कैंची धाम: करोड़ों दिलों की आस्था व विश्वास
देव भूमि भारत अपने आध्यात्मिक एवं धार्मिक परम्पराओं-मान्यताओं से हमेशा विश्व के शिखर पर रहा। शायद यही कारण है कि दुनिया के असंख्य ख्याति प्राप्त एवं लब्ध प्रतिष्ठ व्यक्तित्व भारत भूमि को श्रद्धा से नमन करते हैं... नतमस्तक होते हैं।
बात चाहे अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा की हो या बॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्टस या फिर फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की हो... देव भूमि भारत के कण-तृण पर नतमस्तक हुए।
हिमालय की गोद में रचा-बसा उत्तराखण्ड अपनी आब-ओ-हवा के साथ-साथ सौन्दर्य से देश-विदेश के लाखों-करोड़ों सैलानियों-पर्यटकों को अभिभूत करता है तो उत्तराखण्ड का देवत्व देश विदेश के लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं-धर्मभीरुओं को नतमस्तक करता है।
उत्तराखण्ड का नैनीताल एक बार फिर राष्ट्रीय-अन्र्तराष्ट्रीय क्षितिज पर अपनी विशिष्ट खूबियों के साथ अवलोकित हो रहा है। नैनीताल स्थित शक्ति देव हनुमान जी के मंदिर 'कैंची धाम" ने देश-विदेश के हजारों-लाखों श्रद्धालुओं को 'आम से खास" बना दिया। 'नीम करौली बाबा" व 'नीब करौरी बाबा" के नाम से जाना-पहचाने जाने वाला 'कैंची धाम" देश विदेश के आम व खास की श्रद्धा, आस्था व विश्वास का केन्द्र है।
उत्तराखण्ड के नैनीताल-अलमोड़ा मुख्य मार्ग पर करीब चौदह सौ मीटर की ऊंचाई पर स्थित 'कैंची धाम" अपनी विशिष्टता के कारण विश्व क्षितिज पर खास तौर से पहचान रखता है। देव व संतों की भूमि उत्तराखण्ड में नैनीताल-अल्मोड़ा रोड़ पर इस भव्य-दिव्य 'कैंची धाम" का निर्माण-स्थापना लक्ष्मी नारायण शर्मा ने वर्ष 1962-1964 के आसपास कराया था।
शिप्रा नदी के किनारे स्थित 'कैंची धाम" की दिव्यता-भव्यता पर विश्व के श्रद्धाालु-पर्यटक नतमस्तक हुये। कैंची धाम नैनीताल-अल्मोड़ा रोड के दो बड़े घुमावदार मोड़ पर स्थित है। इस मोड़ की बनावट कैंची के आकार की है। शायद इसी कारण इस दिव्य-भव्य स्थान का नाम 'कैंची धाम" पड़ा। नीब करौरी बाबा का यह 'कैंची धाम" सिलीकॉन वैली से लेकर दुनिया की सुर्खियों में है।
मनहि मन कीन्ह प्रणाम.... अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भले ही उत्तराखण्ड न आये हों लेकिन उनकी मनोभावना शायद यही रहती हैं क्योंकि बताते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी जेब में हमेशा हनुमान जी की एक छोटी प्रतिमा रखते हैं। नीब करौली बाबा के इस 'कैंची धाम" में नतमस्तक होने वालों में देश-दुनिया की हस्तियों की एक लम्बी व बड़ी श्रंखला है।
बात चाहे दुनिया को बेहतरीन आई फोन देने वाली एप्पल कम्पनी के सर्वेसर्वा एवं संस्थापक स्टीव जॅाब्स हों या फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग हों या फिर हॉलीबुड अभिनेत्री जूलिया राबर्टस हों.... सभी 'कैंची धाम" में श्रद्धानवत हुये। नैनीताल से करीब अड़तीस किलोमीटर फासले पर स्थित 'कैंची धाम" के नीब करोरी बाबा के आशीर्वाद ने लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की तकदीर बदल दी।
हालांकि देव भूमि उत्तराखण्ड दिव्य-भव्य मंदिरों व आश्रम की श्रंखला से लबरेज है। इसे विशिष्टता ही कहा जायेगा कि 'कैंची धाम" देश-दुनिया में अलग ही जाना जाने लगा। अगाध श्रद्धा, पूर्ण विश्वास व आस्था से लबरेज श्रद्धालुओं के आने जाने का सिलसिला अनवरत बना रहता है। फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग संकट के दौर से गुजर रहे थे तो उनको एप्पल कम्पनी के सीईओ स्टीव जॉब्स ने कैंची धाम दर्शन का सुझाव दिया था।
फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग भारत यात्रा पर आये आैर किसी तरह तलाशते हुये उत्तराखण्ड के 'कैंची धाम" दर्शन के लिए आये। इसके बाद तो फेसबुक व संस्थापक मार्क जुकरबर्ग की दुनिया व किस्मत ही बदल गयी। अमेरिका से करीब साढ़े आठ हजार किलोमीटर का सफर तय कर फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग 'कैंची धाम" आये तो फेसबुक बेहद आर्थिक संकट में था।
