ऋषिकेश : धर्म एवं योग की वैश्विक राजधानी
ऋषिकेश को हिमालय का प्रवेश द्वार कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। उत्तराखण्ड का शहर ऋषिकेश विलक्षण एवं अद्भुत है। यूं कहें कि ऋषिकेश धर्म, आध्यात्म, संस्कृति एवं योग की राजधानी है तो भी कुछ गलत न होगा।
ऋषिकेश को योग की वैश्विक राजधानी भी कहा जाता है। वस्तुत: ऋषिकेश हिन्दुओं का सर्वमान्य तीर्थ स्थल है। ऋषिकेश से हिमालय की पर्वत मालाओं की श्रंखला प्रारम्भ हो जाती है। शायद इसीलिए ऋषिकेश को हिमालय का प्रवेश द्वार कहा जाता है।
समुद्र तल से करीब 1360 फुट ऊंचाई पर स्थित ऋषिकेश सुरम्य एवं शांत वातावरण के लिए खास प्रसिद्ध है। खास यह कि हिन्दुओं के चार धाम की यात्रा का भी प्रवेश द्वार ऋषिकेश है।
गोमुख से प्रवाहित गंगा भी ऋषिकेश को अतुल्य बना देती हैं। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री के दर्शन का भी मार्ग ऋषिकेश ही प्रशस्त करता है।
मान्यता है कि यहां ध्यान लगाने से साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर एवं आश्रम की यहां एक लम्बी श्रंखला है। योग एवं ध्यान साधना से मन को अतुल्य शांति मिलती है।
विदेशी पर्यटक ऋषिकेश आध्यात्मिक शांति की तलाश में आते हैं। इस प्रकार देखें तो ऋषिकेश को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन क्षेत्र का दर्जा हासिल है।
विशेषज्ञों की मानें तो ऋषिकेश हिमालय की तलहटी का सबसे सुन्दर एवं सुरम्य क्षेत्र है। लिहाजा देश-विदेश के पर्यटकों का सबसे पसंदीदा इलाका है। ऋषिकेश में निचली पहाडियों की सुन्दरता बेहद दर्शनीय है।
शिवालिक पर्वत श्रंखला का यह क्षेत्र बौद्धिक संवर्धन के लिए भी विशेष है। मान्यता है कि ऋषिकेश में भगवान शिव की विशेष कृपा है।
विशेषज्ञों की मानें तो समुद्र मंथन से निकले विष को शिव ने इसी स्थान पर धारण किया था। विष धारण करने के कारण ही शिव को नीलकण्ठ कहा जाता है। अनुश्रुति यह भी है कि भगवान श्री राम ने वनवास अवधि में ऋषिकेश में भी प्रवास किया था। ऋषिकेश का लक्ष्मण झूला इसका साक्षात प्रमाण है।
कहावत यह भी है कि ऋषि रैभ्य ने ईश्वर दर्शन के लिए भगवान की आराधना एवं कठोर तप यहां किया था। प्रसन्न होकर प्रभु ने ऋषिकेश के रूप में ऋषि रैभ्य को दर्शन दिये थे। लिहाजा इस स्थान का नाम ऋषिकेश हो गया।
ऋषिकेश में सुन्दर, रमणीक, धार्मिक स्थान एवं दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला है। इनमें खास तौर से लक्ष्मण झूला, त्रिवेणी घाट, स्वर्ग आश्रम, नीलकण्ठ महादेव मंदिर, भरत मंदिर, कैलाश निकेतन मंदिर, वशिष्ठ गुफा एवं गीता भवन सहित बहुत कुछ दर्शनीय है।
लक्ष्मण झूला: लक्ष्मण झूला वस्तुत गंगा के एक किनारा को दूसरे किनारा से जोड़ता है। इस झूला का निर्माण वर्ष 1939 में किया गया था। हालांकि इस स्थान पर पूर्व में जूट के रस्सा का पुल बना था। करीब 450 फुट लम्बे इस झूला के निकट ही लक्ष्मण एवं रघुनाथ जी का मंदिर है।
लक्ष्मण झूला से गंगा एवं आसपास का सुन्दर एवं विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। निकट ही रामझूला भी है। यह झूला शिवानन्द आश्रम एवं स्वर्ग आश्रम के मध्य है।
त्रिवेणी घाट: त्रिवेणी घाट गंगा स्नान का मुख्य घाट है। श्रद्धालु या पर्यटक त्रिवेणी घाट पर श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के साथ डुबकी लगाते हैं। मान्यता है कि त्रिवेणी घाट गंगा, यमुना एवं सरस्वती का संगम स्थल है। त्रिवेणी घाट पर गंगा आरती का अद्भुत दर्शन होता है।
स्वर्ग आश्रम: स्वर्ग आश्रम ऋषिकेश का सर्ब प्राचीन आश्रम है। इस आश्रम की स्थापना स्वामी विशुद्धानन्द जी ने की थी। स्वामी जी को काली कमली वाले के नाम से भी जाना जाता है। यहां सुन्दर एवं दर्शनीय मंदिरों की एक शानदार श्रंखला है। आश्रम के बाहर हस्तशिल्प उत्पादों की दुकानें भी हैं।
