Friday, 5 October 2018

मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर: विलक्षण द्रविड़ वास्तुकला

   मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर को द्रविड़ वास्तुकला का अद्भुत आयाम कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का श्रेष्ठतम केन्द्र है। 

   दक्षिण भारत का यह मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर अति धनाढ्य भी है। सुन्दर एवं अति विशिष्ट मंदिरों से चौतरफा घिरा होने के बावजूद मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर की अपनी एक अलग ख्याति है। तमिलनाडु के मदुरै नगर का यह विशिष्ट मंदिर देश विदेश में विशेष ख्याति रखता है। 

   खास यह कि तमिलनाडु के इस शीर्ष मंदिर में सौन्दर्य शास्त्र एवं धर्म साथ-साथ दिखता है। विशेषज्ञों की मानें तो सुन्दरेश्वर स्वयं में ईश्वर का सुन्दर स्वरूप है। दक्षिण भारत के इस ऐतिहासिक मंदिर में मछली की आंख वाली देवी का स्वरूप विद्यमान है। 
  विशेषज्ञों की मानें तो पौराणिक कथानक के अनुसार भगवान शिव यहां सुन्दरेश्वर के रूप में राजा मलयध्वज की पुत्री राजकुमारी मीनाक्षी से विवाह रचाने आये थे।

    मीनाक्षी को देवी पार्वती का अवतार माना जाता है। शिव पार्वती के इस स्थान को अति पवित्र माना जाता है। लिहाजा यह स्थान मीनाक्षी एवं सुन्दरेश्वर को समर्पित है। इस लिहाज से इसे शिव-पार्वती का भी स्थान कहा जाता है। कहावत है कि भगवान सुन्दरेश्वर एवं राजकुमारी मीनाक्षी के इस विवाह समारोह में सभी देवी-देवता मदुरै में एकत्र हुये थे।

   भगवान विष्णु स्वयं बैकुण्ठ निवास से इस विवाह का संचालन करने आये थे। करीब 45 एकड़ भूमि क्षेत्रफल में फैला दक्षिण भारत का पुरातन एवं प्रसिद्ध मंदिर भव्यता-दिव्यता को रेखांकित करता है। इसमें प्रवेश के लिए 12 द्वार हैं। मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर खास तौर से अपनी स्थापत्य कला एवं वास्तुशिल्प के लिए विश्व प्रसिद्ध है। 

   मंदिर के प्रत्येक प्रवेश द्वार पर नक्काशी युक्त करीब 50 फुट ऊंचाई वाला शिखर है। इसमें देवी-देवताओं का सुन्दर एवं विलक्षण अंकन है। नक्काशी से अंकित देवी-देवताओं की आकृतियां अति दर्शनीय हैं। इस मंदिर में 985 से अधिक सुन्दर एवं नक्काशी वाले स्तम्भ हैं।

   खास यह कि इस दिव्य-भव्य मंदिर की स्थापत्य कला एवं वास्तुकला आश्चर्यचकित कर देने वाली है। इस इमारत समूह में 12 गोपुरम हैं। कुशल चित्रकारी एवं रंग संयोजन आकर्षित करता है। कहावत है कि इन्द्र को भगवान शिव की मूर्ति शिवलिंग के रूप में मिली थी।
   लिहाजा इन्द्र ने ही मूल मंदिर का निर्माण कराया था। इस प्रथा को मंदिर में आज भी देखा जा सकता है। यहां खास त्योहार चितिरई तिरुविझा है। विशेषज्ञों की मानें तो मीनाक्षी सुन्देश्वर मंदिर का गर्भगृह 3500 वर्ष से भी अधिक पुराना है।

   इस दिव्य-भव्य मंदिर में शिव की नटराज मुद्रा भी स्थापित है। शिव की यह मुद्रा सामान्यत: नृत्य करते हुये है। कहावत है कि राजा राजशेखर पांड्य की प्रार्थना पर भगवान शिव ने यहां अपनी नटराज मुद्रा बदल ली थी। मीनाक्षी मंदिर में एक पवित्र सरोवर भी है। करीब 165 फुट लम्बा एवं 120 फुट चौड़ा सरोवर आस्था एवं विश्वास का स्थल है। 

    इसे स्वर्ण कमल वाला सरोवर कहा जाता है। इसमें होने वाले कमलों का वर्ण सुवर्ण है। मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर में सहस्त्र स्तंभ मण्डप भी है। इस मण्डप का शिल्प दर्शनीय है।
   यह मण्डप भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुरक्षण में है। इसमें 985 स्तंभ सुशोभित हैं। ऐसी अवधारणा है कि इस मण्डप का निर्माण आर्य नाथ मुदलियार ने कराया था। 

   मुदलियार की अश्वारोही मूर्ति मण्डप की सीढ़ियों के निकट ही स्थापित है। मण्डप को द्रविड़ शिल्पकारी का बेहतरीन नमूना कहेंगे। इस भव्य-दिव्य मण्डप में मंदिर कला संग्रहालय भी है। इसमें मूर्तियां, छायाचित्र, पेंटिंग्स आदि-इत्यादि का 1200 वर्ष पुराना इतिहास देख सकते हैं। 

   पश्चिम में संगीतमय स्तंभ भी है। मण्डप के स्तंभ से विभिन्न स्वरलहरियां प्रस्फुटित होती हैं।
    मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मदुरै है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी मदुरै है। श्रद्धालु या पर्यटक सड़क मार्ग से भी मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
9.918460,78.118170

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