लक्ष्मी नारायण मंदिर: विलक्षण सुन्दरता
लक्ष्मी नारायण मंदिर की सुन्दरता का कोई जोड़ नहीं। जी हां, नई दिल्ली स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर का वास्तु शास्त्र एवं शिल्प शास्त्र निश्चित तौर पर विलक्षण है।
उड़ियन एवं मुगल शैली की मिश्रित यह संरचना निश्चय ही अति लुभावनी है। इसके निर्माण में नागारा शैली का भी उपयोग किया गया है। आचार्य विश्वनाथ शास्त्री की अध्यक्षता में काशी के सौ से अधिक शिल्पियों ने मंदिर एवं मूर्तियों को सुन्दर ढ़ंग से गढ़ा था।
लक्ष्मी नारायण के इस मंदिर को बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है। खास तो यह है कि लक्ष्मी नारायण के इस मंदिर को बिड़ला मंदिर के नाम से ही जाना पहचाना जाता है। मंदिर मुख्यत: देवी लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु को समर्पित है।
बिड़ला मंदिर की जन्माष्टमी खास तौर से देश दुनिया में प्रसिद्ध है। इस भव्य दिव्य मंदिर का निर्माण 1939 में किया गया था। इस मंदिर का विधिवत उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया था।
उद्घाटन भी सशर्त था कि मंदिर में सभी जातियों को प्रवेश दिया जायेगा। प्रवेश में जातिगत आधार पर कोई रोक नहीं होगी। मूलत: इस मंदिर का निर्माण 1622 में वीर सिंह देव ने कराया था। इसके बाद पृथ्वी सिंह ने 1793 में जीर्णोद्धार कराया था। वर्ष 1939 में देश के बड़े आैद्योगिक परिवार बिड़ला समूह ने विस्तार एवं पुर्नरुद्धार कराया था।
देश दुनिया में ख्याति रखने वाले इस भव्य दिव्य मंदिर का निर्माण खास तौर से संगमरमर एवं लाल बलुआ पत्थरों से किया गया। मंदिर का विहंगम दृश्य श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
इस मंदिर में दो मंजिला एवं तीन मंजिला बरामदे हैं। बाग बगीचा एवं फव्वारा श्रंखला से सुसज्जित यह स्थान धर्म-आध्यात्म के साथ ही शीतलता एवं शांति प्रदान करता है। मंदिर में मुख्य देव दर्शन भगवान विष्णु, देवी लक्ष्मी, शिव-पार्वती, राधा-कृष्ण, देवी दुर्गा जी, हनुमान जी व अन्य देवी देवताओं की प्रतिमायें हैं।
नई दिल्ली के कनॉट प्लेस के निकट स्थित यह मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मंदिर एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है। मंदिर का भाव यह है कि सरंक्षण एवं समृद्धि हो। देवी लक्ष्मी का स्थान समृद्धि की देवी के तौर पर है। भगवान विष्णु जी का स्थान सरंक्षक के रूप में है।
विशेषज्ञों की मानें तो बिड़ला मंदिर का निर्माण उद्योगपति बलदेव दास बिड़ला ने कराया था। वर्ष 1933 में निर्माण प्रारम्भ होकर 1939 में पूर्ण हो सका था। करीब 7.50 एकड़ क्षेत्रफल में फैले इस मंदिर परिसर में कई अन्य मंदिरों के साथ ही गीता भवन भी है। मंदिर के निर्माण में मकराना, आगरा, कोटा, जैसलमेर आदि का पत्थर इस्तेमाल किया गया।
खास यह है कि लक्ष्मी नारायण के इस मंदिर में हिन्दू धर्म की सभी शाखाओं के दर्शन किये जा सकते है। इस परिसर में भगवान गौतम बुद्ध भी प्रतिष्ठापित हैं। भगवान गौतम बुद्ध के जीवन दर्शन की यात्रा भी दर्शनीय है। मंदिर के पिछले भाग में वृहद यज्ञशाला भी विद्यमान है। परिसर में कृतिम पर्वत श्रंखला, गुफायें एवं झरना आदि हैं। दीवारों में महाभारत का सचित्र उल्लेख किया गया है। खास यह कि लक्ष्मी नारायण का यह मंदिर देश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है।
लक्ष्मी नारायण मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट नई दिल्ली है। निकटतम रेलवे स्टेशन नई दिल्ली एवं दिल्ली है। सड़क मार्ग से भी यात्रा की जा सकती है।
28.632667,77.198996
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