Sunday, 10 February 2019

नन्दा देवी पर्वत: धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व

   नन्दा देवी पर्वत की राजजात यात्रा किसी धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक उत्सव से कम नही। नन्दा देवी पर्वत का अपना एक विशिष्ट धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व है।

   उत्तराखण्ड के चमोली जिला के इस विशाल पर्वत की अपनी एक धार्मिक मान्यताएं हैं। मान्यता है कि उत्तराखण्ड का नन्दा देवी पर्वत वस्तुत: हिमालय की पुत्री हैं।
   हिमालय पुत्री पार्वती के स्वरूप नन्दा देवी के दर्शन होते हैं। लोकपरम्पराओं में नन्दा देवी को ऋषि हिमवंत अर्थात हिमालय एवं मैनावती की पुत्री के तौैर पर दर्शन होते हैं।


   नन्दा देवी पर्वत को उत्तराखण्ड में अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। राजजात यात्रा को भगवान भोलेनाथ महादेव एवं पार्वती का विवाह उत्सव माना जाता है। 
  राजजात यात्रा कर्णप्रयाग के नौटी गांव से प्रारम्भ होकर करीब 280 किलोमीटर पैदल यात्रा के बाद हिमालय की ऊंची श्रंखला स्थित हेमकुंड पहंुचती है।

   हेमकुंड में पूजा अर्चना के पश्चात राजजात यात्रा नौटी वापस आती है। मान्यता है कि हेमकुंड नन्दा देवी अर्थात देवी पार्वती की ससुराल है।
   पार्वती जी 12 वर्ष में एक बार ससुराल से मायके आती हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में राजजात यात्रा का आयोजन होता है। 

  राजजात यात्रा कई दुर्गम मार्गों होते हुए हेमकुंड पहंुचती है। देवी पार्वती को धूमधाम से ससुराल भेजा जाता है।
   उत्तराखण्ड के बाशिंदे नन्दा देवी से बहन-बेटी का रिश्ता समझते हैं। इसे एक सांस्कृतिक विरासत के तौर पर भी देखा जाता है।
   खास यह कि राजजात यात्रा में महिलाएं उसी तरह से शामिल होती हैं, जैसे किसी विवाह समारोह में शामिल होती हैं। विदाई का दृश्य अत्यंत भावुक करने वाला होता है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो नन्दा देवी पर्वत भारत की दूसरी एवं विश्व की 23 वीं सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। उल्लेखनीय है कि भारत की सर्वोच्च ऊंची चोटी कंचनजंगा है।
   उत्तराखण्ड की पूर्व दिशा में गौरीगंगा एवं पश्चिम में ऋषिगंगा घाटियों-वादियों के मध्य नन्दा देवी पर्वत स्थित है। नन्दा देवी पर्वत की समुद्र तल से ऊंचाई करीब 7816 मीटर है। 

  इस चोटी को उत्तराखण्ड में मुख्य देवी के तौर पर पूजा जाता है। इसे नन्दा देवी भी कहा जाता है। खास यह कि नन्दा देवी पर्वत देव स्थान होने के साथ-साथ इसका पर्यटन की दृष्टि से विशेष महत्व है। इसे पर्वतारोेहण की दृष्टि से किसी स्वर्ग की भांति माना जाता है। 

  खास यह है कि नन्दा देवी पर्वत की कई चोटियां 21000 फुट से भी अधिक ऊंचाई वाली हैं। लोककथाओं एवं किवदंतियों में नन्दा देवी पर्वत की यशोगाथा का श्रेष्ठतम वर्णन मिलता है।

   नन्दा देवी शिखर पर स्थित रूपकुंड एवं 12 वर्ष में एक बार आयोजित होने वाली नन्दा देवी राजजात यात्रा उत्तराखण्ड में आस्था एवं विश्वास का प्रतीक है। 
  खास यह कि नन्दा देवी पर्वत के दर्शन आैली, बिनसर एवं कौसानी आदि पर्यटन स्थलों से भी किये जा सकते हैं। 

   खास यह कि राजजात यात्रा धार्मिक आयोजन से कहीं अधिक पारिवारिक रिश्तों का उत्सव होता है। 
  खास यह कि इस सांस्कृतिक उत्सव में उत्तराखण्ड के बाशिंदों के अलावा देश दुनिया के श्रद्धालु एवं पर्यटक बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। 

  श्रद्धालु राजजात यात्रा में श्रद्धा के साथ नतमस्तक होते हैं तो वहीं पर्यटन का भी भरपूर लुफ्त लेते हैं। पर्यटकों के दिल-दिमाग को फूलों एवं वनस्पतियों की सुगंध एक विशेष ताजगी प्रदान करती है।

  मखमली घास की हसीन वादियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।
   नन्दा देवी पर्वत की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून है। 

   जॉली ग्रांट एयरपोर्ट से नन्दा देवी पर्वत की दूरी करीब 222 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार जंक्शन है। हरिद्वार जंक्शन से नन्दा देवी पर्वत की दूरी करीब 202 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी नन्दा देवी पर्वत की यात्रा कर सकते हैं।
30.554800,79.566000

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