तिरुपति बालाजी: हिन्दुओं का श्रेष्ठ तीर्थ
तिरुपति बालाजी को हिन्दुओं के दिलों पर राज करने वाला तीर्थ कहा जाना चाहिए। जी हां, दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर हिन्दुओं की आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है। इसे तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर भी कहा जाता है।
भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित यह मंदिर भारत सहित दुनिया में विशेष ख्याति रखता है। दक्षिण भारत का यह प्रसिद्ध मंदिर आदि अनादि काल से श्रद्धा एवं आस्था का केन्द्र रहा है।
देश के राजवंश शासक तिरुपति बालाजी के दर्शन को श्रद्धानवत हुए। इस भव्य-दिव्य मंदिर कई पर्व-त्योहार आयोजित होते हैं।
ब्रह्मोत्सवम खास एवं प्रसिद्ध उत्सव है। इसे सलाकतला ब्राह्मोत्सवम भी कहा जाता है। आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिला स्थित तिरुपति बालाजी हिन्दुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है।
समुद्र तल से करीब 3200 फुट ऊंचाई पर स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर दर्शनीय एवं आकर्षक है। वास्तुकला एवं शिल्पकला का शानदार एवं अद्भुत उदाहरण तिरुपति बालाजी मंदिर देश का प्रमुख धार्मिक केन्द्र है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस दिव्य-भव्य मंदिर के निर्माण में चोल, होयसल एवं विजय नगर के राजवंश का विशेष आर्थिक सहयोग रहा। भगवान वेंकटेश्वर को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
मान्यता है कि तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान के दर्शन के बाद इंसान जीवन-मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है।
विशेषज्ञों की मानें तो प्राचीन साहित्य में कहा गया है कि कलियुग में भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद ही मुक्ति दिलाएगा। तिरुपति बालाजी मंदिर देश का सबसे आर्थिक सम्पन्न मंदिर है। श्रद्धालु यहां सोना एवं अन्य आभूूषण भेंट करते हैं।
तिरुपति बालाजी मंदिर के गर्भगृह में भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में अनेक द्वार, मंडपम, छोटे मंदिर हैं। परिसर के अन्य दर्शनीय स्थलों में खास तौर से पड़ी कवली महाद्वार संपंग प्रदक्षिणम, कृष्ण मंडपम, रंग मंडपम, तिरुमला राय मंडपम, आईना महल, ध्वज स्तंभ मंडपम, नदिमी पड़ी कविली, विमान दक्षिणम, श्री वरदराज स्वामी श्राइन पोटु आदि हैं।
कहावत है कि इस दिव्य-भव्य मंदिर की उत्पत्ति वैष्णव सम्प्रदाय से हुई है। यह सम्प्रदाय समानता एवं प्रेम के सिद्धांत को मानता है।
तिरुमला पर्वतमाला: तिरुमला पर्वतमाला देवस्थानम के लिए एक विशेष मार्ग बनाया गया है। इस मार्ग से जाने वाले श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति सुनिश्चित होती है। अलिपिरी से भी एक अन्य मार्ग है।
तिरुमला पर्वतमाला: तिरुमला पर्वतमाला देवस्थानम के लिए एक विशेष मार्ग बनाया गया है। इस मार्ग से जाने वाले श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति सुनिश्चित होती है। अलिपिरी से भी एक अन्य मार्ग है।
श्री पद्मावती समोवर मंदिर: श्री पद्मावती समोवर मंदिर तिरुपति से करीब 5 किलोमीटर दूर है। इसे तिरुचनूर भी कहते हैं।
