Friday, 14 September 2018

कनक दुर्गा मंदिर: आस्था का केन्द्र

   श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के केन्द्र कनक दुर्गा मंदिर को अद्भुत कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। जी हां, दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित कनक दुर्गा मंदिर की ख्याति दुनिया में है।

   इन्द्रकेलाद्री पहाड़ी पर स्थित यह दिव्य-भव्य मंदिर कृष्णा नदी के तट पर है। मंदिर मुख्य तौर पर मां भगवती दुर्गा को समर्पित है। विशेषज्ञों की मानें तो सद्भावना विजयवाड़ा चौतरफा पत्थर की विशाल चट्टानों से घिरा था। जिससे कृष्णा नदी का प्रवाह नहीं हो पा रहा था। भगवान शिव की तपस्या एवं आराधना की गयी। इसके बाद कृष्णा नदी को अपेक्षित प्रवाह मार्ग मिल सका।

   पौराणिक कथाओं की मान्यता है कि अर्जुन ने इन्द्रकेलाद्री पहाड़ी पर तपस्या की थी। जिससे युद्ध में विजय हासिल कर सकें। जीत के बाद स्थान का नाम विजयवाड़ा पड़ गया। राक्षसों का प्रकोप बढ़ने पर ऋषि इन्द्रकेलाद्री ने पहाड़ी के शीर्ष पर तपस्या की थी। जिस पर देवी दुर्गा ने प्रकट होकर रक्षा का आशीर्वाद दिया था। 

    देवी दुर्गा ने उसी समय इन्द्रकेलाद्री पर्वत को अपना स्थान बना लिया था। कनक दुर्गा मंदिर में दुर्गा के सभी स्वरूप विद्यमान हैं। कनक दुर्गा मंदिर के निकट ही इन्द्रकेलाद्री पर मल्लेश्वर स्वामी का भी दिव्य-भव्य मंदिर है। इस मंदिर में कनक दुर्गा, मल्लेश्वर एवं कृष्णा नदी स्वरूप में विद्यमान हैं। कनक दुर्गा मंदिर में ओम की दिव्यता-भव्यता देखते ही बनती है। निकट ही प्रकाशम बैराज है।

    विशेषज्ञों की मानें तो प्रकाशम बैराज अर्जुन का तपस्या स्थल है। इसी स्थान पर अर्जुन को अस्त्र-शस्त्र प्राप्त हुये थे। खास तौर से यहां शिव लीला एवं शक्ति महिमा का वर्णन है। शक्ति महिमा एवं शिव लीला का प्रसंग वर्णन क्षेत्र को आध्यात्मिक बना देता है। सामान्यत: देखें तो कनक दुर्गा मंदिर विजयवाड़ा का पर्याय बन गया है।

   कनक दुर्गा मंदिर एवं विजयवाड़ा का आध्यात्मिकता प्राचीनकाल से ही तीर्थयात्रियों के आकर्षण का केन्द्र रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो वेदों एवं शास्त्रों में यहां की धार्मिकता एवं आध्यात्मिकता उल्लेखनीय रही। कनक दुर्गा एवं अन्य देेवी देवताओं का यहां स्वयंभू प्राक्ट्य माना गया। आत्म प्राक्ट्य होने के कारण विजयवाड़ा को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। 

    दशहरा पर्व कनक दुर्गा मंदिर में खास तौर से उल्लास पूर्व मनाया जाता है। कनक दुर्गा महोत्सव का दस दिवसीय आयोजन होता है। यह आयोजन चन्द्र तिथि के आधार पर होता है। स्थानीयता में इसे अलंकाराम कहा जाता है। 
   दशहरा पर कनक दुर्गा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। सरस्वती पूजा एवं थेपोत्सवम विशेष महत्वपूर्ण मानें जाते हैं। इसके अलावा कनक दुर्गा मंदिर में शकंभारी उत्सव भी प्रमुखता से आयोजित होता है। यह उत्सव कनक दुर्गा से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए है कि कृषि उपज, सब्जियां, भोजन आदि का आशीर्वाद दें। जिससे जीवन यापन एवं भरण-पोषण हो सके। यह इन्द्रधनुुषी उत्सव विशेष ख्याति रखता है। कनक दुर्गा मंदिर को विजयवाड़ा का दिल कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी।
   कनक दुर्गा मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट विजयवाड़ा है। विजयवाड़ा एयरपोर्ट से कनक दुर्गा मंदिर की दूरी करीब 20 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन विजयवाड़ा है। विजयवाड़ा से हैदराबाद की दूरी करीब 275 किलोमीटर है। यात्री-पर्यटक सड़क मार्ग से भी कनक दुर्गा मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
17.674220,83.214170

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