Thursday, 30 May 2019

पालीताना : जैन धर्म का महातीर्थ

   पालीताना को जैन धर्म का महातीर्थ कहा जाना चाहिए। कारण पालीताना मेें जैन धर्म के मंदिरों की एक विशाल श्रंखला विद्यमान है।

   सफेद संगमरमर के इन मंदिरों की नक्काशी एवं मूर्तिकला अति दर्शनीय है। मंदिरों का सौन्दर्य एवं नक्काशी उत्तम कोटि की है। खास यह कि मंदिरों की कारीगरी सजीव प्रतीत होती है। शायद इसी लिए यहां का मूर्ति शिल्प विश्व प्रसिद्ध है। 

   भारत के गुजरात के भावनगर जिला का शहर पालीताना वस्तुत: एक शानदार पर्यटन क्षेत्र है। पालीताना खास तौर से जैन धर्म मंदिरों की श्रंखला की वैश्विक ख्याति रखता है।

   भावनगर के दक्षिण पश्चिम में करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित पालीताना को वस्तुत: धर्म नगरी कहा जाना चाहिए। पालीताना शत्रुंजय नदी के तट पर विकसित एक बेहद सुन्दर शहर है।
  खास यह कि पालीताना शहर शत्रुंजय पर्वत की तलहटी पर स्थित है। मंदिरों के इस शहर की खासियत यह है कि पालीताना पूर्ण शाकाहारी शहर है। 

   पर्वत शिखर पर भी मंदिरों की एक शानदार श्रंृखला विद्यमान है। पर्वत शिखर पर 863 से अधिक जैन मंदिरों की सुन्दर श्रंखला विद्यमान है। विशेषज्ञोें की मानें इन शानदार एवं सुन्दर मंदिरों की शानदार श्रृंखला 11 वी शताब्दी मे अस्तित्व में आई थी। 

   सूर्योदय के समय पालीताना का लालित्य एवं सौन्दर्य आैर भी अधिक निखर आता है। कारण सूर्य की किरणों से रोशनी से संगमरमर के मंदिर शिखर खास तौर से चमक उठते हैं।
  यह अद्भुत एवं निराली छटा पर्यटकों एवं श्रृद्धालुओं को मुग्ध कर लेती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे माणिक मोती चमक रहे हों।

   जैन धर्म में पालीताना शत्रुंजय महातीर्थ का विशेष महत्व है। जैन धर्म के पांच प्रमुख महातीर्थ में पालीताना शत्रुंजय तीर्थ एक है। सूर्योदय के समय पालीताना देव लोक सा प्रतीत होता है। 

   खास यह कि सूर्यास्त के पश्चात किसी को मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं होती है। मान्यता है कि रात में भगवान विश्राम करते हैं। लिहाजा रात में मंदिरों में किसी श्रद्धालुओं को प्रवेश अनुमति नहीं होती है। 

   पालीताना का प्रमुख एवं सुन्दर मंदिर जैन धर्म के प्रथम तीर्थकंर भगवान ऋषभदेव का है। आदिश्वर देव के इस मंदिर में भगवान के आंगी दर्शनीय है। दैनिक पूजन अर्चन के दौरान भगवान का श्रंगार अति दर्शनीय होता है। 

   वर्ष 1618 में बना चौमुखा मंदिर पालीताना का सबसे बड़ा मंदिर है। कुमारपाल, मिलशाह, समप्रति राज मंदिर यहां के अन्य खास मंदिर हैं। खास यह कि पालीताना के मंदिरोें में बहुमूल्य प्रतिमाओं का संग्रह अति समृद्धशाली है।

   शत्रुंंजय पर्वत का यह धर्म क्षेत्र विश्व के पर्यटकों को आकर्षित करता है। शत्रुंजय का अर्थ शत्रु पर विजय प्राप्त करना है। विशेषज्ञों की मानें तो इस क्षेत्र में 3000 से अधिक मंदिर विद्यमान हैं।

   पर्वत शिखर पर विद्यमान मंदिरों की श्रंखला जैनियों की अलग-अलग पीढ़ियों द्वारा बनाये गये हैं। मान्यता है कि श्रद्धालुओं की हर इच्छा पूरी होती है। जैन धर्म मान्यता यह भी है कि पालीताना दर्शन श्रृद्धालुओं को मोक्ष प्रदान करता है। 

   पालीताना के मंदिरों की श्रंखला जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों को समर्पित है। मान्यता है कि जैन धर्म के तीर्थंकरों ने यहां महानिर्वाण प्राप्त किया था। निर्माण प्राप्त करने के बाद इसे सिद्धाक्षेत्र कहा जाता है।
   मंदिरों के शहर पालीताना की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट भावनगर एयरपोर्ट है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी भावनगर जंक्शन है। श्रृद्धालु एवं पर्यटक पालीताना की यात्रा सड़क मार्ग से भी कर सकते हैं।
21.537900,71.822900

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