रघुनाथ मंदिर: विलक्षण स्थापत्य कला
श्री रघुनाथ मंदिर की दिव्यता-भव्यता को विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, श्री रघुनाथ मंदिर का शिल्प सौन्दर्य देश विदेश के श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बरबस आकर्षित करता है।
मंदिर की स्थापत्य कला अति दर्शनीय है। भारत के जम्मू-कश्मीर प्रांत के जम्मू शहर में स्थित श्री रघुनाथ मंदिर का पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व है।
खास यह कि जम्मू स्थित इस दिव्य-भव्य मंदिर के आंतरिक क्षेत्र में सात ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल मौजूद हैं।
विशेषज्ञों की मानें श्री रघुनाथ मंदिर का निर्माण वर्ष 1835 में प्रारम्भ हुआ। वर्ष 1857 में मंदिर निर्माण पूर्ण हो सका। मंदिर का निर्माण महाराजा रणवीर सिंह एवं उनके पिता महाराजा गुलाब सिंह ने कराया था।
खास यह कि मंदिर के आंतरिक क्षेत्र में स्वर्ण आवरण लगा है। जिससे मंदिर का स्वरूप आैर भी अधिक निखर आता है। इस दिव्य-भव्य मंदिर में कई देवी-देवताओं की प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठापित हैं।
मान्यता है कि इस विशाल मंदिर में हिन्दू धर्म के 33 करोड़ देवी देवताओं के लिंगम स्थापित हैं। यह इस मंदिर का विशिष्ट इतिहास है। यह बेहद दर्शनीय है। श्रद्धालुओं को आश्चर्य भी होता है।
खास यह कि श्री रघुनाथ मंदिर आकर्षक कलात्मकता का विशिष्ट उदाहरण है। श्री रघुनाथ मंदिर प्रभु श्री राम को समर्पित है।
खास यह कि श्री रघुनाथ मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख एवं अनोखे मंदिरों में से एक है। खास यह कि मंदिर के आंतरिक क्षेत्र में चौतरफा मंदिरों की एक खास श्रंखला विद्यमान है। इनमें रामायण काल की यश-गाथा का खास उल्लेख है। यहां का सौन्दर्य शिल्प अति दर्शनीय है।
मंदिर का सौन्दर्य शिल्प देख कर श्रद्धालु एवं पर्ययक मुग्ध हो उठते हैं। यह विशाल मंंदिर जम्मू शहर के मध्य स्थित है।
कलात्मकता का यह विशिष्ट उदाहरण वैश्विक ख्याति रखता है। इस मंदिर में बाहर से पांच कलश दर्शनीय होते हैं। यह सभी कलश लम्बाई में फैले हुये हैं।
श्री रघुनाथ मंदिर के गर्भगृह में राम, लक्ष्मण एवं सीता की विशाल मूर्तियां प्राण प्रतिष्ठापित हैं। मंदिर की विशेषता यह है कि मंदिर में रामायण एवं महाभारत काल के चरित्रों को प्रदर्शित किया गया है।
गर्भगृह के चारों ओर विशाल अहाते बने हैं। जिनमें मूर्तियां स्थापित हैं। खास यह है कि एक ही कक्ष में चारों धाम के दर्शन किये जा सकते हैं। चारों ओर एक-एक धाम को प्रतिष्ठापित किया गया है।
रघुनाथ मंदिर में इस प्रकार रामेश्वरम धाम, द्वारकाधीश, बद्रीनाथ एवं केदारनाथ के दर्शन किये जा सकते हैं। एक कक्ष के मध्य में भगवान सत्यनारायण के दर्शन किये जा सकते हैं।
कक्ष के मध्य में उकेरी सूर्य देव की छवि अति सुन्दर है। दीवारों पर बारहमासा दर्शनीय हैं। इसमें माह के अनुसार देवताओं का चित्रण है।
रघुनाथ मंदिर के निर्माण का कथानक भी अति रोचक है। महाराजा गुलाब सिंह को इस मंदिर के निर्माण की प्रेरणा राम दास वैरागी से मिली थी। मान्यता है कि महाराजा गुलाब सिंह को राम दास वैरागी ने राजा बनने की भविष्यवाणी की थी।
राजा-महाराजा बनने पर राम दास वैरागी की भविष्यवाणी सत्य निकली थी। राम दास वैरागी भगवान श्री राम के भक्त थे। बताते हैं कि राम दास वैरागी भगवान श्री राम का प्रचार करने अयोध्या से जम्मू आये थे।
सुई सिम्बली में वह कुटिया बना कर रहते थे। राम दास वैरागी ने पहला राम मंंदिर का निर्माण सुई सिम्बली में कराया था।
इसके पश्चात जम्मू में रघुनाथ मंदिर का दिव्यता-भव्यता के साथ निर्माण कराया गया था। खास यह कि इस दिव्य-भव्य मंदिर में सिख स्थापत्य कला के भी शानदार दर्शन होते हैं।
रघुनाथ मंदिर में रामनवमी का त्योहार-पर्व अति दर्शनीय होता है। खास यह कि मंदिर की सामाजिक एवं सांस्कृतिक भूमिका भी होती है। यहां एक शानदार पुस्तकालय एवं विद्यालय भी है।
मंदिर में सारदा लिपि में दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपियां भी हैं। पुस्तकालय में करीब 6000 पांडुलिपियां हैं। कश्मीर परम्परा के हिन्दुओं एवं बौद्ध ग्रंथों का यहां बड़ा संग्रह है।
विशेषज्ञों की मानें तो रघुनाथ मंदिर पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण की पहल का प्रारंभिक प्रवर्तक रहा है।
रघुनाथ मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जम्मू एयरपोर्ट है। मंदिर से एयरपोर्ट की दूरी करीब 8 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू तवी जंक्शन है। श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी रघुनाथ मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
32.726601,74.857025
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