जंगमबाड़ी मठ: शिवलिंग स्थापना की परम्परा
विधि-विधान एवं परम्पराओं का कहीं कोई अंत नहीं। देश-विदेश में सनातन धर्म की व्यवस्थाओं से लबरेज मठ-मंदिरों की एक लम्बी श्रंखला है। मठ-मंदिरों की अपनी मान्यतायें एवं परम्परायें हैं।
देश-दुनिया की धार्मिक राजधानी में शुमार काशी भी अपने आगोश में मान्यताओं एवं परम्पराओं से ओत-प्रोत मठ-मंदिरों की लम्बी कड़ी समेटे है। काशी में दक्षिण भारतीय परम्पराओं का एक मठ-मंदिर अपनी विशिष्टताओं एवं खासियत के कारण देश में अलग ही जाना-पहचाना जाता है। इसे जंगमबाड़ी मठ के रूप में जाना जाता है।
जंगमबाड़ी मठ काशी के प्राचीन मठों में से एक है। जंगम का अर्थ शिव को जानने वाला आैर बाडी का अर्थ रहने के स्थान से होता है। करीब पचास हजार वर्ग फुट में फैले जंगमबाड़ी मठ में विचित्र एवं अलग परम्परा है। मान्यताओं व परम्पराओं के अनुसार धर्मावलम्बी-श्रद्धालु जंगमबाड़ी मठ में शिवलिंगों की स्थापना करते हैं।
धर्मावलम्बी एवं श्रद्धालु अपने पूर्वजों व निकट संबंधी की मृत्यु पश्चात उनकी आत्मा शांति के लिए जंगमबाड़ी मठ में शिवलिंग की स्थापना करते हैं। आत्मा की शांति के लिए यहां पिण्डदान नहीं बल्कि शिवलिंग का दान होता है। दान स्वरुप शिवलिंग की यहां स्थापना की जाती है। यह जानकर विश्वास नहीं होगा कि इस मठ-मंदिर में हजार-पांच सौ नहीं बल्कि कई लाख शिवलिंग एक साथ विराजमान-स्थापित हैं।
धर्मावलम्बी एवं श्रद्धालु अपने पूर्वजों व निकट संबंधी की मृत्यु पश्चात उनकी आत्मा शांति के लिए जंगमबाड़ी मठ में शिवलिंग की स्थापना करते हैं। आत्मा की शांति के लिए यहां पिण्डदान नहीं बल्कि शिवलिंग का दान होता है। दान स्वरुप शिवलिंग की यहां स्थापना की जाती है। यह जानकर विश्वास नहीं होगा कि इस मठ-मंदिर में हजार-पांच सौ नहीं बल्कि कई लाख शिवलिंग एक साथ विराजमान-स्थापित हैं।
बताते हैं कि मृत व्यक्तियों की आत्मशांति एवं अकाल मृत्यु की आत्मशांति के लिए इस मठ-मंदिर में शिवलिंग स्थापित किये जाते हैं। सैकड़ो वर्षों से अनवरत प्रचलित इस परम्परा में अब तक दस से पन्द्रह लाख शिवलिंग एक ही स्थल पर स्थापित हो चुके हैं। शिवलिंग की स्थापना में हिन्दू रीति-रिवाज एवं परम्पराओं का पालन पूरी तरह से किया जाता है।
शिवलिंग की स्थापना में पिण्डदान के सभी विधि-विधान अपनाये जाते हैं। शिवलिंग की स्थापना पर वैदिक मंत्रोचारण से मठ-मंदिर क्षेत्र अनुगूंजित हो उठता है। प्रति वर्ष हजारों की तादाद में शिवलिंग की स्थापना होती है। वर्षों पहले स्थापित शिवलिंग क्षतिग्रस्त व जीर्ण-शीर्ण भी होते हैं। इन क्षतिग्रस्त एवं जीर्ण-शीर्ण शिवलिंग को मठ-मंदिर में ही अन्य स्थान पर सम्मानजनक तौर-तरीके से सुरक्षित रख दिया जाता है।
जंगमबाड़ी मठ खास तौर से दक्षिण भारतीय परम्पराओं-मान्यताओं से ओत-प्रोत दिखता है। धर्म-परम्पराओं-मान्यताओं के जानकार बताते हैं कि जिस प्रकार पूर्वजों की आत्मशांति एवं मुक्ति के लिए पिण्डदान किया जाता है, उसी प्रकार वीरशैव सम्प्रदाय में पूर्वजों की आत्मशांति एवं मुक्ति के लिए शिवलिंग दान की परम्परा है। इसी परम्परा के अनुसार काशी के जंगमबाड़ी मठ में शिवलिंग की स्थापना की परम्परा है।
जंगमबाड़ी मठ खास तौर से दक्षिण भारतीय परम्पराओं-मान्यताओं से ओत-प्रोत दिखता है। धर्म-परम्पराओं-मान्यताओं के जानकार बताते हैं कि जिस प्रकार पूर्वजों की आत्मशांति एवं मुक्ति के लिए पिण्डदान किया जाता है, उसी प्रकार वीरशैव सम्प्रदाय में पूर्वजों की आत्मशांति एवं मुक्ति के लिए शिवलिंग दान की परम्परा है। इसी परम्परा के अनुसार काशी के जंगमबाड़ी मठ में शिवलिंग की स्थापना की परम्परा है।
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