Tuesday, 15 January 2019

कांचीपुरम: मोक्ष की धरती, अद्भुत स्थापत्य कला

   कांचीपुरम को भारत का तीर्थ धाम कहा जाना चाहिए। जी हां, कांचीपुरम में धार्मिकता का श्रेष्ठतम एहसास होता है। 

   वस्तुत: भारत के तमिलनाडु प्रांत के कांचीपुरम को मंदिरों का शहर कहा जाना चाहिए। कारण कांचीपुरम में सैकड़ों अद्भुत एवं अद्वितीय मंदिर विद्यमान हैं। 
  विशेषज्ञों की मानें तो कांचीपुरम भारत के सात श्रेष्ठ धार्मिक स्थानों में एक है। मान्यता है कि कांचीपुरम मोक्ष का स्थान है।

  खास यह ब्राह्म मुहूर्त से मंदिरों में पूजन-अर्चन एवं शंखनाद की प्रतिध्वनि अनुगूंजित होने लगती है। इस शहर को विलक्षण कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
  इसका एक बड़ा कारण है कि कांचीपुरम के प्रत्येक मंदिर का वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य कला अतुलनीय है। प्रत्येक मंदिर की वास्तुकला का एक विशेष आकर्षण है।

   शायद इसी लिए कांचीपुरम के मंदिर देश दुनिया में खास तौर से प्रसिद्ध हैं। सामान्य तौर पर इसे मंदिरों का शहर या धार्मिक शहर माना जाता है। यहां प्रत्येक मंदिर की कुछ खासियत है। 
   कैलाश नाथ मंदिर: कैलाश नाथ मंदिर शहर की पश्चिम दिशा में स्थित है। कैलाश नाथ मंदिर को दक्षिण भारत का सर्वाधिक शानदार मंदिर माना जाता है। इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी में किया गया था। 

   पल्लव राजवंश के राजा राजसिम्हा ने अपनी पत्नी की प्रार्थना पर इस विशाल मंदिर का निर्माण कराया था। मंंदिर के अग्र भाग का निर्माण राजा के पुत्र महेन्द्र वर्मन तृतीय ने कराया था।
   मंदिर में देवी पार्वती एवं भगवान शिव की नृत्य प्रतिस्पर्धा का दर्शन है। आस्था एवं विश्वास के इस केन्द्र में मुख्य भगवान शिव एवं देवी पार्वती के दर्शन होते हैं।
  बैकुंठ पेरुमल मंदिर: बैकुंठ पेरुमल मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण सातवीं शताब्दी में पल्लव राजा नंदीवर्मन पल्लवमल्ला ने कराया था। मंदिर में भगवान विष्णु की विभिन्न मुद्राओं में प्रतिमाएं हैं। 

   भगवान विष्णु की विभिन्न मुद्राओं में खास तौर से बैठी प्रतिमा, खड़ी प्रतिमा एवं विश्राम करती प्रतिमा विद्यमान हैं। 
  खास तौर से मंदिर की दीवारों पर पल्लव एवं चालुक्यों के युद्ध दृश्यों का सजीव चित्रण है। मंदिर में 1000 स्तम्भ वाला विशाल हाल है।

  यह विशाल हाल पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को विशेष तौर पर आकर्षित करता है। प्रत्येक स्तम्भ पर शानदार एवं सजीव नक्काशी दर्शनीय है। यह शानदार कारीगरी की श्रेष्ठतम संरचना है। 
   कामाक्षी अम्मन मंदिर: कामाक्षी अम्मन मंदिर वस्तुत: शक्ति स्थल है। देवी पार्वती को समर्पित यह मंदिर 1.6 एकड़ में फैला है। देवी कामाक्षी अम्मन को देवी पार्वती का स्वरूप माना जाता है।
   यह पार्वती की अभिव्यक्तियों में से एक माना जाता है। यहां देवी पार्वती की विभिन्न मुद्राओं में प्रतिमाएं हैं। कामाक्षी अम्मन मंदिर में पार्वती जी की पद्मासन में प्रतिमा है।
  यह एक योगिक प्रतिमा है। खास यह कि यह दिव्य-भव्य मंदिर शहर के मध्य में स्थित है। इस विशाल मंदिर का निर्माण पल्लव राजवंश ने कराया था। इसका पुर्नरुद्धार 14वीं एवं 17 वीं शताब्दी में कराया गया था।
   एकमबारानाथर मंदिर: एकमबारानाथर मंदिर वस्तुत: भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण पल्लव राजवंश के राजाओं ने कराया था। 
  बाद में इसका पुर्ननिर्माण चोल एवं विजय नगर के राजाओं ने कराया था। करीब 11 खण्ड वाला यह मंदिर दक्षिण भारत के सबसे ऊंचे मंदिरों में से एक है।
 मंदिर में आकर्षक एवं दर्शनीय प्रतिमाएं हैं। एकमबारानाथर मंदिर का विशेष आकर्षण 1000 से अधिक स्तम्भ वाला विशाल मण्डपम है।

  विशेष यह कि एकमबारानाथर मंदिर कांचीपुरम का सबसे बड़ा मंदिर है। खास यह कि एकमबारानाथर मंदिर का शिवलिंग रेत से बना है।
  मान्यता है कि इस शिवलिंग को भगवती पार्वती ने बनाया था। एकमबारानाथर मंदिर में श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा है। 
   वरदराज मंदिर: वरदराज मंदिर वस्तुत: भगवान विष्णु को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु को देवराजस्वामी के रूप में पूजा जाता है।
  खास यह कि इस दिव्य-भव्य मंदिर में 100 स्तम्भ वाला विशाल हाल है। इसे विजय नगर के राजाओं ने बनवाया था।
  वास्तुशिल्प एवं स्थापत्य कला की यह अद्भुत संरचना पर्यटकों को विशेष तौर से आकर्षित करती है। विशेषज्ञों की मानें तो वरदराज मंदिर भगवान विष्णु के 108 मंदिरों में से एक है।
   कांचीपुरम की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट चेन्नई एयरपोर्ट है। चेन्नई से कांचीपुरम की दूरी करीब 75 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन चेन्नई जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी कांचीपुरम की यात्रा कर सकते हैं। कांचीपुरम देश के सभी मुख्य सड़क मार्गों से जुड़ा है।
12.836140,79.706650

No comments:

Post a Comment

तारापीठ मंदिर: धार्मिक पर्यटन    शक्ति उपासना स्थल तारापीठ को अद्भुत एवं विलक्षण धार्मिक स्थल कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। ज...