Friday, 7 December 2018

अमरनाथ गुफा: शिवलिंग के अद्भुत दर्शन

    अमरनाथ धाम को हिन्दुओं का श्रेष्ठतम तीर्थ कहना चाहिए। जी हां, अमरनाथ धाम की यात्रा के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। 

   इसलिए अमरनाथ धाम को हिन्दुओं का श्रेष्ठतम तीर्थ कहना गलत न होगा। अमरनाथ धाम की यात्रा भारत ही नहीं, विदेशों में खासी ख्याति रखता है। अमरनाथ धाम को अमरनाथ गुफा एवं अमरनाथ गुफा मंदिर भी कहते हैं।
   खास यह कि इस पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग निर्मित होता है। इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं।

   अमरनाथ गुफा की परिधि करीब 150 फुट होती है। हिम बूंदों से लगभग 10 फुट लम्बा शिवलिंग निर्मित होता है। विशेषज्ञों की मानें तो चन्द्रमा के घटने-बढ़ने से शिवलिंग का आकार भी घटता-बढ़ता है। यहां गणेेश, पार्वती एवं भैरव के अलग हिमखण्ड हैं।
   अमरनाथ की यह पवित्र गुफा भारत के जम्मू-कश्मीर प्रांत के श्रीनगर शहर से उत्तर-पूर्व दिशा में है। समुद्र तल से करीब 3888 मीटर ऊंचाई पर स्थित यह अमरनाथ गुफा बेहद बर्फीला इलाका है। 

   शीर्ष ऊंचाई पर होने के कारण अमरनाथ गुफा अधिसंख्य समय बर्फ से आच्छादित रहती है। 
   गर्मियों की अवधि खास तौर से जून से अगस्त की दौरान ही श्रद्धालुओं को गुफा में अमरनाथ के दर्शन हो पाते हैं। अमरनाथ गुफा या अमरनाथ धाम इसी अवधि में तीर्थयात्रियों के लिए खुलती है। 


   अमरनाथ गुफा में शिवलिंग के दर्शन होते हैं। यह शिवलिंग बर्फ से आकार लेता है। इसीलिए श्रद्धालु बाबा बर्फानी भी कहते हैं। मान्यता है कि अमरनाथ गुफा करीब 5000 वर्ष प्राचीन है।
   किवदंती है कि एक पवित्र व्यक्ति ने स्थानीय चरवाहा को कोयले से भरा थैला दिया था। चरवाहा ने घर जाकर देखा कि कोयला स्वत: स्वर्ण में परिवर्तित हो गया था। 

    चरवाहा ने पवित्र व्यक्ति की तलाश की तो इस पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन हुये थे। अमरनाथ गुफा की लम्बाई करीब 19 मीटर, चौड़ाई करीब 16 मीटर है। ऊंचाई करीब 11 मीटर है। 
  खास यह कि अमरनाथ गुफा भगवान शिव के मुख्य धार्मिक स्थलों में से एक है।

    विशेषज्ञों की मानें तो प्राचीनकाल में अमरनाथ गुफा को अमरेश्वर महादेव कहा जाता था। खास यह कि अमरनाथ गुफा से विदेशी भी प्रभावित हुये बिना न रह सके।
  अंग्रेज लेखक लॉरेंस अपनी पुस्तक 'वैली ऑफ कश्मीर" में लिखते है कि कभी कश्मीरी ब्रााह्मण तीर्थयात्रियों को अमरनाथ गुफा की यात्रा कराते थे।

    विशेषज्ञों की मानें तो इस हिल स्टेशन पर कभी हिन्दुओं एवं बौद्धों के कई प्रसिद्ध मठ थे। विशेषज्ञों की मानें तो ईसा एवं मूसा ने पहलगांव में अपने जीवन के कुछ दिन व्यतीत किये थे। पहलगाम का अर्थ होता है कि गड़रिये का गांव।

   पौराणिक मान्यता है कि एक बार कश्मीर घाटी जलमग्न हो गयी थी। घाटी ने एक बड़ी झील का स्वरूप धारण कर लिया था।
   प्राणियों की रक्षा के लिए ऋषि कश्यप ने इस जल को अनेक नदियों एवं अन्य सोतों से बहा दिया था। इसी दौरान ऋषि भृगु पवित्र हिमालय के दर्शन के लिए निकले थे। 

   ऋषि भृगु ने हिमालय दर्शन के दौरान अमरनाथ गुफा के दर्शन किये थे। यहां ऋषि को बर्फानी शिवलिंग के दर्शन हुए थे।
   विशेषज्ञों की मानें तो तभी से यह स्थान शिव आराधना का मुख्य स्थल बन गया। हालात यह कि शिव के अद्भुत दर्शन के लिए श्रद्धालु अनेक संकट एवं कठिनाई को पार कर अमरनाथ गुफा आते हैं। 

   श्रीनगर से अमरनाथ गुफा की दूरी करीब 141 किलोमीटर है। विशेषज्ञों की मानें तो अमरनाथ गुफा का कोई प्राचीन इतिहास नहीं है। गुफा शायद हिमयुग को रेखांकित करती है।
   विशेषज्ञों की मानें तो अमरनाथ गुफा में ही केवल बर्फ का शिवलिंग है। बर्फ का शिवलिंग कश्मीर को छोड़कर विश्व में कहीं भी नहीं है।

  विशेषज्ञों की मानें तो पहले साधु-संत या घर परिवार छोड़ कर तीर्थयात्रा पर निकलने वाले ही अमरनाथ गुफा की यात्रा पर जाते थे। कारण यह यात्रा अति दुर्गम होती है। 
  बदलते हालात में अब बड़ी तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं। हालांकि अमरनाथ गुफा की यात्रा बेहद कठिन है। फिर भी ऐसा नहीं कि दर्शन के लिए श्रद्धालु न जा सकें। 


   अमरनाथ गुफा की यात्रा के लिए श्रीनगर तक संसाधन उपलब्ध हैं। जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर तक पर्यटक या श्रद्धालु हवाई जहाज या रेल की यात्रा कर पहंुच सकते हैं। निकटतम एयरपोर्ट श्रीनगर है।
   श्रीनगर से पहलगाम की यात्रा बस या सड़क माध्यम से की जा सकती है। पहलगाम का निकटतम रेलवे स्टेशन उधमपुर जंक्शन है। जम्मू रेलवे स्टेशन से भी पर्यटक यहां पहुंच सकते हैं।  
   पहलगाम से अमरनाथ गुफा की दूरी करीब 48 किलोमीटर है। बालटाल से गुफा की दूरी करीब 14 किलोमीटर है। पहलगाम से यात्रा करने पर कई पड़ाव पर विश्राम लेना होता है। पहलगाम से पहला पड़ाव 16 किलोमीटर दूर चंदनवाड़ी में होता है। दूसरा पड़ाव करीब 3 किलोमीटर दूूर पिस्सू टॉप है। तीसरा पड़ाव करीब 9 किलोमीटर दूर शेषनाग है। आखिरी पड़ाव करीब 14 किलोमीटर दूर पंचतरणी है। पंचतरणी से पवित्र अमरनाथ गुफा की दूरी करीब 6 किलोमीटर है।
34.038891,75.322863

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