवदंती यह भी है कि मनसा देवी का जन्म कश्यप ऋषि के मस्तक से हुआ था। मनसा देवी को वस्तुत: आदिवासियों की देवी के तौर पर माना जाता है। सभी की अपनी-अपनी मान्यताएं हैं।
पर्वतीय क्षेत्र में मनसा देवी को शिव पुत्री एवं नागमाता के रूप में माना जाता है। इनको विष के देवी के रूप में भी देखा जाता है।
कहावत यह भी है कि मनसा देवी का प्रादुर्भाव समुद्र मंथन से हुआ था। मनसा देवी को विष के देवी के तौर पर पश्चिम बंगाल में पूजा जाता है।
मनसा देवी को शैव परम्परा की देवी के तौर पर भी मान्यता है। मनसा देवी मुख्य रूप से सर्प आच्छादित एवं कमल पर विराजमान हैं।
कमल पर 7 नागराज देवी की रक्षा के लिए सदैव विद्यमान दिखते हैं। कई बार मनसा देवी को एक बालक के साथ दिखाया जाता है। यह बालक मनसा देवी का पुत्र आस्तिक है। जिसे वह गोद में लिए दिखती हैं।
मान्यता है कि महाराज युधिष्ठिर ने भी माता मनसा देवी की पूजा अर्चना की थी। माता मनसा देवी के आशीर्वाद से ही पाण्डव महाभारत युद्ध जीत सके थे।
महाभारत युद्ध विजयी होने के पश्चात युधिष्ठिर ने मनसा देवी की स्थापना की थी। इसके बाद दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था।
मान्यता है कि मनसा देवी मंदिर में नागराज के विभिन्न स्वरूपों का जाप करने से सर्प का भय नहीं रहता है। जाप में जरत्कारु, जगद्रोरी, मनसा, सिद्धयोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जरत्कारुप्रिया, आस्तिक माता एवं विषहरी है।
मान्यता है कि विष्णु पुराण में मनसा देवी का विषकन्या केे तौर पर उल्लेख है। मनसा देवी में विष किसी भी विष से अधिक शक्तिशाली था।
लिहाजा ब्राह्मा जी ने मनसा देवी को विषहरी भी कहा था। हरिद्वार स्थित मनसा देवी का यह स्थान अति दर्शनीय एवं सिद्ध है।
नित्य प्रात: माता मनसा देवी का श्रंगार किया जाता है। इसके बाद भोग लगाया जाता है। मनसा देवी मंदिर परिसर में विशाल वृक्ष है। इस वृक्ष में श्रद्धालु धागा बांधते हैं।
शिवालिक की पहाड़ियों पर स्थित मनसा देवी का यह मंंदिर श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है। यह स्थान हिमालय पर्वतमाला के दक्षिणी भाग में आता है। शक्ति स्वरूपा मनसा देवी के दर्शन बेहद कल्याणकारी माने जाते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो मन की इच्छाओं को पूरा करने वाली मनसा देवी साक्षात शिव पुत्री का स्थान है। इस दिव्य-भव्य मंदिर में मनसा देवी की दो प्रतिमायें हैं। एक प्रतिमा आठ भुजाओं वाली है। दूसरी प्रतिमा तीन सिर एवं पांच भुजाओं वाली है।
हरिद्वार में गंगा किनारे पर्वत शिखर पर विद्यमान मनसा देवी का मंदिर आस्था का केन्द्र है। यह देव स्थान लुभावना पर्यटन स्थल भी है। मनसा देवी के दर्शन-पूजन के उपरांत यहां नाग देवता की पूजा होती है।
मनसा देवी मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून है। एयरपोर्ट की दूरी करीब 41 किलोमीटर है। निकटतम रेेलवे स्टेशन हरिद्वार जंक्शन है। श्रद्धालु मनसा देवी मंदिर की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
29.947531,78.156326
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