जयंती शक्तिपीठ: धार्मिक पर्यटन
जयंती शक्तिपीठ को धार्मिक स्थान के साथ ही बेहतरीन पर्यटन कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। देवी सती का यह स्थान मुख्य रूप से माता दुर्गा को समर्पित है।
भारत के मेघालय की जयंतिया हिल्स पर स्थित जयंती शक्तिपीठ श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का केन्द्र है। विशेषज्ञों की मानें तो जयंती शक्तिपीठ 51 शक्तिपीठ में से एक है। हिन्दू धर्म पुराणों की मानें तो देवी सती के शव के अंग जिन स्थानों पर गिरे, उन स्थानों को शक्तिपीठ माना गया।
सती के अंग के हिस्से, आभूषण एवं वस्त्र आदि इत्यादि गिरने वाले स्थान ही शक्तिपीठ के रूप में पूजित हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह शक्तिपीठ अत्यंत पवित्र महातीर्थ कहलाते हैं। खास यह है कि शक्तिपीठ के रूप में यह महातीर्थ भारतीय उपमहाद्वीप में चहुंओर फैले हुए हैं।
मान्यता है कि इन शक्तिपीठ की संख्या 51 है। देवी पुराण में भी 51 शक्तिपीठ माने गये हैं। इन 51 शक्तिपीठ में जयंती शक्तिपीठ भी एक है। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित जयंती शक्तिपीठ मेघालय के शीर्ष धार्मिक स्थलों में से एक है।
शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में जयंती शक्तिपीठ में मां भगवती के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। मान्यता है कि मां भगवती के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भारत के पूर्वोत्तर का मेघालय वस्तुत: पर्वतीय राज्य है।
लिहाजा मेघालय अधिसंख्य पहाड़ों पर रचा बसा है। जाहिर सी बात है कि ऐसे में पर्वतीय सौन्दर्य से श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का मन प्रफुल्लित होगा।
वस्तुत: मेघालय का यह इलाका जनजातीय बाहुल्य इलाका है। जयंतिया, गारी एवं खासी मेघालय की मुख्य पहाड़ियां हैं। इनमें जयंतिया पहाड़ी बेहद प्रसिद्ध है।
खास तौर से जयंतिया अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। इस जयंतिया पहाड़ी के गांव नारतियांग में जयंती शक्तिपीठ स्थित है। नारतियांग खास तौर से जयंती शक्तिपीठ के लिए जाना एवं पहचाना जाता है।
यह भी कहा जा सकता है कि जयंती शक्तिपीठ जयंतिया हिल्स का मुख्य आकर्षण है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जयंतिया पहाड़ी पर स्थित जयंती शक्तिपीठ के चौतरफा एक खास सुरम्यता दिखती है।
यह शांत सुरम्यता श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दिल एवं दिमाग को एक ताजगी एवं प्रफुल्लता प्रदान करती है। मान्यता है कि जयंतिया पहाड़ी के इस स्थान पर सती शव के वाम जंघ का निपात हुआ था। लिहाजा इस स्थान को शक्तिपीठ की मान्यता मिली।
शिलांग से करीब 53 किलोमीटर दूर स्थित जयंती शक्तिपीठ पवित्र धाम के साथ ही महातीर्थ भी कहा जाता है।
विशेषज्ञों की मानें तो जयंती शक्तिपीठ में भगवान शिव एवं देवी सती मुख्य रूप से पूजित हैं। खास यह है कि शक्तिपीठ में सती को जयंती एवं भगवान शिव को क्रमदीश्वर महादेव के रूप में पूजित हैं।
जयंती शक्तिपीठ की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गुवाहाटी एयरपोर्ट है। गुवाहाटी एयरपोर्ट से जयंती शक्तिपीठ की दूरी करीब 181 किलोमीटर है।
सती के अंग के हिस्से, आभूषण एवं वस्त्र आदि इत्यादि गिरने वाले स्थान ही शक्तिपीठ के रूप में पूजित हैं। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक यह शक्तिपीठ अत्यंत पवित्र महातीर्थ कहलाते हैं। खास यह है कि शक्तिपीठ के रूप में यह महातीर्थ भारतीय उपमहाद्वीप में चहुंओर फैले हुए हैं।
मान्यता है कि इन शक्तिपीठ की संख्या 51 है। देवी पुराण में भी 51 शक्तिपीठ माने गये हैं। इन 51 शक्तिपीठ में जयंती शक्तिपीठ भी एक है। शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा को समर्पित जयंती शक्तिपीठ मेघालय के शीर्ष धार्मिक स्थलों में से एक है।
शारदीय एवं चैत्र नवरात्र में जयंती शक्तिपीठ में मां भगवती के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। मान्यता है कि मां भगवती के दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। भारत के पूर्वोत्तर का मेघालय वस्तुत: पर्वतीय राज्य है।
लिहाजा मेघालय अधिसंख्य पहाड़ों पर रचा बसा है। जाहिर सी बात है कि ऐसे में पर्वतीय सौन्दर्य से श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों का मन प्रफुल्लित होगा।
वस्तुत: मेघालय का यह इलाका जनजातीय बाहुल्य इलाका है। जयंतिया, गारी एवं खासी मेघालय की मुख्य पहाड़ियां हैं। इनमें जयंतिया पहाड़ी बेहद प्रसिद्ध है।
खास तौर से जयंतिया अपने प्राकृतिक सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है। इस जयंतिया पहाड़ी के गांव नारतियांग में जयंती शक्तिपीठ स्थित है। नारतियांग खास तौर से जयंती शक्तिपीठ के लिए जाना एवं पहचाना जाता है।
यह भी कहा जा सकता है कि जयंती शक्तिपीठ जयंतिया हिल्स का मुख्य आकर्षण है तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जयंतिया पहाड़ी पर स्थित जयंती शक्तिपीठ के चौतरफा एक खास सुरम्यता दिखती है।
यह शांत सुरम्यता श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के दिल एवं दिमाग को एक ताजगी एवं प्रफुल्लता प्रदान करती है। मान्यता है कि जयंतिया पहाड़ी के इस स्थान पर सती शव के वाम जंघ का निपात हुआ था। लिहाजा इस स्थान को शक्तिपीठ की मान्यता मिली।
शिलांग से करीब 53 किलोमीटर दूर स्थित जयंती शक्तिपीठ पवित्र धाम के साथ ही महातीर्थ भी कहा जाता है।
विशेषज्ञों की मानें तो जयंती शक्तिपीठ में भगवान शिव एवं देवी सती मुख्य रूप से पूजित हैं। खास यह है कि शक्तिपीठ में सती को जयंती एवं भगवान शिव को क्रमदीश्वर महादेव के रूप में पूजित हैं।
जयंती शक्तिपीठ की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट गुवाहाटी एयरपोर्ट है। गुवाहाटी एयरपोर्ट से जयंती शक्तिपीठ की दूरी करीब 181 किलोमीटर है।












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ReplyDeleteI am Navya, Marketing executive at Pocket FM (India's best audiobooks, Stories, and audio show app). I got stumbled on an excellent article of yours about
नीब करौरी के बाबा की संक्षिप्त जीवनी and am really impressed with your work. So, Pocket FM would like to offer you the audiobooks related to the same. (https://www.pocketfm.in/show/95684ce4ebab36792c33cf516b0276af375b1887). Pls, mail me at navya.sree@pocketfm.in for further discussions.
PS: Sry for the abrupt comment (commented here as I couldn't access your contact form)