चक्रतीर्थ नैमिषारण्य: सिद्ध तीर्थ स्थान
चक्रतीर्थ नैमिषारण्य को ऋषियों-मुनियों की तप स्थली कहें तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। विशेषज्ञों की मानें तो नैमिषारण्य 88000 ऋषियों-मुनियों की तप स्थली रहा।
लिहाजा इसे एक सिद्ध तीर्थ स्थल के तौर पर देखा जाता है। उत्तर प्रदेश के सीतापुर में गोमती नदी के तट पर स्थित नैमिषारण्य की मान्यता एक सिद्ध हिन्दू तीर्थ के रूप में है।
नैमिषारण्य का चक्रतीर्थ वस्तुत: एक प्राकृतिक एवं सुन्दर सरोवर है। इस सरोवर का मध्य भाग गोलाकार है। इस गोलाकार मध्य सरोवर से निरन्तर जल का प्रवाह होता रहता है।
इस मध्य घेरा के बाहर एक आैर वृहद घेरा है। इस घेरा में श्रद्धालु स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। यही नैमिषारण्य का मुख्य तीर्थ कहलाता है। इसे ही चक्रतीर्थ कहा जाता है।
विशेषज्ञों की मानें तो चक्रतीर्थ की महिमा अत्यंत निराली है। एक बार 88000 ऋषियों-मुनियों ने तप कर ब्राह्मा जी से अनुरोध किया कि जगत कल्याण के लिए तपस्या हेतु विश्व में सौम्य एवं शांत भूमि का निर्देश दें।
भगवान ब्राह्मा जी ने एक चक्र उत्पन्न किया। ब्राह्मा जी ने कहा कि ऋषियों-मुनियों इस चक्र के पीछे चल कर जाओ। चक्र का अनुकरण करो। जिस स्थान पर चक्र स्वत: गिर जाये, उस स्थान को पृथ्वी का मध्य भाग समझ लेना।
धरती की सबसे दिव्य भूमि वही होगी। इस परम पवित्र भूमि के दर्शन बिना जीवन कभी सफल नहीं होगा। विशेषज्ञों की मानें तो जिस स्थान पर भगवान ब्राह्मा जी का चक्र घिरा, उसी स्थान को चक्रतीर्थ कहा जाता है।
चक्र गिरने के स्थान से अनवरत निर्मल एवं पवित्र जल का प्रवाह होता रहता है। महर्षि दधीचि ने अस्थि दान से पहले इसी सरोवर में स्नान किया था। बताते हैं कि सभी तीर्थों से पवित्र नदियों का जल लाकर इसी सरोवर में डाला गया था।
लिहाजा इसी स्थान को मिश्रित या मिश्रिख के नाम से भी जाना जाता है। नैमिषारण्य की परिक्रमा 84 कोस की होती है। यह परिक्रमा प्रतिवर्ष फाल्गुन अमावस्या को प्रारम्भ होकर पूर्णिमा को पूर्ण होती है।
चक्रतीर्थ का व्यास करीब 120 फुट है। पवित्र जल नीचे सोतों से आता रहता है। बाहरी घेरा का जल एक नाला के माध्यम मे निकलता रहता है। इस नाला को गोदावरी नाला कहा जाता है।
चक्रतीर्थ के अलावा इस तीर्थ स्थान में व्यास गद्दी, ललिता देवी का मंदिर, भूतनाथ का मंदिर, कुशावर्त, ब्राह्मकुण्ड, जानकी कुण्ड एवं पंचप्रयाग हैं। चक्रतीर्थ को 51 पितृ स्थानों में से एक माना गया है। मान्यता है कि चक्रतीर्थ नैमिषारण्य में हिन्दू देवी-देवताओं के 33 मंदिर हैं। इसे हिन्दुओं के सभी तीर्थ स्थलों का केन्द्र माना जाता है।
पंचप्रयाग: पंचप्रयाग को पवित्र सरोवर की मान्यता है। इस पक्के सरोवर की अपनी एक अलग महत्ता है। पंचप्रयाग के किनारे अक्षय वट नामक वृक्ष है। श्रद्धा एवं आस्था के इस स्थान पर श्रद्धालु मनौती मानते हैं।
ललिता देवी का मंदिर: ललिता देवी का मंदिर चक्रतीर्थ का मुख्य मंदिर है। इसके साथ गोवर्धन महादेव, क्षेमकाया देवी, जानकी कुण्ड, हनुमान जी, अन्नपूर्णा देवी, धर्मराज मंदिर, विश्वनाथ मंदिर आदि हैं।
व्यास गद्दी: व्यास गद्दी वस्तुत: शुक्रदेव का स्थान है। मंदिर में शुक्रदेव जी महाराज प्रतिष्ठापित हैं। बाहर व्यास जी की गद्दी है। निकट ही शतरूपा एवं मनु के चबूतरे हैं।
दशाश्वमेध टीला: दशाश्वमेध टीला पर मंदिर है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण एवं पाण्डव परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं।
दशाश्वमेध टीला: दशाश्वमेध टीला पर मंदिर है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण एवं पाण्डव परिवार की मूर्तियां स्थापित हैं।
चक्रतीर्थ नैमिषारण्य की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट अमौसी लखनऊ है। अमौसी एयरपोर्ट से नैमिषारण्य की दूरी करीब 100 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन सीतापुर जंक्शन है। सीतापुर से नैमिषारण्य की दूरी करीब 40 किलोमीटर है। नैमिषारण्य की यात्रा सड़क मार्ग से भी की जा सकती है।
27.352490,80.489860
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