Wednesday, 12 December 2018

हाटकोटी मंदिर: शिव एवं शक्ति तीर्थ

  हाटकोटी मंदिर को वास्तुकला एवं शिल्पकला का सुन्दर आयाम कहा जाना चाहिए। हिमाचल प्रदेश में शिमला के निकट जुबबल में स्थित हाटकोटी मंदिर वस्तुत: अति प्राचीन मंदिर है। 

   शिमला-रोहडू मार्ग पर पब्बर नदी के किनारे स्थित यह मंदिर धार्मिक स्थान होने के साथ ही पौराणिक एवं ऐतिहासिक भी है। खेत-खलिहानों के मध्य स्थित हाटकोटी मंदिर अपनी दिव्यता-भव्यता के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है।

  समुद्र तल से करीब 1370 मीटर ऊंचाई पर स्थित हाटकोटी माता मंदिर वस्तुत: महिषासुर मर्दिनी का पुरातन मंदिर है। मंदिर में देवी दर्शन के साथ ही वास्तुकला एवं शिल्पकला के दिव्य-भव्य साक्षात दर्शन होते हैं। 

   विशेषज्ञों की मानें तो 10 वीं शताब्दी का यह मंदिर काफी कुछ विशिष्ट है। मंदिर में महिषासुर मर्दिनी को 1.20 मीटर ऊंची कांस्य प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठित है। प्रतिमा कीमती अष्ट धातुओं से निर्मित है।

  प्रतिमा हथियारों से सुसज्जित है। शेर पर सवार मां भगवती के दर्शन अद्भुत प्रतीत होते हैं। राक्षस महिषासुर का मर्दन करती देवी के दर्शन हैं। इसके साथ ही दिव्य शिव मंदिर भी है। मंदिर में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है। 

   खास यह कि द्वार को कलात्मक पत्थरों से सुसज्जित किया गया है। लकड़ी की छत बेहद आकर्षक है। इसमें देवी-देवताओं की अनुकृतियां हैं। मंदिर के गर्भगृह में लक्ष्मी-विष्णु, दुर्गा, गणेश एवं अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठित हैं। 

   मंदिर को माता हतेश्वरी के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। मान्यता है कि इस स्थान पर कभी देवताओं एवं राक्षसों का युद्ध हुआ था। विशेषज्ञों की मानें तो इस भव्य दिव्य मंदिर का निर्माण पाण्डव बंधुओं ने किया था। 

  शिमला से करीब 84 किलोमीटर दूर माता हाटकोटी मंदिर हिन्दुओं का एक तीर्थ है। कुफरी से इस स्थान की दूरी करीब 84 किलोमीटर है। नदी के तट पर मंदिरों की एक लम्बी श्रंखला है।

  वस्तुत: इस स्थान अर्थात गांव को हाटकोटी के नाम से जाना पहचाना जाता है। किवदंती यह भी है कि हाटकोटी मंदिर 6 शताब्दी से लेकर 9 वीं शताब्दी के मध्य बना था। 
  मंदिर में उस युगीन वास्तुकला एवं शिल्पकला के साक्षात दर्शन होते हैं। किवदंती यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने कराया था।

   मंदिर की वास्तुकला एवं शिल्पकला मूल रूप से शास्त्रीय शिखर या टॉवर शैली में निर्मित हैं। शिखर शैली प्राचीन संरचनाओं का दर्शन कराती है। खास यह कि इसमें नीचे विस्तृत आधार एवं उपर शीर्ष संकीर्ण हैं। 

   मंदिर की दीवारें मूर्तियों एवं नक्काशी से अलंकृत हैं। यह युगीन स्थापत्य कला एवं सौन्दर्य को रेखांकित करता है। दो भव्य पर्वत शिखर के मध्य स्थापित यह मंदिर एवंं नदी का संगम वस्तुत: विशिष्ट तीर्थ स्थान है। 

  खास यह कि अप्रैल में यहां एक भव्य मेला आयोजित किया जाता है। मेले के दौरान श्रद्धालु एवं इलाकाई बाशिंदे माता दुर्गा को चावल एवं अखरोट भेंट करते हैं। चूंकि यह अवधि चावल एवं अखरोट की फसल की होेती है। 
  मान्यता है कि भेंट माता दुर्गा को प्रसाद अर्पित किया जाता है। खास यह कि हाटकोटी माता का मंदिर धार्मिक स्थल है तो वहीं आसपास का इलाका पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। मंदिर परिसर में एक कीर्तन घर भी है। विश्रामालय भी है। जिससे दूरस्थ पर्यटकों को असुविधा नहीं होती है।


    विशेषज्ञों की मानें तो यह विलक्षण स्थान है। कारण शिव एवं शक्ति एक ही स्थान पर विराजमान हैं। मंदिर एवं उसके आसपास घूमने या सैर सपाटा का बेहतरीन समय अक्टूबर से मार्च की अवधि होता है।
   हालांकि बर्फबारी का आनन्द लेना हो तो नवम्बर से फरवरी का समय बेहतरीन रहता है।
   हाटकोटी मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। मंदिर शिमला से करीब 84 किलोेमीटर दूर है। निकटतम एयरपोर्ट शिमला है। शिमला एयरपोर्ट जुब्बरहट्टी में स्थित है। निकटतम रेलवे स्टेशन शिमला जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी हाटकोटी मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
31.106900,77.667500

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