मुक्तिधाम : विशिष्ट धार्मिक स्थल
मुक्तिधाम को प्रसिद्ध दर्शनीय स्थल कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। दूधिया संगमरमर से चमकता यह धार्मिक एवं दर्शनीय स्थल खूबियों के लिए ख्याति रखता है।
महाराष्ट्र के नासिक स्थित मुक्तिधाम में हिन्दुओं के करीब सभी देवी-देवता प्राण प्रतिष्ठित हैं। नासिक रोड स्थित मुक्तिधाम की सुन्दरता अति दर्शनीय है। हालांकि मुक्तिधाम कोई बहुत अधिक पुराना धार्मिक स्थल नहीं है।
फिर भी अल्प समय में ही मुक्तिधाम ने शिखर की ख्याति हासिल की है। खास यह कि मुक्तिधाम का वास्तुशिल्प परम्परागत नहीं है। इसका वास्तुशिल्प सुन्दर एवं खास है। जिससे इसकी सुन्दरता अलग ही दिखती है।
मुक्तिधाम में भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों के साथ ही भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, दुर्गा जी, श्री गणेश जी आदि सहित अनेक देवी देवता प्राण प्रतिष्ठित हैं। खास यह मुक्तिधाम की दीवारों पर श्रीमद् भगवत गीता के 18 अध्याय अंकित हैं। मुक्तिधाम में शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतीक प्रतिष्ठापित हैं।
मुक्तिधाम में भगवान श्री कृष्ण के विभिन्न स्वरूपों के साथ ही भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान, दुर्गा जी, श्री गणेश जी आदि सहित अनेक देवी देवता प्राण प्रतिष्ठित हैं। खास यह मुक्तिधाम की दीवारों पर श्रीमद् भगवत गीता के 18 अध्याय अंकित हैं। मुक्तिधाम में शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग के प्रतीक प्रतिष्ठापित हैं।
आशय यह कि दर्शनार्थी एक ही स्थान पर शिव के सभी द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते हैं। यूं कहें कि मुक्तिधाम शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग की बांकी झांकी है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। खास तौर से दर्शनार्थी चार धाम के भी दर्शन कर सकते हैं।
यूं कहें कि मुक्तिधाम हिन्दुओं का धार्मिक काम्पलेक्स है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। हालांकि मुक्तिधाम मुख्यत: भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है। मंदिर की दर-ओ-दीवार पर भगवान श्री कृष्ण की लीला एवं महाभारत दृश्यांकित है। इसी परिप्रेक्ष्य में श्रीमद् भगवत गीता के 18 अध्याय अंकित हैं। मुक्तिधाम में कार्तिकेय का भी मंदिर है।
मुक्तिधाम मंदिर के निर्माण में खास तौर से मकराना का सफेद दूधिया संगमरमर उपयोग किया गया है। जिससे मंदिर की दिव्यता-भव्यता में चार चांद लग गये। खास यह कि दर्शनार्थी मुक्तिधाम परिसर में आश्रय भी ले सकते हैं। साथ ही किफायती भोजन भी कर सकते हैं।
खास तौर से देखें तो नासिक का यह एक विशिष्ट धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है। मुक्तिधाम का निर्माण 1971 में जयराम भाई बाइटको ने कराया था। शनै-शनै मुक्तिधाम ने एक तीर्थ का स्थान ले लिया। श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का यह केन्द्र मुक्तिधाम आकर्षक पर्यटन स्थल है। देश भर श्रद्धालुओं का आना निरन्तर जारी रहता है। खास तौर से कुंभ की अवधि में यहां की दर्शनीयता आैर भी अधिक बढ़ जाती है।
मुक्तिधाम की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पुणे एवं मुम्बई एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन नासिक जंक्शन है। पर्यटक एवं श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी मुक्तिधाम की यात्रा कर सकते हैं।
19.920980,73.675110
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