स्वामी मलाई मंदिर : हिन्दुओं का महातीर्थ
स्वामी मलाई मंदिर को हिन्दुओं का महातीर्थ कहा जाना चाहिए। कारण भगवान कार्तिकेय के श्रेष्ठ मंदिरों में से स्वामी मलाई मंदिर एक है। इसे मुरुगन मंदिर भी कहा जाता है।
भगवान कार्तिकेय को समर्पित यह मंदिर विलक्षण एवं अद्भुत माना जाता है। भारत के तमिलनाडु के कुम्बकोणं में स्थित यह दिव्य-भव्य मंदिर हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र है। मान्यता है कि स्वामी मलाई मंदिर भगवान कार्तिकेय के विविध चरणों से ताल्लुक रखता है।
स्वामी मलाई वह स्थान है, जहां बाल्यावस्था में मुरुगन ने भगवान शिव को प्रणव मंत्र का अर्थ समझाया था। कुम्बकोणं से करीब 5 किलोमीटर दूर कावेरी नदी के तट पर स्थित यह मंदिर कई मायनों में विशिष्ट है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित स्वामी मलाई मंदिर स्थापत्य कला का शानदार अलंकरण है।
करीब 18 मीटर ऊंचाई वाली एक पहाड़ी पर स्थित स्वामी मलाई मंदिर वस्तुत: भगवान शिव, माता पार्वती एवं कार्तिकेय का स्थान माना जाता है। माता पार्वती मीनाक्षी के रूप में एवं भगवान शिव सुन्दरेश्वर के रूप में यहां विद्यमान हैं। माता मीनाक्षी एवं सुन्दरेश्वर का मंदिर पहाड़ी के नीचे विद्यमान है। इस दिव्य-भव्य मंदिर में प्रवेश के तीन द्वार हैं।
खास यह कि मंदिर में नित्य वैदिक अनुष्ठान होते हैं। स्वामी मलाई मंदिर का खास उत्सव वैकासी विसंगम होता है। इसका आयोजन वर्ष में एक बार होता है। किवदंती है कि भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय पिता के प्रणव मंत्र ओम का उच्चारण करते थे। लिहाजा इस स्थान कोे स्वामीनाथ मंदिर के नाम से जाना पहचाना जाता है।
किवदंती है कि सृष्टि के निर्माता ब्रह्मा जी का कैलाश यात्रा के दौरान कार्तिकेय ने अपमान किया था। जिससे ब्रह्मा जी शिव पुत्र कार्तिकेय अर्थात मुरुगन पर क्रोधित हो गये थे। मुरुगन ने ब्रह्मा जी सवाल किया था कि सृष्टि की रचना कैसे की है।
ब्रह्मा जी ने जवाब दिया कि वेदों की सहायता से की गई। ब्रह्मा जी ने पवित्र प्रणव मंत्र ओम का जाप प्रारम्भ किया। जिस पर मुरुगन ने प्रणव मंत्र का अर्थ बताने को कहा तो ब्रह्मा जी कोई जवाब नहीं दे पाये। कोई प्रतिउत्तर न मिलने पर मुरुगन ने ब्रह्मा जी को कैद कर लिया था।
इसके बाद मुरुगन ने सृष्टि की रचना की जिम्मेदारी ले ली थी। यह पता चलने पर भगवान शिव ने मुरुगन से ब्रह्मा जी को कैद से मुक्त करने को कहा तो मुरुगन ने कहा कि ब्रह्मा जी को प्रणव मंत्र अर्थात ओम का अर्थ नहीं पता। भगवान शिव ने मुरुगन से प्रणव मंत्र का अर्थ बतानेे को कहा। भगवान शिव के सामने मुरुगन से प्रणव मंत्र का गुणगान कर दिया।
किवदंती है कि तभी भगवान शिव ने मुरुगन को स्वामीनाथ स्वामी नाम दिया था। इसका अर्थ भगवान शिव के शिक्षक से होता है। मान्यता है कि इस अवधारणा को भगवान शिव एवं भगवान मुरुगन के मंदिर रेखांकित करते हैं। भगवान शिव का मंदिर पहाड़ी के नीचे स्थित है जबकि भगवान मुरुगन का मंदिर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है।
स्वामी मलाई मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट है। तिरुचिरापल्ली एयरपोर्ट से स्वामी मलाई मंदिर की दूरी करीब 77 किलोमीटर है। पर्यटक पुडुचेरी एयरपोर्ट से भी यात्रा कर सकते हैं। पुडुचेरी एयरपोर्ट से स्वामी मलाई मंदिर की दूरी करीब 108 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कुम्बकोणं जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी स्वामी मलाई मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
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