Friday, 21 December 2018

पुष्कर मंदिर: ब्रह्मा जी के दिव्य दर्शन

   पुष्कर मंदिर की विशिष्टता का कोई जोड़ नहीं। जी हां, पुुष्कर मंदिर श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का केन्द्र होेने के साथ ही भव्यता-दिव्यता को भी रेखांकित करता है। 

   भारत के राजस्थान प्रांत के अजमेर स्थित पुष्कर मंदिर वस्तुत: देवराज ब्रह्मा जी को समर्पित है। पुष्कर मंदिर को ब्रह्मा मंदिर भी कहा जाता है। अजमेर से उत्तर-पश्चिम में करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित पुष्कर मंदिर नाग पहाड़ के मध्य रचा-बसा है। वस्तुत: यह स्थान ब्राह्मा जी की यज्ञ स्थली है। 

  साथ ही ऋषियों मुनियों की तपस्या स्थल के तौर पर भी इसे जाना पहचाना जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो विश्व का एक मात्र ब्रह्मा जी का मंदिर यहां स्थित है। खास यह कि ब्रह्मा जी भी श्राप से नहीं बच सके थे। ब्रह्मा जी को श्राप उनकी पत्नी सावित्री ने दिया था। 

   श्राप देने का कारण ब्रह्मा जी ने यज्ञ में पत्नी को आमंत्रित नहीं किया था। जिससे कुपित होकर पत्नी सावित्री ने ब्रह्मा जी को श्रापित किया था कि ब्रह्मा जी की पूजा अर्चना केवल इसी स्थान पर ही होगी। लिहाजा विशेषज्ञों की दृष्टि में पुष्कर मंदिर ही विश्व का एकमात्र ब्रह्मा जी का मंदिर है।

 चर्तुमुख ब्रह्मा जी की दाहिनी ओर सावित्री जी का मंदिर है। बार्इं ओर गायत्री जी का मंदिर है। यहां नारद जी का भी मंदिर है। कुबेर एवं नारद जी की हाथी पर बैठे हुए मूर्तियां हैं।
  विशेषज्ञों की मानें तो इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण ग्वालियर के महाजन गोकुल ने अजमेर में ब्रह्मा जी के इस मंदिर का निर्माण कराया था। 

  पुष्कर मंदिर भारत का विख्यात तीर्थ स्थल है। यहां वर्ष में कार्तिक पूर्णिमा पर भव्य दिव्य पुष्कर मेला भी लगता है।
  यह इलाका अरावली की घाटी के तौर पर भी जाना पहचाना जाता है। पुष्कर मेला में कला पूर्ण कुटीर उद्योग की झलक देखने को मिलती है। 

  खास तौर से वस्त्र उद्योग, काष्ठ कला, चित्रकला, पशुओं का व्यापार आदि विशेषता होती है। इस मेला का धार्मिक एवं व्यापारिक महत्व होता है।
   समुद्र तल से करीब 2389 फुट ऊंचाई पर स्थित पुष्कर मंदिर की अनेक विशिष्टताएं हैं। खास यह कि पुष्कर मंदिर ब्रह्मा जी को समर्पित है। 

  मंदिर के गर्भगृह में मुख्य प्रतिमा ब्रह्मा जी की स्थापित है। मंदिर में उनकी पत्नी सावित्री जी की भी प्रतिमा है। साथ ही बदरी नारायण, वाराह, शिव आत्मेश्वर मंदिर भी हैं। 
  पुष्कर का विशेष आकर्षण पुष्कर झील है। पुष्कर झील के चौतरफा पक्के स्नान के घाट हैं। जिससे श्रद्धालुओं को स्नान आदि में कोई असुविधा नहीं होती है। 
   खास इस क्षेत्र में राजपूताना संस्कृति झलकती है। विशेषज्ञों की मानें तो पुष्कर का उल्लेेख रामायण में भी मिलता है। 
  महर्षि विश्वामित्र ने भी पुष्कर में साधना की थी। किवदंती है कि अप्सरा मेनका इसी झील-सरोवर में स्नान करने आयी थी। 

  किवदंती है कि पुष्कर में बौद्ध भी निवास करते थे। कारण बौद्ध दान का उल्लेख भी मिलता है। खास यह कि पुष्कर मंदिर एवं पुष्कर मेला भारत के साथ साथ विदेशों में विशेष ख्याति रखता है। पुष्कर मेला ने विशिष्टताओं से वैश्विक ख्याति अर्जित की है। 

   इस मेला में विदेशी भी बड़ी संख्या में आते हैं। मेला की व्यवस्था राजस्थान का कला, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग करता है।
   इस मेला में विशेष नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत भी किया जाता है। खास यह कि पुष्कर मेला में विभिन्न संस्कृतियों का संगमन भी देखने को मिलता है।

   खास यह कि पुष्कर मेला ने ऊंटों को विशेष पहचान दी है। विविधिताओं के कारण इसे पुष्करराज भी कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो पुष्कर को तीर्थों का मुख माना जाता है।
  जिस प्रकार प्रयाग को तीर्थराज कहा जाता है, उसी तरह पुष्कर को पुष्करराज कहा जाता है। पुष्कर की गणना पंचतीर्थ एवं पंच सरोवर में होती है। विशेषज्ञों की मानें तो सरोवर की भी विविधिता है।

  खास यह कि पुष्कर मंदिर, पुष्कर झील एवं पुष्कर मेला की अपनी एक अलग विशिष्टता, पवित्रता एवं सौन्दर्य है। यह इन्द्रधनुषी छवि पर्यटकों के दिलों दिमाग में हमेशा रहती है।
   पुष्कर मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट सांगानेर है। सांगानेर एयरपोर्ट जयपुर से पुष्कर की दूरी करीब 146 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन पुष्कर में है। पुष्कर रेलवे स्टेशन से पुष्कर मंदिर की दूरी करीब 11 किलोमीटर है। पर्यटक या श्रद्धालु पुष्कर मंदिर की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
26.492001,74.557297

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