Sunday, 12 August 2018

शक्तिपीठ नैनादेवी : आस्था का केन्द्र

    शक्ति स्वरुपा आराध्य नैना देवी की मान्यता शक्ति पीठ की है। उत्तराखण्ड के नैनीताल स्थित नैना देवी मंदिर धर्म, आध्यात्म, आस्था एवं पर्यटन का मुख्य केन्द्र है। 

   नैनीझील की उत्तर दिशा में स्थित नैना देवी का यह मंदिर अति प्राचीन है। नवनिर्माण ने इसका स्वरूप कई बार बदला। वर्ष 1880 में भूस्खलन में मंदिर की दिव्यता-भव्यता नष्ट हो गयी थी। लिहाजा उसे एकबारगी नया स्वरूप दिया गया।
   विशेषज्ञों की मानें तो यहां सती के शक्ति स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर में मुख्य दर्शन दो नेत्रों के होते हैं। यह नेत्र द्वय ही पूजित हैं। यह नेत्र ही नैना देवी को दर्शाते हैं।


   नैनी झील के बारे में मान्यता है कि इस स्थान पर सती की देह के अंश गिरे थे। कहावत है कि शिव सती की मृत देह लेकर कैलाश पर्वत की ओर जा रहे थे। जिन स्थानों पर सती के अंग गिरे, उन स्थानों पर शक्ति पीठ की स्थापना की गयी। 
   नैनीझील में सती के नेत्र गिरे थे। लिहाजा इस स्थान को शक्ति पीठ की मान्यता है। पौराणिक कथानक के अनुसार राजा दक्ष की पुत्री उमा का विवाह शिव से हुआ था। शिव को दक्ष प्रजापति पसंद नहीं करते थे। इसके बावजूद दक्ष देवताओं के आग्रह को टाल नहीं सकते थे।

    लिहाजा न चाहते हुये भी दक्ष ने पुत्री का विवाह शिव से कर दिया था। यज्ञ आयोजन के अवसर पर राजा दक्ष ने सभी को आमंत्रित किया लेकिन पुत्री एवं दामाद शिव को आमंत्रित नहीं किया। पुत्री उमा हठ कर यज्ञ में शामिल होने पहुंची लेकिन पति शिव का अनादर देख उमा ने उसी यज्ञ में कूद कर अपनी आहुति दे कि अगले जन्म में भी शिव को ही अपना पति बनाऊंगी। पुत्री उमा ने पिता दक्ष को चेताया कि मेरा एवं पति शिव का अनादर है। 

    लिहाजा यज्ञ का प्रतिफल असफल होगा। उमा सती हो गयी। शिव को यह ज्ञात हुआ कि उमा ने यज्ञ में कूद कर अपना अंत कर लिया तो शिव के क्रोध का कोई पारावार न रहा। शिव एवं उनके गणों ने यज्ञ एवं यज्ञ स्थल को तहस नहस कर डाला। देवता शिव के रौद्र स्वरुप को देख कर सशंकित हो गये कि कहीं अब प्रलय न हो जाये। देवताओं ने शिव से प्रार्थना की कि क्रोध को शांत करें। राजा दक्ष ने शिव से क्षमा याचना की। शिव ने उनको आशीर्वाद दिया।
    शिव ने सती का शव देखा तो वैराग्य उमड़ आया। शिव ने सती के जले मृत देह को कंधे पर डाल कर आकाश भ्रमण करना प्रारम्भ कर दिया। इस आकाश भ्रमण के दौरान सती के अंग जिन स्थानों पर गिरे, उन स्थानों को शक्ति पीठ की मान्यता मिली। सती के नयन गिरे, उस स्थान को नैना देवी कहा गया। नैनीताल के इस स्थान को नन्दा देवी भी कहा जाता है।
    विशेषज्ञों की मानें तो नयनों की अश्रुधार ने ताल का स्वरूप ले लिया। बाद में इस स्थान को नैनीझील के तौर पर ख्याति मिली। तदन्तर यहां शिव पत्नी नन्दा (पार्वती) की पूजा अर्चना नैना देवी के रूप में होती है। शक्ति पीठ नैना देवी मंदिर नैनीझील पर स्थित है। निकट ही मल्लीताल भी है। चौतरफा प्राकृतिक परिवेश दर्शनीय है। पर्वत श्रंखला की चोटियां आनन्दित करती हैं तो सुन्दर पर्यावरण मुग्ध करता है।
   शक्ति पीठ नैना देवी नैनीताल की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट पंत नगर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन काठगोदाम है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
29.389120,79.459837

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