Tuesday, 23 October 2018

तुंगनाथ मंदिर: शिखर पर विराजमान

   दुनिया के श्रेष्ठतम शिखर पर विद्यमान तुंगनाथ मंदिर को विलक्षण कहें तो कोई बड़ी बात न होगी। जी हां, विशेषज्ञों का तो यही मानना है।

   तुंगनाथ मंदिर उत्तराखण्ड के रुद्रप्रयाग स्थित तुंगनाथ पर्वत के शिखर पर विद्यमान हैं। गढ़वाल मण्डल के रुद्रप्रयाग स्थित इस भव्य-दिव्य मंदिर की प्राचीनता की अपनी एक अलग यशोगाथा है। समुद्र तल से करीब 3680 मीटर ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर पंचकेदारों में सबसे शीर्ष पर विराजमान हैं।

  तुंगनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। विशेषज्ञों की मानें तो भगवान शिव का यह स्थान 1000 वर्ष से भी अधिक प्राचीन है। मान्यता है कि इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण पाण्डव बंधुओं ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया था। कारण कुरुक्षेत्र में नरसंहार से भगवान शिव पाण्डव बंधुओं से रुष्ट थे।

   लिहाजा पाण्डव बंधुओं ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तुंगनाथ मंदिर का निर्माण किया था। पौराणिक कथानक के अनुसार तुंगनाथ मंदिर का निर्माण अर्जुन ने किया था। तुंगनाथ पर्वत की चोटी से तीन धाराओं का रुाोत है। इनमें एक अक्षकामिनी नदी प्रवाहमान है।

   तुंगनाथ मंदिर चोपता से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तुंगनाथ का शाब्दिक अर्थ पीक के भगवान है। खास यह कि तुंगनाथ मंदिर में भगवान शिव के ह्मदय एवं भुजाओं की पूजा की जाती है। मंदिर का वास्तुशिल्प बेहद दर्शनीय है। मंदिर उत्तर भारतीय वास्तुशिल्प का विलक्षण आयाम है।

   मंदिर के प्रवेश द्वार पर नंदी की भव्य-दिव्य मूर्ति है। मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी विद्यमान हैं। काल भैरव एवं व्यास आदि की मूर्तियां खास हैं।
  तुंगनाथ मंदिर परिक्षेत्र बर्फबारी का इलाका है। लिहाजा नवम्बर से मार्च के मध्य की अवधि में तुंगनाथ मंदिर बंद रहता है। तुंगनाथ मंदिर वस्तुत: चोपता इलाके में आता है। 

  खास यह कि चोपता से मंदिर का इलाका बांस एवं बुरांश आच्छादित है। लिहाजा बेहद दर्शनीय प्रतीत होता है। इसे एक अति सुन्दर दर्शनीय पर्यटन क्षेत्र कहा जा सकता है। इस प्राचीन शिव मंदिर से करीब डेढ़ किलोमीटर ऊंचाई पर चढ़ने पर चन्द्रशिला पर्वत चोटी है। चन्द्रशिला पर्वत चोटी से हिमालय के दिव्य-भव्य दर्शन होते हैं।
   प्राकृतिक सौन्दर्य का सुन्दर आयाम यहां दिखता है। चोपता-गोपेश्वर मार्ग पर कस्तूरी मृग प्रजनन फार्म भी है। यहां कस्तूरी मृगों की सुन्दरता को निकट से महसूस कर सकते हैं। पर्यटक तुंगनाथ-चन्द्रशिला इलाके में ट्रैकिंग भी कर सकते हैं। कहावत है कि रामायण महाकाव्य के मुख्य नायक श्रीराम चन्द्रशिला पर्वत पर ध्यान लगाते थे।

   कहावत यह भी है कि महाविद्वान रावण ने यहां भगवान शिव की तपस्या की थी। हिमालय की प्राकृतिक सुन्दरता के मध्य स्थित यह मंदिर तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। चारधाम की यात्रा में तुंगनाथ मंदिर बेहद महत्वपूर्ण है। 

   इस मंदिर में पूजा-अर्चना का उत्तरदायित्व मक्कामाथ गांव के एक ब्रााह्मण परिवार पर है। श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का सैलाब दर्शन के लिए दिखता है। 
  हालांकि अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण सामान्य दिनों में दर्शनार्थियों की भीड़ कम होती है। मान्यता है कि श्रद्धालुओं की मनौतियां प्रभु के दर्शन मात्र से पूरी होती हैं।

   केदारनाथ एवं बद्रीनाथ के मध्य में स्थित तुंगनाथ की अपनी एक अलग महिमा है। खास यह कि जुलाई-अगस्त की अवधि इस इलाके को आैर भी सुन्दर बना देती है।
   कारण इन दिनों मखमली घास के मैदान खिल उठते हैं तो वहीं सुगंधित फूलों की बहार आ जाती है। दर्शनीयता बेहद मनभावन होती है।

   तुंगनाथ मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट देहरादून है। जॉली ग्रांट एयरपोर्ट देहरादून से तुंगनाथ मंदिर की दूरी करीब 225 किलोमीटर है।
   निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से तुंगनाथ मंदिर की दूरी करीब 210 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी तुंगनाथ मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
30.487200,79.204370

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