स्वर्ण मंदिर: अगाध श्रद्धा का केन्द्र
श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का केन्द्र श्री हरिमंदिर साहिब देश विदेश में शिखर की ख्याति रखता है। पंजाब के अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब को स्वर्ण मंदिर, गोल्डन टेम्पल, दरबार साहिब भी कहा जाता है।
सिख समुदाय का यह अति पवित्र स्थल देश के सभी समुदायों के बीच खासा आस्था का स्थल है। सभी धर्मों के श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर में श्रद्धानवत होते हैं। स्वर्ण मंदिर अमृतसर शहर का खास एवं विशेष आकर्षण है। खास यह भी कि अमृतसर शहर मंदिर के चारों ओर बसा है।
करीब 400 वर्ष पुराने इस गुरुद्वारा की परिकल्पना एवं डिजाइन खुद गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार की थी। इस विलक्षण एवं गुरुद्वारा का शिल्प सौन्दर्य अति शानदार एवं जानदार है। स्वर्ण मंदिर का शिल्प सौन्दर्य एवं नक्काशी देखते ही बनती है।
खास यह कि गुरुद्वारा में किसी भी दिशा से प्रवेश किया जा सकता है। कारण गुरुद्वारा के चारों दिशाओं में प्रवेश द्वार हैं। खास यह कि अमृतसर का नाम भी सरोवर के नाम पर ही रखा गया था। इस सरोवर का निर्माण रामदास जी ने किया था। स्वर्ण मंदिर इस सरोवर के मध्य में स्थित है। यह गुरुद्वारा स्वर्ण जड़ित है।
लिहाजा इसे स्वर्ण मंदिर के तौर पर ख्याति हासिल है। विशेषज्ञों की मानें तो स्वर्ण मंदिर की नींव एक मुस्लिम सूफी संत ने रखी थी। सिखों के पांचवें गुरु अर्जुन देव जी सूफी संत सार्इं मियां मीर से गुरुद्वारा की नींव 1588 में रखवाई थी।
स्वर्ण मंदिर के इस सरोवर को अमृतसर, अमृत सरोवर एवं अमृत झील कहा जाता है। श्री हरिमंदिर साहिब परिसर में कई तीर्थ स्थल हैं। स्वर्ण मंदिर सफेद संगमरमर से बना है। इसकी दीवारों की नक्काशी स्वर्ण पत्तियों से की गयी है।
स्वर्ण मंदिर में अनवरत गुरुवाणी का अनुगूंजन होता है। इसे ईश्वर तुल्य माना जाता है। स्वर्ण मंदिर का इतिहास यहां उल्लखित है। मंदिर परिसर में पत्थर का एक स्मारक भी है।
यह स्मारक जाबांज सिख सैनिकों की स्मृति में है। सरोवर की अपनी एक अलग विलक्षणता है। विशेषज्ञों की मानें तो सरोवर सभी प्रकार के कष्टों से निजात दिलाता है।
सरोवर के जल को ईश्वरीय कृपा से रोग निवारक माना जाता है। इस सरोवर अर्थात झील में श्रद्धालु स्नान करते हैं। खास यह कि झील में मछलियों की संख्या बहुतायत में है। मंदिर से 100 मीटर दूर स्वर्ण जडि़त अकाल तख्त है। इसमें एक भूमिगत तल एवं पांच अन्य तल हैं। इसमें एक भव्य-दिव्य संग्रहालय एवं सभागार भी है।
श्रद्धालु अकाल तख्त की परिक्रमा के बाद स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो अकाल तख्त का निर्माण 1606 में किया गया था। स्वर्ण मंदिर गुरुद्वारा में लंगर की व्यवस्था है। लंगर अनवरत चलता है। विशेषज्ञों की मानें तो स्वर्ण मंदिर के इस लंगर में करीब 40000 श्रद्धालु नित्य प्रसाद ग्रहण करते हैं।
लंगर सिर्फ भोजन ही नहीं, श्री रामदास सराय में श्रद्धालुओं के ठहरने की भी व्यवस्था है। इस सराय का निर्माण 1784 में किया गया था। सराय में 228 कमरे एवं 18 बड़े हाल हैं। स्वर्ण मंदिर का प्रकाशोत्सव खास है। प्रकाशोत्सव अल सुबह 2.30 बजे प्रारम्भ होता है। गुरुग्रंथ साहिब को उनके कक्ष से गुरुद्वारा लाया जाता है।
संगतों की टोली भजन-कीर्तन करते हुए श्री गुरुग्रंथ साहिब को पालकी में सजा कर गुरुद्वारा लाती है। रात के समय सुखासन के लिए भी इसी तरह लाया जाता है। कड़ाह प्रसाद की व्यवस्था नित्य रहती है। सुखासन एवं प्रकाशोत्सव देखने लायक होता है। मान्यता है कि श्रद्धा एवं सच्चे मन से की गयी हर इच्छा की पूर्ति होती है।
श्री हरिमंदिर साहिब अर्थात स्वर्ण मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध है। निकटतम एयरपोर्ट अमृतसर है। अमृतसर अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा है। दिल्ली से अमृतसर की दूरी करीब 500 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन अमृतसर जंक्शन है। श्रद्धालु या पर्यटक सड़क मार्ग से भी स्वर्ण मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
31.627140,74.890129
31.627140,74.890129









No comments:
Post a Comment