Sunday, 17 February 2019

गोमतेश्वर मंदिर : जैन धर्म का महातीर्थ

   गोमतेश्वर मंदिर को श्रद्धा एवं सौन्दर्य शास्त्र का एक शानदार स्मारक कहा जाना चाहिए। धर्म एवं वास्तुशिल्प का यह सुन्दर स्मारक बहुत कुछ विशिष्टता रखता है। 

  भारत के कर्नाटक राज्य के श्रवणबेलगोला शहर में स्थित गोमतेश्वर मंदिर वस्तुत: भगवान बाहुबली को समर्पित है।
   भगवान बाहुबली को समर्पित यह मंदिर गोमतेश्वर मंदिर के तौर पर खास ख्याति रखता है। विशेषज्ञों की मानें तोे इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में किया गया था। 

  खास यह कि जैन धर्म का यह सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ धाम है। गोमतेश्वर मंदिर में भगवान बाहुबली की दिव्य-भव्य प्रतिमा विलक्षण एवं अद्भुत है।
  प्रतिमा की विशिष्टता वैश्विक ख्याति रखती है। करीब 58.8 फुट ऊंची यह विशाल प्रतिमा विश्व के विशेष आकर्षण का केन्द्र है।

  ग्रेनाइट पत्थर पर संरचित यह प्रतिमा भगवान बाहुबली की आदमकद छवि को दर्शित करती है। यह अखंड संरचना अद्भुत एवं शानदार है।
   विशेषज्ञों की मानें तो 12 वर्ष की अवधि में एक बार यहां विशेष आयोजन होता है। इसे महामस्तकाभिषेक कहा जाता है। 

   जैन धर्म का यह विशेष पर्व-त्योहार होता है। इसमें भगवान बाहुबली का विशेष अभिषेक किया जाता है। 
   भगवान बाहुबली का यह विशेष अभिषेक केसर, गन्ना, हल्दी, दूध, सिंदूर आदि से किया जाता है। इसमें कीमती पत्थरों, स्वर्ण-रजत धातुओं सहित बहुत कुछ उपयोग किया जाता है। 

  कर्नाटक के शहर मैसूर से करीब 84 किलोमीटर दूर श्रवणबेलगोला में स्थित यह मंदिर जैन धर्म के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। यहां बाहुबली स्तंभ भी है।
   विशेषज्ञों की मानें तो भगवान बाहुबली मोक्ष प्राप्त करने वाले प्रथम तीर्थंकर थे। कुंड पहाड़ी की तलहटी में स्थित गोमतेश्वर मंदिर के मार्ग में जैन मंदिरों की एक श्रंखला है। 
 
  खास यह कि वैश्विक पर्यटकों का यह विशेष आकर्षण का केन्द्र है। विशेषज्ञों की मानें तो एक विशाल पत्थर पर संरचित यह प्रतिमा दुनिया की इकलौती प्रतिमा है।
   गोमतेश्वर मंदिर श्रवणबेलगोला शहर का मुख्य आकर्षण है। विशेषज्ञों की मानें तो गंग वंश के राजा राजमल्ल एवं उनके सेनापति चामुंडराय ने इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। इस विशालकाय मूर्ति के मूर्तिकार जाकनचारी को माना जाता है। 

   गोमतेश्वर मंदिर में भगवान बाहुबली की विशाल प्रतिमा शहर एवं शहर के बाहर से दिखती है। 
  विशेषज्ञों की मानें तो इस विशाल प्रतिमा को 30 किलोमीटर दूर से भी आसानी से देखा जा सकता है। फाल्गुनी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर अपने खास वास्तुशिल्प के लिए भी जाना पहचाना जाता है। 

   गोमतेश्वर मंदिर कर्नाटक के विशेष तीर्थ स्थल एवं मुख्य पर्यटन स्थल के तौर पर विशेष ख्याति रखता है। इसे बाहुबली मंदिर भी कहा जाता है।
   विशेषज्ञों की मानें तो भगवान बाहुबली तीर्थंकर आदिनाथ के दूसरे पुत्र थे। आदिनाथ के 100 बेटियां थीं। आदिनाथ ने जब राज्य छोड़ा तो उनके पुत्रों भरत एवं बाहुबली के बीच झगड़ा हुआ। 

  इस झगड़े में बाहुबली को विजय मिली। यह देख आदिनाथ एवं भगवान बाहुबली स्वयं विचलित हुए। आदिनाथ एवं भगवान बाहुबली ने भरत को राज्य का प्रभार सौंप दिया। 

   इस प्रकार भगवान बाहुबली को सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हुआ। किवदंती यह भी है कि मौर्य सम्राट चन्द्रगुप्त ने अपने राज्य का परित्याग कर मैसूर के श्रवणबेलगोला में समय व्यतीत किया था। इसी काल में गोमतेश्वर मंदिर का निर्माण हुआ।

  बाहुबली अर्थात गोमतेश्वर को जैनधर्म में विशिष्ट स्थान हासिल है। पहाड़ी के नीचे कल्याणी नामक विशाल झील है। इसे धवल सरोवर कहा जाता है। 
  मान्यता है कि गोमतेश्वर या भगवान बाहुबली की प्रतिमा में शक्ति, साधुत्व, बल एवं उदारवादी भावनाओं का अद्भुत प्रदर्शन है।

   गोमतेश्वर मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट बेंगलुरू इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन श्रवणबेलगोला जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी गोमतेश्वर मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
12.308440,76.653930

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