सबरीमाला मंदिर: श्रेष्ठतम तीर्थाटन
सबरीमाला मंदिर को श्रेष्ठतम तीर्थाटन की संज्ञा दें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, दक्षिण भारत का सबरीमाला मंदिर देश के अति धनाढ्य धार्मिक स्थलों में भी एक है।
केरल के पेरियार टाइगर रिजर्व में स्थित सबरीमाला मंदिर हिन्दुओं का एक बड़ा तीर्थ माना जाता है। समुद्र तल से करीब 1000 मीटर की ऊंचाई पर यह मंदिर स्थित है। श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का यह केन्द्र केरल के पथनाथिटा जिला में स्थित है।
विशेषज्ञों की मानें तो सबरीमाला मंदिर शैव एवं वैष्णव की एक अति समृद्ध कड़ी है। मलयालम में शबरीमाला का शाब्दिक अर्थ पर्वत से होता है। शबरीमाला मंदिर वस्तुत: प्रभु अयप्पा को समर्पित है।
विशेषज्ञों की मानें तो अष्टम स्कंध एवं स्कंदपुराण के असुर काण्ड में शिशु शास्ता का उल्लेख है। प्रभु अयप्पा शिशु शास्ता के अवतार मानें जाते हैं। प्रभु अयप्पा को प्रभु अयप्पन भी कहा जाता है। कहावत है कि शिशु शास्ता का जन्म मोहिनी वेशधारी विष्णु एवं शिव के समागम से हुआ था।
अयप्पन का यह मंदिर सबरीमाला पूणकवन के नाम से भी विख्यात है। खास यह कि यह सबरीमाला मंदिर सहयाद्री पर्वत श्रंखला के शिखर पर विद्यमान है। हालांकि हिन्दुओं का यह तीर्थधाम 18 पहाड़ियों के मध्य स्थित है। इस तीर्थधाम को श्रीधर्मषष्ठ मंदिर भी कहा जाता है।
मान्यता है कि भगवान परशुराम ने अयप्पन पूजा के लिए सबरीमाला की यह मूर्ति स्थापित की थी। हालांकि इस स्थान को रामायण काल की सबरी से भी जोड़ कर देखते हैं।
सबरीमाला मंदिर को समन्वय एवं सद्भाव का प्रतीक भी माना जाता है। सबरीमाला मंदिर में अयप्पन के अलावा मालिकापुरत अम्मा, गणेश, नागराजा सहित कई अन्य देवी-देवता विराजमान हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो सबरीमाला के दर्शन करने प्रति वर्ष 100 मिलियन से अधिक श्रद्धालु आते हैं। सुन्दर एवं सुरम्य पर्वत श्रंखला के मध्य स्थित सबरीमाला मंदिर धार्मिक स्थान होने के साथ ही बेहतरीन पर्यटन स्थल भी है। सबरीमाला मंदिर की स्थापत्य कला भी अति सुन्दर एवं लुभावनी है।
खास यह कि यहां एक अजीब सी शांति का एहसास होता है। उत्सव की अवधि में प्रभु अयप्पन का घी से अभिषेक किया जाता है। मंत्रोचारण से पर्वत श्रंखला अनुगूंजित हो उठती है। सुसज्जित हाथियों की एक लम्बी श्रंखला यहां शोभायमान दिखती है। इस अवसर पर अरावणा प्रसाद का वितरण किया जाता है।
खास यह कि मलयालम महीनों के प्रथम पांच दिन मंदिर के कपाट दर्शन हेतु खुलते हैं। प्रभु अयप्पन के दर्शन का विधि विधान है। इस विधि विधान के अनुसार ही कोई श्रद्धालु अयप्पन के दर्शन कर सकता है। दर्शन में धर्म जाति का कोई बंधन नहीं है। सबरीमाला मंदिर को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तीर्थधाम माना जाता है। प्रभु अयप्पन ब्राह्मचारी थे।
मान्यता है कि कोई श्रद्धालु तुलसी या रुद्राक्ष की माला धारण कर व्रत रखे। साथ ही नैवेद्य की पोटली लेकर दर्शन करने आये तो उसकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।
सबरीमाला मंदिर की व्यवस्थाएं त्रावणकोर देवास्वम बोर्ड संचालित करता है। राजधानी तिरुअनन्तपुरम से करीब 175 किलोमीटर दूर पम्पा है। पम्पा से करीब पांच किलोमीटर दूर पश्चिम घाट से सहयाद्री पर्वत श्रंखला प्रारम्भ हो जाती है।
इस पर्वत श्रंखला पर ही सबरीमाला मंदिर स्थित है। सबरीमाला मंदिर क्षेत्र में देश विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के विश्राम की भी व्यवस्था है। श्रद्धालु यदि कुछ दिन सबरीमाला में कुछ दिन ठहरना चाहते हैं तो पम्पा एवं सन्निधानम में व्यवस्था है। इसके लिए बोर्ड से परामर्श करना चाहिए।
सबरीमाला मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुअनन्तपुरम में है। तिरुअनन्तपुरम से सबरीमाला मंदिर की दूरी करीब 92 किलोमीटर है। तिरुअनन्तपुरम रेलवे जंक्शन भी है। हालांकि निकटतम रेलवे स्टेशन कोच्चि एवं कोट्टायम है। पर्यटक एवं श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी सबरीमाला मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
10.035710,76.272590
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