Monday, 4 February 2019

श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर: अद्भुत सौन्दर्य

   श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर के सौन्दर्य शास्त्र का कोई जोड़ नहीं। जी हां, इस जैन मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। 

  भारत की राजधानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर की सुन्दरता का कहीं कोई मुकाबला नहीं। 
  खास यह कि मुगल शासक शाहजहां के शासनकाल 1656 में निर्मित इस अद्वितीय मंदिर की ख्याति वैश्विक है। अति प्राचीन श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर दिल्ली का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। 

  लाल बलुआ पत्थर से निर्मित इस भव्य-दिव्य मंदिर का रंग सुर्ख लाल है। लिहाजा इसे जैन लाल मंदिर के नाम से भी जाना पहचाना जाता है।
   खास यह कि श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर 23 वें तीर्थंकर पाश्र्वनाथ को समर्पित है। श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर में भगवान महावीर, पाश्र्वनाथ एवं अन्य जैन मुनियों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। 

  लाल किला के सामने स्थित श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर जैन धर्म के श्रेष्ठतम धर्म स्थल के तौर पर मान्य है।
  विशेषज्ञों के मानें तो मुगल शासक शाहजहां ने अपने शासनकाल में कई जैन परिवारों को शहर में आकर बसने एवं व्यापार करने का आमंत्रण दिया था।

  इसी परिप्रेक्ष्य में इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण जैन बंधुुओं ने किया था। जैन धर्म के सिद्धांत भी यहां फलीभूत होते दिखते हैं।
  निर्माण काल के दौरान श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर को उर्दू मंदिर के नाम से भी जाना पहचाना जाता था। कारण इस क्षेत्र को प्राचीनकाल में उर्दू बाजार भी कहा जाता था।

  श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर को प्राचीनकाल में लश्करी मंदिर भी कहा गया। कारण यह मंदिर प्राचीनकाल में सेना क्षेत्र में था।
  हालांकि किवदंती यह भी है कि श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर के चमत्कारिक स्वरूप को देख कर मुगल शासक भी नतमस्तक हुए थे। 

  विशेषज्ञों की मानें तो शाहजहां के उत्तराधिकारी आैरंगजेब ने एक बार मंदिर में सभी वाद्य यंत्रों को बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया था। 
  चमत्कार यह कि प्रतिबंध के बावजूद मंदिर से नगाड़ा बजने की प्रतिध्वनि सुनाई दे रही थी। बादशाह आैरंगजेब चमत्कार देखने खुद मंदिर पहंुचे। 

  चमत्कार देख कर प्रतिबंध हटा लिया था। खास यह कि श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर क्षेत्र में मंदिरों की एक श्रंखला है। इनमें खास गौरी शंकर मंदिर है। गौरी शंकर मंदिर लाल मंदिर के ठीक बगल में स्थित है।
   इसका निर्माण 1761 में अप्पा गंगाधर ने कराया था। श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर श्रषभनाथ की प्रतिमा भी भगवान महावीर के साथ विद्यमान है। खास यह कि यहां तीर्थंकर भगवान पाश्र्वनाथ की समाधि है। 

  श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर के ठीक सामने एक मानस्तंभ है। मंदिर का मुख्य भक्ति क्षेत्र मंदिर के प्रथम तल पर है। मंदिर कई आंगन को पार करने के उपरांत स्थित है।
   श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर में मुख्य प्रतिमा भगवान महावीर की है। विशेषज्ञों की मानें तो भगवान जैन धर्म के 24 वें एवंं अंतिम तीर्थंकर हैं। 
  राजकुमार के तौर पर जन्म लेने वाले भगवान महावीर ने सभी सांसारिक सुख एवं वैभव को त्याग कर मोक्ष की तलाश में निकले थे।

   भगवान महावीर को जैन धर्म का संस्थापक भी माना जाता है। हालांकि इस जैन मंदिर को जैन धर्म का विशेष माना जाता है। हालांकि ऐसा है नहीं। 
   कारण श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर में सभी धर्म के आस्थावान श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर की ख्याति वैश्विक स्तर पर है। 

   अहिंसा परमो धर्म: का संदेश यहां साक्षात दिखता है। श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर में पक्षियों के उपचार का एक प्रसिद्ध अस्पताल है। इसे बर्ड हास्पिटल के तौर पर जाना पहचाना जाता है।
   विशेषज्ञों की मानें तो यह दुनिया का अपनी तरह का इकलौता अस्पताल है। विशेषज्ञों की मानें तो इस अस्पताल में प्रतिवर्ष करीब 15000 पक्षियों का उपचार होता है।

  पक्षियों के उपचार की यह परम्परा करीब 90 वर्ष से अनवरत चली आ रही है। आचार्य देवभूषण के दिशा निर्देश पर 1957 में इस इमारत का निर्माण किया गया था।

   श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली है। निकटतम रेलवे स्टेशन दिल्ली जंक्शन है।
   हालांकि श्रद्धालु या पर्यटक नई दिल्ली जंक्शन से भी श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर की यात्रा कर सकते हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी श्री दिगम्बर जैन लाल मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
28.651900,77.238820

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