Wednesday, 23 January 2019

शनिदेव धाम शिंगणापुर: अद्भुत स्थान

   शनिदेव धाम को चमत्कारिक कहा जाना चाहिए। जी हां, महाराष्ट्र के अहमद नगर जिला स्थित शनिदेव धाम की महिमा निराली है। 

   अहमद नगर के शिंगणापुर स्थित शनिदेव की प्रतिमा विलक्षण है। विश्व प्रसिद्ध इस मंदिर की विशेषता है कि सूर्य पुत्र शनिदेव खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं। शनिदेव की यह प्रतिमा पाषाण की है। 

  सुन्दर संगमरमर के विशाल चबूतरा पर विराजमान शनिदेव के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति होती है। ऐसी मान्यता है। 
  शनिदेव के इस स्थान पर न कोई गुम्बद है आैर न ही कोई छत है। शिंगणापुर का शनिदेव धाम विश्व में खास ख्याति रखता है। 

   शनिदेव की प्रतिमा करीब पांच फुट नौ इंच लम्बी है। प्रतिमा एक फुट छह इंच चौड़ी है। यह काली पाषाण प्रतिमा है।
   शनिदेव की इस भव्य-दिव्य प्रतिमा के निकट एक त्रिशूल स्थापित है। छवि की दक्षिण ओर नन्दी की प्रतिमा स्थापित है। सामने शिव एवं हनुमान के दर्शन होते हैं। 
  विशेष अवसर पर शनिदेव की बारात का भी आयोजन होता है। जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। 
   शनिदेव धाम की पवित्र परम्परा 400 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। भारत के प्रांत महाराष्ट्र का शिंगणापुर देश-विदेश के श्रद्धालुओं के मध्य आश्चर्यजनक बना हुआ है।
   न्याय के इस देवता के दुलर्भ दर्शन के लिए देश विदेश के श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। नेवासा तालुका स्थित शनिदेव धाम की विलक्षणता अति दर्शनीय है। 

   खास यह कि शनिदेव के लोकप्रिय मंदिर से ही गांव भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि शनिदेव धाम जागृत देव स्थान है।
  आशय यह कि जीवंत मंदिर है। हिन्दुओं का यह तीर्थ स्थान श्रद्धालुओं के मध्य बेहद लोकप्रिय है। विशेषज्ञों की मानें तो शनिदेव की यह प्रतिमा स्वंभू है। 

   यह पाषाण प्रतिमा चरवाहों को वन क्षेत्र में प्राप्त हुई थी। चारवाहों ने इस पाषाण प्रतिमा को लोहे की छड़ से स्पर्श किया तो खून बह निकला। यह देख कर चरवाहे आश्चर्य चकित रह गये।
   यह चमत्कार गांव में चर्चा का विषय बन गया। रात में चरवाहा के स्वप्न में प्रभु शनिदेव आये। इसी के साथ ही शनिदेव धाम पवित्र स्थान बन गया। चरवाहा ने कहा कि शनैश्वर हैं।

   विशेषज्ञों की मानें तो शनिदेव नहीं चाहते थे कि मंदिर में छत हो। लिहाजा शनिदेव धाम के मुख्य स्थान पर कोई छत नहीं है। शनिदेव की पूजा अर्चना नित्य होती है। 
   शनिवार को विशेष पूजन अर्चन होता है। शनिवार को विशेष तिलाभिषेक होता है। मान्यता है कि शिंगणापुर में कभी कोई चोरी नहीं होती है। कारण यहां शनिदेव स्वयं विराजित हैं। 

   यह भगवान शनिदेव की प्रतीक प्रतिमा है। न्याय के देवता शनिदेव चोरी करने वाले को खुद दण्डित करते हैं।
   खास यह कि शिंगणापुर में एेसी संरचना है कि किसी भी मकान-दुकान या कहीं भी ताला नहीं लगता है। मौसम कोई भी हो या समय भी कोई हो। 
  शनिदेव के दर्शन की अपनी एक व्यवस्था एवं परम्परा है। कोई भी श्रद्धालु बिना स्नान किये शनिदेव के दर्शन नहीं कर सकता है।

   श्रद्धालु स्नान कर गीला वस्त्र (गमछा) धारण करके ही दर्शन के लिए प्रवेश करते हैं। यह वस्त्र पीताम्बर होता है। ऐसा न करने पर श्रद्धालुओं को शनिदेव धाम परिसर में प्रवेश नहीं मिलेगा।
  खास यह कि शनिदेव धाम शिंगणापुर में स्नान एवं वस्त्र आदि की बेहतर व्यवस्थाएं हैं।

   खुले मैदान में स्नान के लिए नल लगे हैं। श्रद्धालु यहां स्नान कर शनिदेव के दर्शन कर सकते हैं। खास यह कि शनिदेव धाम में दर्शन के लिए जाने वाला हर श्रद्धालु पीताम्बरधारी नजर आता है। श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का यह केन्द्र अद्भुत है। 

  शनिदेव धाम एक विशाल प्रांगण है। शनिदेव के दर्शन, उनकी कृपा पाने एवं उनका आशीर्वाद पाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।
  शनिदेव धाम शिंगणापुर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट आैरंगाबाद एयरपोर्ट है।

  आैरंगाबाद एयरपोर्ट से शनिदेव धाम की दूरी करीब 90 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन अहमद नगर जंक्शन है।
  अहमद नगर से शनिदेव धाम की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी शनिदेव धाम की यात्रा कर सकते हैं।
19.381330,74.857830

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