शंकराचार्य मंदिर : इन्द्रधनुषी स्थापत्य कला
शंकराचार्य मंदिर को वास्तुकला का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। खास तौर से यह मंदिर कश्मीरी वास्तुकला को बेहतरीन तौर तरीके से प्रस्तुत करता है।
भारत के जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर का वास्तुशिल्प अद्भुत एवं विलक्षण है। कश्मीर के दक्षिण-पूर्वी इलाके में स्थित शंकराचार्य मंदिर एक शानदार धार्मिक पर्यटन स्थल भी है।
समुद्र तल से करीब 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शंकराचार्य मंदिर एक सुरम्य एवं शांत धार्र्मिक स्थल है। भगवान शिव को समर्पित यह भव्य-दिव्य मंदिर शंकराचार्य पर्वत पर स्थित है। गोपदरी हिल स्टेशन इलाके में स्थित शंकराचार्य मंदिर के गर्भगृह में विशाल शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठित है।
खास यह कि यह विशाल मंदिर एक विशाल चट्टान पर स्थित है। खास यह भी है कि इस मंदिर में 13 परतों वाला एक अष्टकोणीय तहखाना भी है। तहखाना से लेकर मंदिर के आन्तरिक एवं बाह्य परिदृश्य में कश्मीरी स्थापत्य कला का शानदार दर्शन होता है।
पत्थरों के विशाल शिलाखण्ड पर अंकित मूर्ति शिल्प अति दर्शनीय है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रतिमाएं जीवंत हों। कलात्मकता देखते ही बनती है। नक्काशी में कलात्मकता के दर्शन होते है। यह कलात्मकता मुग्ध करने वाली है। रोशनी में मंदिर का सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है।
मंदिर एक गोलाकार कक्ष की भांति दर्शित है। शंकराचार्य पर्वत पर स्थित इस दिव्य भव्य मंदिर परिसर से कश्मीर घाटी का प्राकृतिक सौन्दर्य परिलक्षित होता है।
कश्मीर घाटी के मनोरम दृश्य श्रृद्धालुओं-पर्यटकों को मुग्ध कर लेते हैं। इस स्थान से श्रीनगर की झीलों एवं झरनों का सौन्दर्य देखते ही बनता है। विशाल हिमालय की शान एवं शोभा हैं।
ऊंचाई पर स्थित होने के कारण मंदिर की दिव्यता-भव्यता का अपना एक अलग आकर्षण है। मंदिर जाने के लिए श्रृद्धालुओं को करीब 200 सीढ़ियांं चढ़नी पड़ती हैं। मंदिर से श्रीनगर की खूबसूरत घाटियां-वादियां एक सम्मोहन सा पैदा करती हैं।
शंकराचार्य मंदिर को ज्येष्ठेश्वर मंंदिर एवं पास पहाड़ भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण कश्मीर के राजा गोपादत्य ने कराया था। विशेषज्ञों की मानें तो इस मंदिर का निर्माण अति प्राचीन है।
चूंकि मंदिर का निर्माण राजा गोपादत्य ने कराया था। लिहाजा उस समय इस मंदिर को राजा गोपादत्य के नाम से ही जाना पहचाना गया।
मान्यता है कि कश्मीर घाटी का यह सबसे प्राचीन मंदिर है। बाद में मंदिर का नाम बदल कर शंकराचार्य मंदिर कर दिया गया था। मान्यता है कि संत शंकराचार्य 9वीं शताब्दी में सनातन धर्म को पुर्नजीवित करने के लिए कश्मीर आये थे।
शायद इसी कारण इस दिव्य-भव्य मंदिर का नाम बदल कर शंकराचार्य मंदिर रखा गया था। इस मंदिर को पहले गोपादरी मंदिर भी कहा जाता था।
कश्मीर यात्रा के दौरान संत आदि शंकराचार्य इस स्थान पर ठहरते एवं पूजा अर्चना करते थे। बाद में श्रृद्धालुओं की सुविधा सहूलियत को ध्यान में रखते हुए डोगरा शासक महाराजा गुलाब सिंह ने धरातल से पर्वत के ऊपर मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों का निर्माण कराया था।
शंकराचार्य मंदिर हिन्दुओं का धार्मिक स्थान होने के साथ ही पुरातात्विक महत्व भी रखता है।
शंकराचार्य मंदिर श्रीनगर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं।
निकटतम एयरपोर्ट श्रीनगर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन नौगाम जंक्शन है। पर्यटक उधमपुर रेलवे स्टेशन से भी शंकराचार्य मंदिर की यात्रा कर सकते हैं। श्रृद्धालु या पर्यटक सड़क मार्ग से भी शंकराचार्य मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
34.071750,74.804320
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