कालका मंदिर: प्राचीन इतिहास
कालका मंदिर की विलक्षता का कोई जोड़ नहीं। जी हां, दक्षिणी दिल्ली स्थित कालका मंदिर वस्तुत: काली जी को समर्पित है।
भारत की राजधानी दिल्ली के दक्षिणी इलाके में स्थित इस दिव्य-भव्य मंदिर की स्थापत्य कला, शिल्प कला एवं वास्तु शास्त्र अद्भुत है।
मां भगवती देवी काली को समर्पित यह मंदिर अति प्राचीन एवं सिद्ध स्थान है। विशेषज्ञों की मानें तो कालका मंदिर का निर्माण महाभारत काल से पूूर्व अवधि का है।
किवदंती है कि देवता क्षेत्र के आतताईयों से परेशान थे। देवताओं ने भगवान ब्रह्मा से अाग्रह कि आतताईयों के आंतक से मुक्त करायें।
ब्रह्मा जी ने देवताओं को परामर्श दिया कि देवी पार्वती से सहायता मांगें। मान्यता है कि देवी कालका जी भगवान ब्रह्मा जी के परामर्श से देवताओं ने देवी भगवती की आराधना की थी।
अनुष्ठान, आराधना एवं प्रार्थना से प्रसन्न देवी काली जी ने मंदिर स्थल पर देवताओं को साक्षात दर्शन दिये थे। आशीर्वाद दिया था।
इसके पश्चात देवी काली ने इसी स्थान को आश्रय बना लिया था। किवदंती है कि काली जी ने यहां आतताईयों का वध कर उनके रक्त का पान किया था।
विशेषज्ञों की मानें तो महाभारत काल में भगवान श्री कृष्ण ने काली जी के इस स्थान का उल्लेख किया था। पाण्डव ने यहां काली जी के दर्शन कर युद्ध किया था।
जिसमें पाण्डव को विजय हासिल हुई थी। युधिष्ठिर के शासनकाल से ही इस दिव्य-भव्य मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है।
मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण काली ब्राह्मणों एवं ठोक जोगियों ने संयुक्त तौर पर किया था। खास यह कि कालका मंदिर को जयंती पीठ एवं मनोकामना सिद्ध पीठ भी कहा जाता है।
मनोकामना का शाब्दिक अर्थ इच्छा होता है। सिद्ध का आशय तृप्ति से होता है। पीठ का अर्थ तीर्थ होता है। काली जी का यह मंदिर पवित्र माना जाता है।
विशेषज्ञों की मानें तो काली जी का यह स्थान ऐसा है, जहां श्रद्धालुओं को मां कालिका देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इस दिव्य-भव्य मंदिर का वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य कला अति दर्शनीय है। र्इंट की चिनाई से बना यह मंदिर अति दर्शनीय है। यहां संगमरमर की खूबसूरती अलग ही दिखती है।
खास यह कि मंदिर में मेहराबदार शानदार द्वार हैं। बाघ की छवियां भी दर्शनीय हैं। काली जी प्रतिमा पत्थर की है। सामने ही एक त्रिशूल खड़ा है। नवरात्र में काली जी का भव्य-दिव्य उत्सव होता है। जिसमें श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है।
नित्य यहां अनुष्ठान का विधान है। प्रात:काल की आरती के बाद दूध से माता भगवती काली जी का अभिषेक किया जाता है।
सांझ को पुन: एक बार भव्य दिव्य आरती होती है। मंदिर में पुजारियों की परम्परा जोगियों एवं महंत के एक वंश की है।
मान्यता है कि माता काली के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति होती है। लिहाजा काली जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
यात्रा कर श्रद्धालु काली जी के दर्शन कर पुण्य के भागी बन सकते हैं। खास यह कि काली जी का यह मंदिर सांझ होते ही रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठता है।
कालका मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट इन्दिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट नई दिल्ली है। निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी कालका मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
28.550210,77.258580
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