Tuesday, 3 September 2019

मणिकर्ण : धर्म, आध्यात्म एवं प्रकृति का अद्भुत संगम

   मणिकर्ण को प्राकृतिक सौन्दर्य एवं धर्म-आध्यात्म का अद्भुत एवं विलक्षण संगम कहा जाना चाहिए। मणिकर्ण को हिन्दुओं एवं सिखों का महातीर्थ भी कहा जाता है। 

   इसे धार्मिक पर्यटन कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। भारत के हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला स्थित मणिकर्ण का प्राकृतिक सौन्दर्य भी दर्शनीय एवंं निराला है। समुद्र तल से करीब 1760 मीटर ऊंचाई पर स्थित मणिकर्ण प्राकृतिक सम्पदाओं से अति समृद्ध है। 

   हॉट वाटर स्प्रिंग की बहुलता वाला मणिकर्ण जलीय विशिष्टताओं के कारण वैश्विक ख्याति रखता है। मणिकर्ण में जल प्रवाह को खौलते हुयेे देखना अति रोमांचक प्रतीत होता है।
   सर्पीले अर्थात घुमावदार रास्ते वाला मणिकर्ण का विशिष्ट आकर्षण विदेशी पर्यटकों को खास तौर से आकर्षित करता है। विशेषज्ञों की मानें तो मणिकर्ण के वाटर स्प्रिंग का विशेष महत्व है। 

   इस जल में स्नान करने से चर्म रोग एवं गठिया रोग का निवारण हो जाता है। लिहाजा इस जलाशय में स्नान करना बेहद स्वास्थ्यवर्धक होता है। विशेषज्ञों की मानें तो गंधकयुक्त इस जल से असंख्य बीमारियों का स्वत: निदान हो जाता है। खौलते जल का यह वाटर स्प्रिंग बीमारियों के लिए किसी आैषधि से कम नहीं है। मणिकर्ण का शाब्दिक अर्थ कान की बाली होता है। 

   कुल्लू के ऊत्तर पश्चिम दिशा में स्थित मणिकर्ण वस्तुत: एक शानदार एवं दुर्लभ घाटी है। पार्वती घाटी में व्यास नदी एवं पार्वती नदी के मध्य रचा बसा मणिकर्ण एक खास सम्मोहन रखता है। 
   मणिकर्ण में गुरुद्वारा एवं मंदिरों की एक शानदार श्रंृखला विद्यमान है। पार्वती नदी का प्रवाह वेग पर्यटकों को खास तौर से रोमांचित कर देता है। जल के प्रवाह से उत्पन्न स्वर लहरियां एक विशेष सम्मोहन पैदा करती हैं।

   पार्वती नदी का जल बर्फ की भांति ठंड़ा होता है। इसी नदी के दाहिने किनारे पर गर्म उबलते जल का रुाोत दिखता है। यह वाटर स्प्रिंग एक आश्चर्य है। इस वाटर स्प्रिंग ने वैज्ञानिकों को भी चकित कर रखा है। वैज्ञानिकों की मानें तो इस जल में रेडियम भी है। सर्दियों में मणिकर्ण का मौसम बेहद रोमांचक होता है। 

   खास तौर से चौतरफा बर्फ दिखती है। इस शीतलहरी में भी गुरुद्वारा परिसर के इस वाटर स्प्रिंग में स्नान किया जा सकता है। मणिकर्ण तिब्बती कला एवं संस्कृति का भी अद्भुत एवं विलक्षण दर्शन कराता है।
  पर्यटक गुरुद्वारा में लंगर लेकर बाजार में तिब्बती लोक संस्कृति का दर्शनीय आनन्द ले सकते हैं। खास यह कि मणिकर्ण पर तिब्बती बस्तियों की अपनी एक विशिष्ट दर्शनीयता है।

   गुरुद्वारा हो या मंदिर या फिर तिब्बती बस्तियां सभी की अपनी एक अलग संस्कृति एवं सभ्यता दिखती है। मणिकर्ण मेहमाननवाजी का भी खास आनन्द प्रदान करता है।
   वाटर स्प्रिंग में पर्यटक एवं श्रद्धालु पोटली में चावल बांध कर पकाते हैंं। इन चावल का स्वाद भी काफी कुछ विशिष्ट होता है। इस पानी की चाय का स्वाद भी निराला होता है। इस पानी की चाय पर्यटक अति स्वाद से पीतेे हैं। 

   वस्तुत: देखें तो वाटर स्प्रिंग दुनिया का खुला किचन है। विशेषज्ञों की मानें तो इस वाटर स्प्रिंग का जल हर मौसम में एक समान 94 डिग्री सेल्सियस रहता है। गुरुद्वारा के किला नुमा भवन में पर्यटक आश्रय भी ले सकते हैं। 
   मणिकर्ण गुरुद्वारा: मणिकर्ण गुरुद्वारा सिख समुदाय का विशेष धार्मिक स्थल है। इस गुरुद्वारा की संरचना गुरु नानकदेव जी की यात्रा की स्मृति में की गयी थी। श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के इस केन्द्र में बड़ी तादाद में श्रद्धालु आते हैं। 
  पार्वती घाटी: पार्वती घाटी वस्तुत: एक शानदार पर्यटन है। पार्वती घाटी में भगवान राम, श्री कृष्ण, भगवान विष्णु, भगवान शिव सहित अन्य देवी देवताओं के असंख्य मंदिर इस घाटी की शान एवं शोभा हैं।

  मान्यता है कि भगवान शिव पत्नी पार्वती के साथ इस इलाके में जल विहार कर रहे थे, उसी दौरान पार्वती जी की कान की बाली जल में गिर गयी थी। जिससे इस घाटी को पार्वती घाटी के नाम से जाना पहचाना जाने लगा। साथ ही इस जल विहार के दौरान पार्वती जी की कान की बाली खो गयी थी। लिहाजा इसे मणिकर्ण कहा जाने लगा।
   मान्यता यह भी महाप्रलय के बाद मनु ने मणिकर्ण में मानव रचना की थी। मणिकर्ण में एक भव्य दिव्य रघुनाथ मंदिर भी है। इस मंदिर की संरचना कुल्लू के राजा ने कर भगवान श्री राम की प्रतिमा स्थापित की थी। शिव जी का प्राचीन मंदिर भी मणिकर्ण का एक मुख्य आकर्षण है। 
   पर्वतारोहियों का स्वर्ग: मणिकर्ण को पर्वतारोहियों का स्वर्ग भी कहा जाता है। चौतरफा प्रकृति का निराला सौन्दर्य पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देता है। मणिकर्ण से करीब आधा किलोमीटर दूर ब्रह्म गंगा भी हैं।
   पार्वती नदी एवं ब्रह्म गंगा का संगम स्थल भी मणिकर्ण का मुख्य आकर्षण है। मणिकर्ण से करीब 115 किलोमीटर दूर एक बेहद रोमांचक स्थल मानतलाई है। खास यह कि मणिकर्ण के चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य से आच्छादित परिदृश्य की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है। समूची पार्वती घाटी पर्वतारोहियों के लिए स्वर्ग है। मणिकर्ण की सुन्दर चट्टानें पर्यटकोें को मुग्ध कर लेती हैं।
   मणिकर्ण की यात्रा के सभी आवश्यक संंसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भुंटर एयरपोर्ट कुल्लू है। भुंटर एयरपोर्ट से मणिकर्ण की दूरी करीब 45 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट रेलवे जंक्शन है। पठानकोट जंक्शन से मणिकर्ण की दूरी करीब 285 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मणिकर्ण की यात्रा कर सकते हैं।
31.912800,77.174301

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