रंगनाथ स्वामी मंदिर : अद्भुत स्थापत्य कला
रंगनाथ स्वामी मंदिर के स्थापत्य दर्शन को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी हां, रंगनाथ स्वामी मंदिर का स्थापत्य सौन्दर्य अति दर्शनीय है।
वनस्पति रंगों से अंकित चित्रकला श्रृद्धालुओं एवं पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। भारत के तमिलनाडु राज्य के तिरुचिरापल्ली शहर स्थित इस शानदार एवं अति सुन्दर मंदिर को वैश्विक ख्याति हासिल है।
मंदिर की स्थापत्य कला, सौन्दर्य एवं विशिष्टताओं के कारण यूनेस्कोे ने इसे एशिया प्रशांत मेरिट पुरस्कार से अलंकृत किया है। श्री रंगम की पवित्र भूमि पर कावेरी नदी के किनारे स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर वस्तुत: श्री रंगनाथ स्वामी को समर्पित है।
श्री रंगनाथ स्वामी को भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। मंदिर में भगवान श्री रंगनाथ शेषनाग शैय्या पर विश्राम की अवस्था में विद्यमान हैं। श्री रंगम द्वीप पर स्थित यह मंदिर भू-लोक बैकुण्ठ के नाम से भी जाना पहचाना जाता हैं।
इसके अलावा रंगनाथ स्वामी मंदिर को श्री रंगम मंदिर तिरुवरंगम, तिरुपति, पेरियाकोइल आदि इत्यादि नामों से भी जाना जाता है। इसे दक्षिण भारत का प्राचीन मंदिर माना जाता है। वस्तुत: यह दिव्य-भव्य मंदिर हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ है।
विशेषज्ञों की मानें तो भगवान श्री रंगनाथ को समर्पित यह शानदार मंदिर 108 दिव्य देशों में से एक है। इस सांस्कृतिक विरासत की ख्याति वैश्विक स्तर पर है। करीब 631000 वर्ग मीटर में फैला यह मंदिर अति कलात्मक एवं सुन्दर है। खास यह कि इस मंदिर में 21 गोपुरम है। गोपुरम से आशय प्रवेश द्वार से है।
मंदिर के प्रमुख द्वार को राजगोपुरम कहा जाता है। इस शानदार द्वार की ऊंचाई करीब 72 मीटर है। द्रविण शैली के इस शानदार मंदिर को वास्तुकला की शानदार संरचना कहा जा सकता है। मंदिर का आंतरिक क्षेत्र भी बेहद आकर्षक है। ग्रेनाइट से बना विशाल सभागार यहां का विशेष आकर्षण है। इसमें 953 स्तम्भ हैं।
इन स्तम्भों में कलात्मक अंकन हैं। इस मूर्ति अंकन में हाथी, घोड़ा, बाघ एवं अन्य जीव-जन्तुओं का अंकन है। खास यह कि दर एवं दीवारों पर यह कलात्मक अंकन वनस्पतीय रंगों से किया गया। इसे अद्भुत चित्रकला कहा जा सकता है। प्राचीन वास्तु शैली से अलंकृत यह मंदिर एक अनूठी सांस्कृतिक धरोहर है।
विशेषज्ञों की मानें तो इस मंदिर की प्राचीनता का सहज अनुमान लगाना मुश्किल है। इस मंदिर में देवी-देवताओं का पूजन अर्चन भगवान श्री राम ने किया था। मान्यता है कि राम-रावण युद्ध के बाद यहां के देवी देवता लंका के राजा विभीषण को सौंप दिये गये थे।
लंका वापस जाते समय विभीषण के सामने भगवान विष्णु प्रकट हो गये। भगवान विष्णु ने इस स्थान पर भगवान रंंगनाथ के रूप में रहने की इच्छा व्यक्त की थी। मान्यता है कि तभी से भगवान विष्णु श्री रंगनाथ के रूप में यहां विराजमान हैं।
मान्यता है कि वैदिक काल में गोदावरी नदी के तट पर गौतम ऋषि का आश्रम था। जल संकट को देख कर कई अन्य स्थानों के ऋषि-मुनि आश्रम में आकर गौतम ऋषि से सहायता का आग्रह किया। उर्वरक भूमि देख कर अन्य ऋषियों में भूमि का लालच आ गया। अन्तोगत्वा ऋषियों ने गौतम ऋषि पर गौहत्या का आरोप लगा कर क्षेत्र की समस्त भूमि हथिया ली।
गौतम ऋषि ने श्री रंगम जाकर भगवान श्री रंगनाथ की आराधना की। मान्यता है कि आराधना से प्रसन्न होकर भगवान श्री रंगनाथ ने दर्शन आैर आशीर्वाद दिया। मान्यता यह भी है कि गौतम ऋषि के आग्रह पर ब्राह्मा जी ने स्वयं इस मंदिर का निर्माण किया था।
रंगनाथ स्वामी मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से रंगनाथ स्वामी मंदिर की दूरी करीब 9 किलोमीटर है।
निकटतम रेलवे स्टेशन पुडुक्कोटई जंक्शन है। रेलवे स्टेशन से रंगनाथ स्वामी मंदिर की दूरी करीब 54 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी रंगनाथ स्वामी मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
10.821050,78.289810
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