Thursday, 5 July 2018

पद्मनाभ स्वामी मंदिर : अतुलनीय श्रद्धा

    पद्मनाभ स्वामी मंदिर के वास्तुशिल्प का कहीं कोई जोड़ नहीं। भगवान विष्णु के इस मंदिर को श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का केन्द्र माना जाता है। द्रविड़ शैली पर अाधारित इस मंदिर में अपार सम्पदा नीहित है। 

   केरल के तिरुवअनन्तपुरम स्थित इस भव्य-दिव्य मंदिर में मुख्य आसन भगवान विष्णु जी का है। भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं।
      मान्यता है कि शहर का तिरुवनंतपुरम नाम भगवान के अनंत नाम के नाग पर रखा गया है। भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को पद्मनाभ कहा गया है। इस स्वरूप में विराजित विष्णु जी यहां पद्मनाभ स्वामी के नाम से प्रसिद्ध हैं।

   पद्मनाभ स्वामी का यह मंदिर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है। मंदिर केरल की संस्कृति एवं साहित्य का अनूठा संगम है। मंदिर की एक ओर खूबसूरत समुद्र तट है तो वहीं पश्चिम दिशा में पहाड़ियों का अद्भुत सौन्दर्य विद्यमान है।
     खास यह कि प्रकृति की अमूल्य निधियों के मध्य यह भव्य-दिव्य मंदिर विद्यमान है। कालांतर में निर्मित इस मंदिर का पुर्ननिर्माण 1733 में त्रावणकोर के महाराजा मार्तंड वर्मा ने कराया था। त्रावणकोर के शाही परिवार के हाथों में अभी भी मंदिर का रखरखाव नीहित है। 

   मंदिर की स्थापत्य कला देखते ही बनती है। मंदिर के दर-ओ-दीवार से लेकर शिखर तक सुन्दर नक्काशी मुग्ध कर देती है। वैष्णव मंदिर श्रंखला का यह मंदिर श्रद्धा एवं आस्था के साथ ही पर्यटन स्थल भी है।
     विशेषज्ञों की मानें तो इस स्थान पर भगवान विष्णु जी की प्रतिमा प्राप्त हुयी थी, इसके बाद इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया गया था। खास यह है कि इस भव्य-दिव्य मंदिर के निर्माण में द्रविड़ एवं केरल शैली का मिश्रित स्वरूप विद्यमान है।
     मंदिर का गोपुरम द्रविड़ शैली में निर्मित है। यंू कहेें कि पद्मनाभ स्वामी मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला एवं स्थापत्यकला का अद्भुत उदाहरण है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। भव्यता पूर्ण मंदिर परिसर में कलाकृतियों का आकर्षण परिवेश को आैर भी अधिक सुन्दर बना देता है। 

    खास तौर से गोपुरम को सुन्दरतम कलाकृतियों से सुसज्जित किया गया है। शिल्प सौन्दर्य का यह निराला आयाम है। मंदिर के पास ही सुन्दर सरोवर भी है। इस सरोवर को पद्मतीर्थ कुलम के नाम से जाना जाता है।
    इस सरोवर में श्रद्धालु स्नान करते हैं। इस मंदिर को देश का सबसे धनाढ़्य मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर को विष्णु भगवान के भक्तों की आराधना स्थली भी कहा जाता है। श्रद्धालु प्रभु से सुख समृद्धि की कामना करते हैं।
     पद्मनाभ स्वामी मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम में है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी तिरुवनंतपुरम में ही है। इसके अलावा पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी यात्रा कर सकते हैं।
8.482778,76.943591

No comments:

Post a Comment

तारापीठ मंदिर: धार्मिक पर्यटन    शक्ति उपासना स्थल तारापीठ को अद्भुत एवं विलक्षण धार्मिक स्थल कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। ज...