स्वर्ग आश्रम: स्वर्ग आश्रम ऋषिकेश का सर्ब प्राचीन आश्रम है। इस आश्रम की स्थापना स्वामी विशुद्धानन्द जी ने की थी। स्वामी जी को काली कमली वाले के नाम से भी जाना जाता है। यहां सुन्दर एवं दर्शनीय मंदिरों की एक शानदार श्रंखला है। आश्रम के बाहर हस्तशिल्प उत्पादों की दुकानें भी हैं।
नीलकण्ठ महादेव मंदिर: नीलकण्ठ महादेव मंदिर समुद्र तल से करीब 5500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान शिव ने गले में विष धारण किया था।
लिहाजा इस स्थान को भगवान शिव के नीलकण्ठ के नाम से जाना जाता है। यहां एक सुन्दर झरना भी है। नीलकण्ठ के दर्शन से पहले श्रद्धालु झरना में स्नान करते हैं।
भरत मंदिर: भरत मंदिर ऋषिकेश के प्राचीन मंदिरों में से एक है। भरत मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य ने कराया था। मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण 12 वीं शताब्दी में किया गया था।
भगवान श्री राम के छोटे भाई भरत को समर्पित यह मंदिर ओल्ड टाउन में स्थित है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की शालिग्राम प्रतिमा स्थापित है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित श्रीयंत्र भी यहां दर्शनीय है।
कैलाश निकेतन मंदिर: कैलाश निकेतन मंदिर लक्ष्मण झूला के निकट स्थित है। करीब 12 खण्ड में विभक्त यह मंदिर विलक्षण है। ऋषिकेश के अन्य मंदिरों से कैलाश निकेतन मंदिर भिन्न है। इस मंदिर में सभी देवी-देवताओं की प्रतिमायें प्राण प्रतिष्ठित हैं।
वशिष्ठ गुफा: वशिष्ठ गुफा ऋषिकेश से करीब 22 किलोमीटर दूर केदारनाथ-बद्रीनाथ मार्ग पर स्थित है। मान्यता है कि वशिष्ठ गुफा करीब 3000 वर्ष प्राचीन है। यह साधुओं के साधना का स्थल माना जाता है। साधुओं को विश्राम एवं साधना करते देखा जा सकता है। यह महर्षि वशिष्ठ का निवास स्थान था। गुफा में एक भव्य-दिव्य शिवलिंग स्थापित है। यह एक सुन्दर स्थान है। लिहाजा पर्यटकों का पसंदीदा स्थान है।
गीता भवन: गीता भवन राम झूला के निकट है। गीता भवन का निर्माण जयदयाल गोयंदकाजी ने वर्ष 1950 में कराया था। गीता भवन खास तौर से चित्र अलंकरण के लिए प्रसिद्ध है। रामायण एवं महाभारत काल के कथानक को चित्रों के माध्यम से दीवारों पर सुसज्जित किया गया है।
कैलाश निकेतन मंदिर: कैलाश निकेतन मंदिर लक्ष्मण झूला के निकट स्थित है। करीब 12 खण्ड में विभक्त यह मंदिर विलक्षण है। ऋषिकेश के अन्य मंदिरों से कैलाश निकेतन मंदिर भिन्न है। इस मंदिर में सभी देवी-देवताओं की प्रतिमायें प्राण प्रतिष्ठित हैं।
वशिष्ठ गुफा: वशिष्ठ गुफा ऋषिकेश से करीब 22 किलोमीटर दूर केदारनाथ-बद्रीनाथ मार्ग पर स्थित है। मान्यता है कि वशिष्ठ गुफा करीब 3000 वर्ष प्राचीन है। यह साधुओं के साधना का स्थल माना जाता है। साधुओं को विश्राम एवं साधना करते देखा जा सकता है। यह महर्षि वशिष्ठ का निवास स्थान था। गुफा में एक भव्य-दिव्य शिवलिंग स्थापित है। यह एक सुन्दर स्थान है। लिहाजा पर्यटकों का पसंदीदा स्थान है।
गीता भवन: गीता भवन राम झूला के निकट है। गीता भवन का निर्माण जयदयाल गोयंदकाजी ने वर्ष 1950 में कराया था। गीता भवन खास तौर से चित्र अलंकरण के लिए प्रसिद्ध है। रामायण एवं महाभारत काल के कथानक को चित्रों के माध्यम से दीवारों पर सुसज्जित किया गया है।
यहां एक आर्युवैदिक डिस्पेंसरी भी संचालित है। गीता भवन में निरंतर भजन-कीर्तन एवं प्रवचन की स्वर लहरियां अनुगूंजित होती रहती हैं। पर्यटक या श्रद्धालु गीता भवन में भक्ति संगीत का भी आनन्द ले सकते हैं। तीर्थ यात्रियों के ठहरने की भी यहां व्यवस्था है।
ऋषिकेश की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट जॉली ग्रांट है। ऋषिकेश से जॉली ग्रांट एयरपोर्ट की दूरी करीब 18 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश जंक्शन है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी ऋषिकेश की यात्रा कर सकते हैं।
30.107700,78.287804
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