मार्क जुकरबर्ग 'कैंची धाम" आये तो एक दिन के लिए थे लेकिन वह यहां दो दिन रुके। बताते हैं कि उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव के निवासी लक्ष्मी नारायण शर्मा वर्ष 1942 के आसपास नैनीताल आये थे। बताते हैं कि बाबा यहां आने पर नीब करौरी गांव में ठहरे थे। शायद इसी कारण बाबा नीब करौरी बाबा के नाम से विख्यात हुये। बाबा नीब करौरी को शक्तिदेव हनुमान जी का अवतार माना जाता है।
बताते हैं कि 17 वर्ष की अल्प आयु में ही बाबा को ज्ञान की प्राप्त हो गया था। संत ह्मदय-संत पुरुष लक्ष्मी नारायण शर्मा बाद में नीम करौली बाबा या नीब करौरी बाबा के रुप में ख्याति प्राप्त हुये। शंकर दयाल शर्मा भी बाबा के आशीर्वाद से देश के राष्ट्रपति हुए। बताते हैं कि बाबा नीब करौरी को दिव्य शक्तियां हासिल थीं। बाबा ने आशीर्वाद में जिसे जो कुछ दिया या कहा वह ब्राह्म वाक्य हो जाता था।
बाबा का यह आशीर्वाद भक्त को निश्चित रुप से फलीभूत हुआ। हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्टस तो इतना अधिक प्रभावित हुयीं कि उन्होंने हिन्दू धर्म को अंगीकार कर लिया। बताते हैं कि हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया राबर्टस न तो 'कैंची धाम" आश्रम आयीं आैेर न बाबा से मुलाकात हुयी लेकिन बाबा की छवि दर्शन से ही राबर्टस उनकी अनन्य भक्त हो गयीं।
फेसबुक के संस्थापक को सुझाव देने वाले एप्पल के सीईओ स्टीव जॉब्स वर्ष 1974 में कैंची धाम आये थे लेकिन नीब करौरी बाबा के दर्शन नहीं हो सके। कारण सितम्बर 1973 में बाबा नीब करोरी ने शरीर त्याग दिया था लेकिन बाबा के आशीर्वाद व 'कैंची धाम" के दर्शन ने स्टीव जॉब्स की दशा-दिशा बदल दी। स्टीव जाब्स एलाइनमेंट की खोज में भारत आये थे लेकिन उनको एलाइनमेंट तो नहीं मिला लेकिन एप्पल का खाका अवश्य मिल गया।
यहीं से लौट कर स्टीव जॉब्स ने एप्पल को मूर्तरुप दिया। अमेरिका के जैफ्री कैगेल ड्रग्स का शिकार हो चुके थे। अवसाद-डिप्रेशन के दौर से गुजर रहे दुनिया के मशहूर रॉक बैंड मास्टर जैफ्री कैगेल आखिरकार वर्ष 1970 न्यूयार्क से भारत आ गये।यहां उनकी मुलाकात नीब करौली बाबा से हुयी। इसके बाद तो उनकी दुनिया ही बदल गयी।
जैफ्री कैगेल रॉक बैंड छोड़ कर भजन-कीर्तन गाने लगे। बाद में जैफ्री ग्रैमी एवार्ड्स के लिए भी नामित हुए। उत्तर भारत में नीब करौरी बाबा चमत्कारी बाबा के रुप में भी जाने जाते रहे। बताते हैं कि बाबा नीब करौरी ने भले ही वर्ष 1973 में शरीर त्याग दिया हो लेकिन बाबा अभी भी अपने भक्तों-दीन-दुखियों को दर्शन देते रहते हैं। इसे चमत्कार ही कहा जायेगा कि बाबा एक साथ दो स्थानों पर अवतरित हो जाते हैं। बाबा के चमत्कारों का कहीं कोई अंत नहीं रहा।
बताते हैं कि एक बार बाबा ने पानी के पहाड़ पर घी के दीपक जलवा दिये। एक बार भण्डारा में घी कमी महसूस की गयी तो श्रद्धालुओं ने बाबा को अवगत कराया तो उन्होंने नदी का जल कनस्तर (पीपा) में लाने को कहा। नदी का यह जल कड़ाही में जाते ही घी में तब्दील हो गया। नैनीताल में 'कैंची धाम आश्रम" के अलावा बाबा ने देश में एक सौ आठ से अधिक मंदिर बनवाये या उनकी प्रेरणा से मंदिरों-आश्रमों का निर्माण हुआ। नैनीताल, ऋषिकेष, गुजरात, वृन्दावन, लखनऊ, शिमला व दिल्ली सहित देश के विभिन्न प्रांतों व शहरों में बाबा नीब करौरी के मंदिर व आश्रम स्थित हैं।
यहां तक कि विदेशों में अमेरिका व जर्मनी सहित दुनिया के तमाम देशों में बाबा के मंदिर व आश्रम की एक लम्बी श्रंखला है। नैनीताल स्थित बाबा नीब करौरी के कैंची धाम आश्रम में अमेरिका, फ्रांस, लंदन सहित दुनिया के तमाम देशों के भक्तों के आने-जाने का सिलसिला अनवरत बना रहता है। 'कैंची धाम" में हनुमाान जी अलावा कई अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमायें प्राण प्रतिष्ठित हैं।
'कैंची धाम" में बाबा नीब करौरी की प्रतिमा स्थापित है। प्रत्येक वर्ष 15 जून को 'कैंची धाम" स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन होता है। जिसमें देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं का आना जाना होता है। बाबा अधिसंख्य छवियों-चित्रों में कम्बल में दिखते हैं। शायद इसी से श्रद्धालु-भक्त 'कैंची धाम" में बाबा को कम्बल चढ़ाते हैं। विध्ंयपर्वत श्रंखला में विंध्यांचल के अष्टभुजा पहाड़ी पर भी इस आध्यात्मिक गुरु का आश्रम है।
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