Wednesday, 22 August 2018

कामता नाथ : अद्भुत महिमा

   कामता नाथ की महिमा अद्भुत एवं निराली है। दर्शन मात्र से ही भक्तों के कष्टों का निवारण होता है। ऐसी अवधारणा एवं मान्यता है।

  कामता नाथ जी वस्तुत: कामदगिरि पर्वत की तलहटी में विराजमान हैं। खास यह कि कामदगिरि उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के सीमा क्षेत्र में स्थित है। हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ स्थल के तौर पर कामता नाथ मंदिर की मान्यता है। मान्यता यह भी है कि कामदगिरि त्रिदेव अर्थात ब्राह्मा, विष्णु एवं महेश का स्थान है।

   यहां परम्परा है कि श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा का प्रतिफल होता है कि परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कामदगिरि को गिरिराज भी कहा जाता है। लिहाजा श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गिरिराज श्रद्धालुओं की इच्छाओं-मनोकामनाओं को पूर्ण करते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, जनक नंदिनी सीता एवं लक्ष्मण के वन प्रवास का क्षेत्र चित्रकूट रहा।

   वनवास अवधि में भगवान श्री राम का प्रवास होने के कारण भी चित्रकूट की महत्ता है। रामनवमी, दीपमालिका एवं अमावस्या को खास उत्सव जैसा माहौल रहता है। चित्रकूट का सबसे महत्वपूर्ण स्थान कामदगिरि की परिक्रमा है। इसके पूर्व श्रद्धालु कामता नाथ जी के दर्शन करते हैं। मंदाकिनी के रामघाट पर स्नान करने के बाद श्रद्धालु कामदगिरि की परिक्रमा प्रारम्भ करते हैं।

   परिक्रमा यात्रा का प्रारम्भ रामघाट से ही होता है। बताते हैं कि रामघाट पर नित्य श्री राम स्नान करते थे। रामघाट पर ही भगवान श्री राम ने अपने पिता दशरथ का पिण्डदान किया था। कामदगिरि की परिक्रमा करीब 5 किलोमीटर लम्बी है। 
  इस पर्वत के तल पर ही देव कामता नाथ जी का मंदिर है। परिक्रमा मार्ग में अनेक देवालय हैं। इनमें खास तौर से राममुहल्ला, मुखारबिन्दु, सखी गोपाल, भरत मिलाप एवं पीली कोठी है। देव स्थल मुखारबिन्दु चित्रकूट की आध्यात्मिक, धार्मिक एवं आस्था का सर्वश्रेष्ठ केन्द्र है।
   मान्यता है कि ब्राह्मा, विष्णु एवं महेश का निवास स्थल है। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने श्री राम के रूप में यहां वनवास काटा था। ब्राह्मा जी ने सृष्टि की सरंचना के लिए यहां यज्ञ किया था। यज्ञ से शिवलिंग का प्राक्ट्य हुआ था। यह शिवलिंग धर्मनगरी चित्रकूट के क्षेत्रपाल में विराजमान है। 
   करीब 38.20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले इस तपोवन की ऊर्जा श्रद्धालुओं को एक विशेष जीवंतता प्रदान करती है। विंध्य पर्वत श्रंखलाओं से घिरे वन क्षेत्र चित्रकूूट को आश्चर्य की पहाड़ी की संज्ञा से भी अलंकृत किया जाता है। यह धरा ईश्वर की अनुपम देन है। बताते हैं कि इसी धरा पर ऋषि अत्रि एवं सती अनुसुइया ने ध्यान लगाया था। चित्रकूट में ही सती अनुसुइया ने ब्राह्मा, विष्णु एवं महेश को बालक बना दिया था। 
   सती अनुसुइया आश्रम: सती अनुसुइया आश्रम का कामता नाथ जी के मंदिर से करीब 15 किलोमीटर दूर दक्षिण में स्थित है। इसी आश्रम से ही मंदाकिनी का प्राक्ट्य हुआ था। इस आश्रम में ऋषि अत्रि, सती अनुसुइया, दत्तात्रेय एवं दुर्वाषा ऋषि की प्रतिमायें प्रतिष्ठापित हैं।
   जोगनी शिला: जोगनी शिला भगवान श्री राम तपोभूमि में सती अनुसुइया आश्रम में स्थित है। मान्यता है कि जोगनी शिला की पूजा अर्चना से प्रेतबाधाओं से मुक्ति मिलती है।

   स्फटिक शिला: स्फटिक शिला चित्रकूट के दक्षिणी इलाके में घने वन क्षेत्र में स्थित एक विशाल शिला है। इस विशाल शिला पर भगवान श्री राम के पैरों के निशान अंकित हैं। मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित यह शिला जानकी कुण्ड से कुछ दूर पर है।
   बताते हैं कि इस शिला पर बैठ कर श्री राम एवं जानकी चित्रकूट की प्राकृतिक सुन्दरता की छटा निहारा करते थे। इसी स्थान पर फूलों से बने आभूषण से श्री राम ने जानकी जी का श्रंगार किया था। मान्यता है कि माता जानकी इस शिला पर बैठी थी तो इन्द्र पुत्र जयंत ने कौआ के रूप में चोंच मारी थी।
    गुप्त गोदावरी: गुप्त गोदावरी चित्रकूट से 18 किलोमीटर दूर है। गुप्त गोदावरी में मुख्यत: दो गुफाएं हैं। इनमें एक गुफा चौड़ी एवं ऊंचे आकार की है। इसका प्रवेश द्वार अति संकरा है। हालांकि इसमें आसानी से प्रवेश किया जा सकता है। इस गुफा में गोदावरी मां के रूप में विद्यमान हैं। अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी हैं। यहां इन्द्र पुत्र जयंत खटका चोर के रूप में लटका है। 
   दूसरी गुफा संकरी एवं लम्बी है। इसमें जल का प्रवाह होता रहता है। कहावत है कि इस गुफा में श्री राम एवं लक्ष्मण ने दरबार लगाया था। मान्यता है कि माता जानकी ने इस स्थान पर स्नान किया था। इसी स्थान पर गोदावरी का प्राक्ट्य हुआ था। गुफा के अंदर होने के कारण ही इसे गुप्त गोदावरी कहा गया है। बताते हैं कि यहां पाताल तोड़ कर गोदावरी प्रवाहमान हैं।
   कामतानाथ मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट अमौसी लखनऊ है। लखनऊ से चित्रकूट की दूरी करीब 300 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन चित्रकूट धाम कर्वी है। सड़क मार्ग से भी पर्यटक यात्रा कर सकते हैं।
25.213220,80.915140

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