सांई मंदिर शिरडी:अद्भुत एवं विलक्षण
सांई मंदिर शिरडी को विलक्षण एवं अद्भुत दरबार कहा जाना चाहिए। सांई बाबा के इस दरबार से कोई श्रद्धालु निराश नहीं होता है। मान्यता तो यही है।
वस्तुत: शिरडी स्थित सांई मंदिर संत सांई बाबा का समाधि स्थल है। जिसे मंदिर की मान्यता है। भारत के महाराष्ट्र के जिला अहमद नगर का यह आस्था, विश्वास एवं श्रद्धा का केन्द्र देश दुनिया में खास तौर से प्रसिद्ध है। विशेषज्ञों की मानें तो वस्तुत: यह समर्पण एवं नैतिक शिक्षा का स्थल है।
संत सांई बाबा का संदेश इंसानियत यहां सदैव जीवंत प्रतीत होता है। संत सांई बाबा का आदर्श उपदेश था कि सबका मालिक एक है। शायद यही कारण है कि संत सांई बाबा के अनुयायियों में सभी धर्मों के आस्थावान व्यक्ति शामिल हैं।
संत सांई की यह धरती शिरडी अद्भुत एवं चमत्कारों से आच्छादित है। अहमद नगर का यह विशेष स्थल बेेहद लोकप्रिय है।
मान्यता है कि सांई बाबा के जीवन का एक बड़ा हिस्सा शिरडी में ही व्यतीत हुआ। संत सांई बाबा ने यहां असंख्य कल्याणकारी कार्य किये हैं।
खास तौर ने उन्होंने धर्म एवं भक्ति की शिक्षा दी है। संत सांई बाबा के समाधि स्थल पर ही सांई जी की भव्य-दिव्य प्रतिमा स्थापित है। समाधि पर ही मंदिर स्थित है।
सांई बाबा की भव्य-दिव्य प्रतिमा अति दर्शनीय है। सफेद संगमरमर की प्रतिमा श्रद्धालुओं को बरबस आकर्षित करती है। विशेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1922 में इस दिव्य-भव्य मंदिर का निर्माण किया गया था।
बताते हैं कि सांई बाबा 16 वर्ष की अल्प आयु में शिरडी आये थे। वह चिरसमाधि में लीन होने तक शिरडी में ही रहे। लिहाजा शिरडी की इस धरती को चमत्कारिक धरती माना जाता है। समाज में सांई बाबा को आध्यात्मिक गुरु एवं फकीर के तौर पर मान्यता है।
खास यह कि यह स्थान साम्प्रदायिक सद्भाव का भी संदेश देता है। कारण सांई बाबा जीवन पर्यंत यहां एक मस्जिद में प्रवास करते रहे लेकिन समाधि स्थल पर मंदिर का निर्माण है। शायद यह विलक्षण एवं अद्भुत है। समाधि स्थल स्थित इस विशाल मंदिर में सांई बाबा की दिव्य-भव्य प्रतिमा स्थापित है।
ब्रह्म मुहूर्त में 4 बजे आरती के साथ ही दर्शन के लिए बाबा का दरबार खुल जाता है। रात्रि 10.30 बजे शयन आरती तक श्रद्धालु सांई बाबा के दर्शन कर सकते हैं।
शयन आरती के बाद विशाल प्रतिमा को शॉल ओढ़ाया जाता है। रुद्राक्ष की माला पहनाई जाती है। निकट ही एक गिलास जल रख दिया जाता है। इसके बाद मंदिर के पट बंंद कर दिये जाते हैं।
खास यह कि बाबा का दरबार सोने एवं चांदी से सुसज्जित है। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान सांई बाबा की छवि अति दर्शनीय है। बाबा के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ नित्य उमड़ती है।
मान्यता है कि सांई बाबा के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं की इच्छाओं की पूर्ति होती है। मंदिर के विशाल परिसर में सांई बाबा के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर आधारित सांई प्रदर्शनी भी है। इसे सांई म्युजियम के नाम से जाना पहचाना जाता है।
सांई बाबा से ताल्लुक रखने वाली वस्तुओं का यहां विशाल संग्रह है। सांई पादुका, खानदोबा के पुजारी, सांई को दिये गये सिक्के, समूह में खिलाने के लिए उपयोग किये गये बर्तन, पीसने के उपयोग में लाई गयी चक्की आदि इत्यादि यहां दर्शनीय है।
खास यह कि शिरडी के इस मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के हितार्थ स्वास्थ्य सेवाएं भी निशुल्क संचालित होती हैं।
धर्म आध्यात्म के साथ ही यह स्थान इंसानियत की शिक्षा भी देता है। खास यह कि सांई बाबा के इस परिसर में उनके माता-पिता की भी समाधि है।
सांई मदिर शिरडी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट मुम्बई एवं पुणे इंटरनेशनल एयरपोर्ट लोहेगांव पुणे है।
निकटतम रेलवे स्टेशन मनमाड जंक्शन एवं नासिक जंक्शन हैं। नासिक जंक्शन से शिरडी की दूरी करीब 122 किलोमीटर है। श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी सांई मंदिर शिरडी की यात्रा कर सकते हैं।
19.766670,74.475850
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