Sunday, 14 October 2018

शांतिकुंज आश्रम: आध्यात्मिक केन्द्र

   शांतिकुंज आश्रम को वैश्विक आध्यात्मिक केन्द्र कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, उत्तराखण्ड के हरिद्वार स्थित शांतिकुंज आश्रम को वैश्विक स्तर पर एक श्रेष्ठतम आध्यात्मिक केन्द्र के तौर पर जाना पहचाना जाता है।
  वस्तुत: शांतिकुंज आश्रम गायत्री परिवार का मुख्यालय है। गायत्री परिवार वैश्विक भावनात्मक परिवार के तौर पर खास ख्याति रखता है। शांतिकुंज आश्रम हरिद्वार को चैतन्य तीर्थ प्रखर, प्रज्ञा सजल एवं श्रद्धा के रूप में भी जाना जाता है।

  शांतिकुंज आश्रम में माता भगवती गायत्री देवी की अखण्ड ज्योति 1926 से प्रज्जवलित है। वस्तुत: शांतिकुंज आश्रम सामाजिक एवं आध्यात्मिक जागृति का केन्द्र है। 
  यूं भी कह सकते हैं कि शांतिकुंज आश्रम एक सशक्त आध्यात्मिक तीर्थ है। खास यह कि शांतिकुंज आश्रम से देश दुनिया के करोड़ों परिवारों की आस्था जुड़ी है। 

    शांतिकुंज आश्रम में देवात्मा हिमालय एवं चारों धाम के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि शांतिकुंज आश्रम में ध्यान लगाने से मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। 
  खास तौर से धर्म-सम्प्रदाय के पवित्र प्रतीक चिह्न, जड़ी बूटियों के दुर्लभ बाग-बगीचे एवं गायत्री परिवार की स्थापना से लेकर वर्तमान काल का बहुत कुछ देखने को मिलेगा। 

   शांतिकुंज आश्रम में माता गायत्री की भव्य-दिव्य प्रतिमा दर्शनीय है। यहां माता गायत्री अनेक स्वरूपों में विद्यमान हैं। हालांकि माता गायत्री का विराट स्वरूप अपनी भव्यता-दिव्यता से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मान्यता है कि गायत्री की यह प्रतिमा युगशक्ति का प्रतीक है। 

   गायत्री का स्वरूप वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को प्रबल करता है। साथ ही यह साधक में दूरदर्शिता, विवेकशीलता एवं शांति का भाव प्रबल करता है। शांतिकुंज आश्रम में नित्य गायत्री यज्ञ होता है। जिसमें 1000 से अधिक श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह एक ऐसा आश्रम है जो दिव्य आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। यह वस्तुत: ऋषि परम्परा का आधुनिक आश्रम है।

   विशेषज्ञों की मानें तो इस आश्रम की स्थापना हिमालय ऋषि सट्टा के मार्ग दर्शन में की गयी थी। शांतिकुंज आश्रम में न केवल ऋषि परम्परा को देख सकते हैं बल्कि ऋषि परम्परा का अनुभव भी कर सकते हैं।
   विशेषज्ञों की मानें तो शांतिकुंज आश्रम की विधिवत स्थापना आचार्य श्रीराम शर्मा के नेतृत्व में वर्ष 1971 में हरिद्वार की भूमि के छोटे से टुकड़े से की गयी थी। धीरे-धीरे शांतिकुंज आश्रम ने भव्यता-दिव्यता हासिल कर ली।

   हालात यह हैं कि अब गायत्री नगर हरिद्वार के एक बडे़ भू-भाग में फैल गया। खास यह कि शांतिकुंज आश्रम में वृहद स्तर के आध्यात्मिक शिविर निरन्तर आयोजित किये जाते हैं। देव संस्कृत विश्वविद्यालय भी विशाल परिसर में है। 

   देव संस्कृत विश्वविद्यालय शिक्षा के श्रेष्ठतम संस्थानों में से एक है। खास यह है कि वैदिक संस्कारों की भी यहां अपनी एक अलग परम्परा है। खास यह कि शांतिकुंज आश्रम में गायत्री साधना अनवरत चलती रहती है।
   विशेषज्ञों की मानें तो शास्त्रों एवं पुराणों में उल्लेख है कि यदि कोई दीपक 24 वर्षों से अनवरत जलता रहे तो वह सिद्ध हो जाता है। ऐसे दीपक के दर्शन मात्र से ही अनेक फल मिलते हैं।

  माता गायत्री का यह दीपक वर्ष 1926 से अनवरत प्रज्जवलित है। यजुर्वेद में अग्नि की महत्ता को खास तौर से उल्लेख किया गया है। दीपक या अग्नि के समक्ष जप एवं साधना से साधक को हजार गुना फल की प्राप्ति होती है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो अखिल भारतीय गायत्री परिवार की स्थापना 1926 में सिद्ध ज्योति प्रज्जवलित कर की गयी थी। माता गायत्री जी के साथ ही इस सिद्ध ज्योति के दर्शन का भी यहां विशेष महत्व है। विशेषज्ञों की मानें तो आचार्य श्रीराम शर्मा ने इस दिव्य सिद्ध ज्योति के समक्ष साधना करके सिद्धि हासिल की थी। 

   आचार्य की मानें तो दीपक के सामने साधना से मन में दिव्य भावनाएं उठती हैं। यह दीपक ही गायत्री तीर्थ को जीवंत एवं जागृत बनाता है। साथ ही तीर्थ चेतना को बलशाली बनाता है। खास यह कि शांतिकुंज आश्रम समाज के रचनात्मक बदलाव में अखण्ड भूमिका का निर्वाह करता है। 

  मसलन नशा मुक्त भारत, शैक्षणिक विकास आदि इत्यादि बहुत कुछ है।
   शांतिकुंज आश्रम हरिद्वार की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट देहरादून है। निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी शांतिकुंज आश्रम हरिद्वार की यात्रा कर सकते हैं।
29.977540,78.186430

No comments:

Post a Comment

तारापीठ मंदिर: धार्मिक पर्यटन    शक्ति उपासना स्थल तारापीठ को अद्भुत एवं विलक्षण धार्मिक स्थल कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। ज...