Monday, 18 February 2019

कमल मंदिर: अद्भुत स्थापत्यकला

   कमल मंदिर को धर्म, आध्यात्म एवं सौन्दर्य शास्त्र की एक नई इबारत कहा जाना चाहिए। जी हां, कमल मंदिर को अत्याधुनिक युग का एक सम्पूर्ण आराधना स्थल कहा जा सकता है।

   कारण आस्था एवं विश्वास की पंखुड़ियां ह्मदय से अंकुरित होती हैं। कमल मंदिर में कुछ इस तरह की उपासना पद्धति दिग्दर्शित होती है। 
  आशय यह कि आराधक का अपने आराध्य के प्रति भावनाओं का समर्पण होना चाहिए।

   न कोई मूर्ति न कोई धार्मिक कर्मकाण्ड। बस आराध्य के प्रति ह्मदय का समर्पण दिखता है। भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के नेहरू प्लेस स्थित कमल मंदिर एक अद्भुत उपासना स्थल है।
   नई दिल्ली के कालका जी क्षेत्र के गांव बाहापुर में स्थित यह विशाल मंदिर अद्भुत एवं विलक्षण है।

   इसे बहाई उपासना मंदिर एवं लोटस टेम्पल भी कहा जाता है। वस्तुत: लोटस टेम्पल का आकार प्रकार कमल के फूल की भांति है। लिहाजा इसे लोटस टेम्पल की ख्याति हासिल है। 
  बहाई धर्म के संस्थापक बहाउल्लाह ने दुनिया को इंसानियत का संदेश दिया। कमल मंदिर वस्तुत: बहाई उपासना मंदिर है। 

  विशेषज्ञों की मानें तो बहाई धर्म की स्थापना ईरान में हुई थी। खास यह कि कमल मंदिर अपने आप में एक अनूठा मंदिर है।
   भारत के लिए कमल का फूल शांति एवं पवित्रता का प्रतीक है। साथ ही कमल ईश्वर के अवतार का संकेत चिह्न भी माना जाता है।

  कमल का फूल कीचड़ में खिलने के बावजूद पवित्र एवं स्वच्छ रहने की सीख देता है। कमल मंदिर इस संदेश को रेखांकित करता है।
  कमल मंदिर में कोई भी आराधना, उपासना एवं इबादत कर सकता है। कमल के स्वरूप को दर्शित करने वाला यह मंदिर भारत सहित दुनिया में खास ख्याति रखता है।

  शायद इसीलिए यह उपासना मंदिर वैश्विक पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। भारतीय संस्कृति दर्शन कमल मंदिर में अक्षरश: फलीभूत होते दिखती है। अनेकता में एकता के दर्शन यहां होते हैं।
   बहाई धर्म आधारित कमल मंदिर का उद्घाटन 24 दिसम्बर 1988 को किया गया। हालांकि 1 जनवरी 1987 में इसे खास एवं आमजन के लिए समर्पित कर दिया गया। 

  कमल की आकृति आधारित होने के कारण शीघ्र ही इसे कमल मंदिर या लोटस टेम्पल के तौर पर ख्याति हासिल होने लगी। हालांकि इसका मूल बहाई उपासना मंदिर है।
   बहाई उपासना मंदिर वस्तुत: गौरव, शांति एवं उत्कृष्ट वातावरण को ज्योतिर्मय करता है। यह स्थितियां श्रद्धालुओं एवं उपासकों को आध्यात्मिक तौर पर प्रोत्साहित करती हैं। 

  उपासना मंदिर परिसर में सौन्दर्य की एक नई इबारत दिखती है। मखमली घास के मैदान, सुगंधित फूलों की एक लम्बी श्रंखला, सफेद संगमरमर के आलीशान भवन, ऊंचे गुम्बद वाला प्रार्थना सभागार एवं निर्मल जल वाले सुन्दर जलाशय आदि इत्यादि बहुत कुछ दर्शनीय है।
   आशय यह कि आध्यात्मिक उपासना के लिए पर्याप्त सभी कुछ है। बिना प्रतिमाओं का यह मंदिर पर्यटकों एवं उपासकों का आराधना स्थल है। प्रत्येक घंटे यहां लघु अवधि की प्रार्थना होती है। हजारों उपासक इस प्रार्थना में शामिल होते हैं।

   मंदिर का स्थापत्य परिवेश वास्तुकार फरीबर्ज ने तैयार किया है। परिसर में एक सूचना केन्द्र भी है। इस सूचना केन्द्र में बहाई धर्म के बारे में बताया गया है।
  इस केन्द्र में दो लघु सभागार भी है। विशेषज्ञों की मानें तो दुनिया में इस तरह के सात बहाई उपासना मंदिर हैं।

  यह मंदिर भारत के अलावा पश्चिम एशिया समोआ, सिडनी-आस्ट्रेलिया, कंपाला-यूगांडा, पनाना सिटी-पनामा, फ्रैंकफर्ट-जर्मनी, विलमॉट-संयुक्त राज्य अमेरिका में हैं। प्रत्येक उपासना मंदिर की बुनियादी रूपरेखा काफी कुछ मिलती जुलती हैं। इन मंदिरों को सांस्कृतिक दर्शन के तौर पर भी देखा जा सकता है।

  इन सभी कमल मंदिरों की सार्वलौकिक विलक्षणता है। नौ कोनों पर आधारित यह कमल मंदिर बेहद आकर्षक एवं दर्शनीय हैं। मान्यता है कि 9 का अंक सबसे बड़ा होता है। 
  लिहाजा इसे आधार बनाया गया है। यह विस्तार, एकता एवं अखंडता को प्रदर्शित करता है। उपासना मंदिर नौ बड़े जलाशयों से घिरा है। 

   यह जलाशय मंदिर की सुन्दरता को बढ़ाते हैं। साथ ही यह जलाशय उपासना मंदिर को प्राकृतिक रूप से शीतल रखते हैं। सांझ की लालिमा में सफेद संगमरमर की यह इमारत बेहद सुन्दर एवं अद्भुत प्रतीत होती है। 
  कमल की पंखुड़ियों की तरह खड़ी यह इमारत बेहद दर्शनीय है। चौतरफा दूब एवं हरियाली का आच्छादन परिवेश को अति सुन्दर बना देते हैं। इसकी विहंगमता का सहज अनुमान इसी से लगा सकते हैं कि प्रार्थनागार में एक साथ 2300 से अधिक उपासक बैठ सकते हैं।
   कमल मंदिर का निर्माण 10 वर्ष की अवधि में पूर्ण हो सका। कमल मंदिर करीब 25 एकड़ क्षेत्रफल में फैला हुआ है। कमल की 27 पंखुड़ियां इमारत को अति शोभायमान बना देती हैं। चौतरफा बाग-बगीचों से घिरा यह कमल मंदिर दिल्ली की शान है। पर्यटकों एवं उपासकों की भारी भीड़ यहां उमड़ती रहती है।
   लोटस टेम्पल की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली है। निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी कमल मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
28.550210,77.258580

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