Friday, 2 August 2019

चामुंडेश्वरी मंदिर : बेहतरीन स्थापत्य कला

   चामुंडेश्वरी मंदिर की स्थापत्य कला का कोई जोड़ नहीं। जी हां, द्रविड़ शैली पर आधारित चामुंडेश्वरी मंदिर की स्थापत्य कला विलक्षण एवं अद्भुत है।

   इसकी कलात्मक संरचना श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। भारत के प्रांत कर्नाटक के शहर मैसूर में स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर वस्तुत: देवी पार्वती को समर्पित है। चामुंडेश्वरी मंदिर मैसूर की चामुंडी पहाड़ी पर स्थित है। खास यह कि यह धार्मिक स्थान के साथ ही सुरम्यता के लिए भी जाना पहचाना जाता है।

   समुद्र तल से करीब 1065 मीटर ऊंचाई पर स्थित चामुंडेश्वरी मंदिर की स्थापत्य कला पर्यटकों कोे खुद-ब-खुद आकर्षित करती है। मान्यता है कि चामुंडेश्वरी देवी पार्वती का स्वरूप हैं। देवी पार्वती का अवतार माने जाने वाली चामुंडेश्वरी को यह मंदिर समर्पित है।

   विशेषज्ञों की मानें तो इस दिव्य-भव्य मंदिर की संरचना 11 वीं शताब्दी में की गयी थी। वर्ष 1827 के आसपास मैसूर के राजाओं ने इसका जीर्णोद्धार एवंं सुधार कराया था। खास यह कि इस शानदार एवं सुन्दर मंदिर के सामने राक्षस राजा महिषासुर की विशाल प्रतिमा विद्यमान है। 

   चामुंडी पहाड़ी की एक खासियत यह है कि इस पर्वत चोटी पर 5 मीटर ऊंची नंदी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। मान्यता है कि नंदी की यह प्रतिमा दक्षिण भारत में दूसरी सबसे बड़ी प्रतिमा है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1659 में इसे काले ग्रेनाइट पत्थर को तराश कर बनाया गया था। 

    देवी चामुंडेश्वरी मंदिर के निकट ही हनुमान जी को समर्पित एक मंदिर है। चामुंडेश्वरी मंदिर शहर मैसूर से करीब 13 किलोमीटर दूर स्थित है। मान्यता है कि इस दिव्य-भव्य स्थान का नाम चामुंडेश्वरी या पार्वती के नाम पर इस लिए रखा गया क्योंकि यह शक्ति स्वरूपा हैं। चामुंडेश्वरी मंदिर की मान्यता शक्तिपीठ की है। 

   विशेषज्ञों की मानें तो 18 महा शक्ति पीठों में चामुंडेश्वरी मंदिर एक शक्ति पीठ है। खास यह कि इसे क्रौैंच पीठ के नाम से भी जाना पहचाना जाता है। प्राचीनकाल में इसे क्रौंच पुरी के नाम से जाना पहचाना जाता था। शक्ति पीठों की उत्पत्ति राजा दक्ष एवं सती के आत्मदाह से ताल्लुुक रखते हैं। देवी सती के शव के अंगों के गिरने वाले स्थानों को शक्ति पीठ का महत्व दिया गया। 

   देवी सती के 51 शक्ति पीठ की मान्यता है। इन सभी शक्ति पीठ में शक्ति एवं कालभैरव के मंदिर हैं। मान्यता है कि इस स्थान पर देवी सती के शव के बाल यहां गिरे थे। यहां शक्ति को चामुंडेश्वरी के रूप में माना जाता है।

   मंदिर के मुख्य गर्भगृह में चामुंडेश्वरी देवी की सोने की प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठित है। प्रतिमा की दर्शनीयता अति मुग्ध करने वाली है। चामुंडेश्वरी मंदिर की चढ़ाई के मार्ग में ही नंदी के दर्शन होते हैं। चामुंडेश्वरी मंदिर द्रविड़ कला की शानदार संरचना है। सात मंजिला यह मंदिर कलात्मकता का दर्शन कराता है। इस मंदिर की ऊंचाई करीब 40 मीटर है।

   खास यह कि मुख्य मंदिर के पीछे महाबलेश्वर को समर्पित एक छोटा मंदिर है। मान्यता है कि यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना है। खास यह कि चामुंडेश्वरी मंदिर अर्थात चामुंडी पहाड़ी से पर्यटक मैसूर की खूबसूरती देख सकते हैं। मैसूर शहर का अद्भुत नजारा यहां से दिखता है। खास तौर से तारों भरी चांदनी रात पर्यटकों को रोमांच से भर देती है।

   चामुंडेश्वरी मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मैसूर एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से चामुंडेश्वरी मंदिर की दूरी करीब 7 किलोमीटर है।
  इसके अलावा पर्यटक बेंगलुरु एयरपोर्ट से भी चामुंडेश्वरी मंदिर की यात्रा कर सकते हैं। बेंगलुरु एयरपोर्ट से चामुंडेश्वरी मंदिर की दूरी करीब 139 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन मैसूर जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी चामुंडेश्वरी मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
12.295810,76.639381

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