कहावत है कि पद्मावती मंदिर के दर्शन बिना तिरुपति बालाजी मंदिर की यात्रा अधूरी रहती है। पद्मावती स्वयं लक्ष्मी जी का अवतार थीं।
श्री गोविन्द राज स्वामी मंदिर: श्री गोविन्द राज स्वामी मंदिर वस्तुत: भगवान बालाजी के बड़े भाई माने जाते हैं। यह मंदिर तिरुपति का मुख्य आकर्षण है।
इस मंदिर के उत्सव भी बालाजी के उत्सव के भांति होते हैं। इस मंदिर के प्रांगण में संग्रहालय सहित कई मंदिर हैं। इनमें खास तौर से पार्थसारथी, गोडादेवी आंदल, पुंडरिकावल्ली आदि हैं।
श्री कोदंडराम स्वामी मंदिर: श्री कोदंडराम स्वामी मंदिर तिरुपति मंदिर के मध्य में स्थित है। यहां राम, लक्ष्मण एवं सीता की पूजा होती है। मंदिर के सामने अंजनेय स्वामी का मंदिर है। यहां रामनवमी उत्सव धूमधाम से मनाया जाता है।
श्री कपिलेश्वर स्वामी मंदिर: श्री कपिलेश्वर स्वामी मंदिर वस्तुत: शिव मंदिर है। यह मंदिर तिरुपति से तीन किलोमीटर दूर है।
इसी प्रकार तिरुपति बालाजी एवं आसपास मंदिरों एवं तीर्थ स्थलों की एक लम्बी एवं सुन्दर श्रंखला है। इनमें खास तौर से श्री कल्याणम वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्री देवी पद्मावती मंदिर, श्री आण्डाल मंदिर, श्री रंगानायकुलम मंदिर, श्री पराशरेश्वर स्वामी मंदिर, श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर, श्री शक्ति विनायक स्वामी मंदिर, श्री अगस्थिश्वर स्वामी मंदिर, अवनक्षम्मा मंदिर आदि हैं।
इसी प्रकार तिरुपति बालाजी एवं आसपास मंदिरों एवं तीर्थ स्थलों की एक लम्बी एवं सुन्दर श्रंखला है। इनमें खास तौर से श्री कल्याणम वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर, श्री देवी पद्मावती मंदिर, श्री आण्डाल मंदिर, श्री रंगानायकुलम मंदिर, श्री पराशरेश्वर स्वामी मंदिर, श्री वीरभद्र स्वामी मंदिर, श्री शक्ति विनायक स्वामी मंदिर, श्री अगस्थिश्वर स्वामी मंदिर, अवनक्षम्मा मंदिर आदि हैं।
टीटीडी गार्डेन: टीटीडी गार्डेन करीब 460 एकड़ में फैला एक खूबसूरत उद्यान है। इस उद्यान के फूलों से ही तिरुपति बालाजी मंदिर में भगवान का श्रंगार एवं मंदिर की सजावट की जाती है।
केशदान: केशदान तिरुपति बालाजी मंदिर की एक श्रद्धा परम्परा है। मान्यता है कि केशदान या केश भेंट कर श्रद्धालु अपने दंभ व घमंड को ईश्वर को समर्पित कर देते हैं।
केशदान: केशदान तिरुपति बालाजी मंदिर की एक श्रद्धा परम्परा है। मान्यता है कि केशदान या केश भेंट कर श्रद्धालु अपने दंभ व घमंड को ईश्वर को समर्पित कर देते हैं।
संस्कार का यह केन्द्रीयकरण है। मंदिर के निकट ही कल्याण कट्टा नामक स्थान है। यहां सामूहिक मुंडन संस्कार किया जाता है। केशदान के बाद श्रद्धालु पुष्करिणी में स्नान करते हैं।
इसके बाद ही श्रद्धालु दर्शन के लिए जाते हैं। प्रसाद में भगवान को लड्डू का भोग लगाया जाता है। दर्शन के उपरांत श्रद्धालुओं को प्रसाद के तौर पर चरणामृत, मीठी पोंगल, दही-चावल दिया जाता है।
तिरुपति बालाजी मंदिर की यात्रा करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुपति एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन तिरुपति जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु तिरुपति बालाजी मंदिर की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
13.628730,79.419070
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