धर्म नगरी मथुरा: मंदिरों का शहर
मथुरा को भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता का गौरवशाली केन्द्र कहा जाना चाहिए। हालांकि मथुरा की प्रसिद्धि धार्मिक पर्यटन की है।
मथुरा वस्तुत: भगवान श्री कृष्ण की जन्म एवं लीला स्थली के तौर पर प्रतिष्ठित है। भारत के उत्तर प्रदेश के धार्मिक शहर मथुरा में चौतरफा मंदिरों की एक शानदार श्रंृखला विद्यमान है।
धर्म, दर्शन, कला-संस्कृति एवं साहित्य से मथुरा अति समृद्ध है। महाकवि सूरदास, संगीत के आचार्य स्वामी हरिदास, स्वामी दयानन्द के गुरु स्वामी विरजानन्द, कवि रसखान आदि महान आत्माओं का इस धर्म नगरी मथुरा से आत्मिक लगाव रहा।
धर्म एवं आध्यात्म के क्षेत्र में मथुरा को मुख्यत: भगवान श्री कृष्ण की जन्म स्थली के तौर पर माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण जन्म स्थली मथुरा का मुख्य धार्मिक स्थान है।
श्री कृष्ण जन्म स्थली पर भव्य दिव्य मंदिर विद्यमान है। परिसर में ही एक अन्य मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं की स्वचलित झांकियों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है।
परिसर के ही एक अन्य मंदिर में भगवान श्री कृष्ण विशाल स्वरूप में विराजमान हैं। परिसर में ही पर्यटकों एवं श्रृद्धालुओं को संस्कृति दर्शन भी होते हैंं। भगवान श्री कृष्ण जन्म भूमि मंदिर की भव्यता-दिव्यता अति दर्शनीय है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिर चौतरफा इन्द्रधनुषी रोशनी से जगमगा उठता है। खास तौर से मंदिर की प्राचीनता भी दर्शित होती है।
मथुरा शहर के मध्य स्थित श्री कृष्ण जन्म भूमि मंदिर में सौन्दर्य की एक अनोखी आभा दर्शित है। देखें तो कंस के कारागार ने एक दिव्य भव्य मंदिर का स्वरूप ग्रहण कर लिया है।
इसका सौन्दर्य पर्यटको को आकर्षित करता है। मथुरा का एक अन्य आकर्षण द्वारकाधीश मंदिर है। द्वारकाधीश मंदिर यमुना नदी के तट पर स्थित है। द्वारकाधीश मंदिर का मुख्य आकर्षण आरती होती है।
मंदिर के गर्भगृह में मुरली मनोहर की सुन्दर प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठित है। मंदिर से तट पर आते ही यमुना के दिव्य दर्शन होते हैं। यमुना नदी की भी नित्य आरती होती है। यह आरती भी अति दर्शनीय होती है। पर्यटक दर्शन पूजन के बाद यमुना नदी में नौका विहार का आनन्द ले सकते हैं।
नौका विहार करते हुये पर्यटक मथुरा के यमुना घाट सहित मथुरा का विहंगम दृश्य देख सकते हैं। नौका विहार के दौरान पर्यटक कंस का किला भी देख सकते हैं। मथुरा एवं निकट ही वृंदावन में दिव्य-भव्य मंंदिरों की एक शानदार दर्शनीय श्रंृखला विद्यमान है।
मंदिरों की इस शानदार श्रंृखला में गोेविन्द जी मंदिर, किशोरी रमण मंदिर, वासुदेव घाट, गोवर्धन नाथ जी मंदिर, मदन मोहन मंदिर, राधेश्याम मंदिर एवं गणेश मंदिर, बिरला मंदिर-गीता मंदिर, गायत्री तपो भूमि आदि इत्यादि हैं। खास यह है कि मथुरा के चारो दिशाओं में चार शिव मंदिर हैं।
पूर्व दिशा में पिपलेेश्वर महादेव, दक्षिण दिशा में रंगेश्वर महादेव, उत्तर दिशा में गोकर्णेश्वर महादेव एवं पश्चिम दिशा में भूतेश्वर महादेव हैं। चारो दिशाओं में शिव मंदिर होने से भगवान शिव को मथुरा का कोतवाल कहा जाता है।
मथुरा में कंकाली टीला भी एक आकर्षण है। इस टीला पर कंकाली देवी का मंदिर है। मान्यता है कि देवकी की कन्या समझ कर कंस ने जिसे मारना चाहा था, वह कन्या हाथ से छूट कर आकाश में चली गयी थी। यह कंकाली मंदिर उस कन्या को समर्पित है।
मथुरा का संगीत भी बेहद लोकप्रिय है। इसे बृज संगीत की ख्याति हासिल है। बृज का मुख्य संगीत वाद्य यंत्र बांसुरी है। भगवान श्री कृष्ण का बांसुरी वादन मुग्ध कर लेता था।
इसी कारण भगवान श्री कृष्ण को मुरलीधर एवं वंशीधर कहा गया है। बृज के लोक संगीत में गायन की अनेक शैलियां प्रचलित हैं। इनमें रसिया बृज की प्राचीन गायन शैली है। पर्यटक मथुरा में धर्म, आध्यात्म के साथ ही संगीत का भी आनन्द ले सकते हैं।
धर्म नगरी मथुरा की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट खेरिया एयरपोर्ट आगरा है। खेरिया एयरपोर्ट आगरा से मथुरा की दूरी करीब 62 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मथुरा जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी धर्म नगरी मथुरा की यात्रा कर सकते हैं।
27.476219,77.693398
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