Sunday, 25 February 2018

लालित्य सौन्दर्य का अद्भुत संगम : राधा कृष्ण मंदिर

    लालित्य-सौन्दर्य एवं माधुर्य का अद्भुत संगमन। जी हां, राधा कृष्ण मंदिर में सौन्दर्य के अद्भुत दिग्दर्शन होंगे तो वहीं उसका लालित्य मन को लुभायेगा। 

   कर्णप्रिय संगीत की स्वरलहरियां मन-मस्तिष्क को पुलकित कर देंगी। राधा कृष्ण मंदिर को जे के मंदिर के रुप में जाना-पहचाना जाता है। उत्तर प्रदेश के गौरव के तौर पर अपना खास स्थान रखने वाले इस दिव्य-भव्य मंदिर में जहां एक ओर वास्तुकला की प्राचीनतम शैली दिखती है तो वहीं आधुनिक कला भी अपने अलग ही रंग जमाते दिखती है।
     कभी एशिया के मैनचेस्टर के तौर पर ख्याति रखने वाले कानपुर स्थित इस राधा कृष्ण मंदिर की एक झलक पाने के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में आस्थावान श्रद्धालुओं के अलावा पर्यटक भी भारी तादाद में आते हैं।

    राधा कृष्ण मंदिर में मुख्यत: आराध्य राधा कृष्ण के दर्शन होते हैं तो वहीं प्रभु लक्ष्मी नारायण, प्रभु अर्धनारीश्वर, प्रभु नरमदेश्वर व भगवान हनुमान के दर्शन होते हैं। प्राचीन एवं आधुनिक वास्तुकला के इस अनूठे व विलक्षण मिश्रण को देखते ही बनता है। मंदिर का आकार-प्रकार ऐसा है कि पर्याप्त हवा व पर्याप्त रोशनी की उपलब्धता रहती है।


    वेंटीलेशन को ध्यान में रख कर मंदिर की छत की ऊंचाई अपेक्षाकृत कहीं अधिक है जिससे श्रद्धालु एवं पर्यटक भारी भीड़ होने के बावजूद असहज महसूस नहीं करते। वास्तु एवं प्राचीन स्थापत्य कला का यह विशिष्ट एवं अनूठा मिश्रण है। देश के आैद्योगिक घराना जे के समूह के जे के ट्रस्ट ने इस दिव्य एवं भव्य मंदिर का निर्माण कराया।
    मंदिर की सभी व्यवस्थाओं व रखरखाव का खर्च न्यास से ही किया जाता है। सिंघानिया परिवार इस न्यास के माध्यम से राधा कृष्ण मंदिर (जे. के. मंदिर) को कुछ खास रखने-बनाने में कोई कोर-कसर नहीं रखता। धर्म, आस्था, विश्वास एवं पर्यटन केन्द्र के साथ ही राधा कृष्ण मंदिर को यदि उत्तर प्रदेश का गौरव स्थल कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।

    दिल्ली-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर स्थित कानपुर में राधा कृष्ण मंदिर का दिग्दर्शन करने आने-जाने के लिए हवाई सेवा से लेकर रेल व सड़क परिवहन उपलब्ध हैं। शहर के ह्मदय स्थल पर जी. टी. रोड (ग्राण्ड  ट्रंक रोड) के निकट स्थित राधा कृष्ण मंदिर परिसर सांझ होते ही अपनी विशिष्ट अलौकिक छटा से निखर उठता है। कहा जाये कि राधा कृष्ण मंदिर की खूबसूरती श्रद्धालुओं-भक्तों व पर्यटकों के लिए प्रकृति का विशेष उपहार है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
     खास बात यह है कि राधा कृष्ण मंदिर परिसर का हर कोना पर्यावरण से आच्छादित है। कहीं सुगंधित फूलों की श्रंखला वाले पौधे हैं तो कहीं पर्यावरणीय हेज की बनावट पशु-पक्षियों का एहसास कराती है। परिसर में भव्य-दिव्य फव्वारों की श्रंखला भी अपनी अलग छटा बिखेरते हैं। फव्वारों की रंग-बिरंगी जल तरंगों की श्रंखला सर्दी हो या ग्रीष्मकाल अपनी विशिष्टता से लुभाते हैं।

    ग्रीष्मकाल में मन-तन की शीतलता से लबरेज कर देते हैं। मंद-मंद प्रवाहित संगीत की सुर लहरियां मन-मस्तिष्क को प्रफुल्लित कर देती हैं। राधा कृष्ण मंदिर के विशाल परिसर में छोटे-बड़े पार्कों की एक लम्बी श्रंखला है।
   बताते हैं कि सिंघानिया परिवार की देख-रेख में विकसित राधा कृष्ण मंदिर का निर्माण कार्य वर्ष 1960 में पूर्ण हुआ लेकिन अभी भी विकास कार्य पर विराम नहीं लगा। मंदिर के सौन्दर्य में चार-चांद लगते रहें, इसको लेकर राधा कृष्ण मंदिर को रचने-गढ़ने का कार्य आज भी अनवरत जारी रहता है।
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