दिलवाड़ा मंदिर: जैन धर्म का महातीर्थ
दिलवाड़ा मंदिर को जैन धर्म का महातीर्थ कहा जाना चाहिए। दिलवाड़ा केवल एक धाार्मिक स्थल ही नहीं बल्कि स्थापत्यकला की एक सुन्दर एवं अति दर्शनीय संरचना है।
लिहाजा इसे अद्भुत एवं विलक्षण संरचना कहा जाना चाहिए। भारत के प्रांत राजस्थान के जिला सिरोही के मांउट आबू शहर में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर अपनी विशिष्टताओं के कारण विश्व में प्रसिद्ध है। दिलवाड़ा जैन मंदिर वस्तुत: पांच सुन्दर एवं शानदार मंदिरों का समूह है।
खास यह कि इन सभी पांच मंदिरों की संरचना भिन्न है। इसे देलवाड़ा मंदिर भी कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो इन मंदिरों की संरचना 11वीं एवं 13वीं शताब्दी के मध्य की गयी। यह दिव्य-भव्य मंदिर जैन धर्म के तीर्थंकरों को समर्पित है। दिलवाड़ा मंदिर के विमल वासाही मंदिर प्रथम तीर्थंकर कोे समर्पित है।
विशेषज्ञों की मानें तो यह मंदिर सर्वाधिक प्राचीन है। इसी प्रकार लूना वासाही मंदिर बेहद लोकप्रिय है। यह मंदिर बाईसवें तीर्थंकर नेमिनाथ को समर्पित है। इस दिव्य भव्य मंदिर का निर्माण वास्तुपाल एवं तेजपाल भाईयों ने कराया था। संगमरमर से बना पांच मंदिरों का यह धार्मिक समूह अति दर्शनीय है।
खास यह कि मंदिरों के 48 स्तंभों पर नृत्यांगनाओं की आकृतियां अंकित हैं। दिलवाड़ा मंदिर वस्तुत: कलात्मकता का अतुलनीय उदाहरण है। संगमरमर के पत्थरों पर बारीक नक्काशी एवं पच्चीकारी बेहद सुन्दर एवं अद्भुत है। इन विश्वविख्यात मंदिरों का शिल्प सौन्दर्य कलात्मकता का बेजोड़ खजाना है।
इन मंदिरों में जैन तीर्थंकरों के साथ ही हिन्दू देवी देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। मंदिर का एक उत्कृष्ट प्रवेश द्वार है। खास यह कि दिलवाड़ा मंदिर में वास्तुकला की सादगी दिखती है तो वहीं जैन मूल्यों की उत्कृष्टता दिखती है। दिलवाड़ा मंदिर मेें विमल वासाही मंदिर, लूना वासाही मंदिर, पितलहार मंदिर, पाश्र्वनाथ मंदिर एवं महावीर स्वामी मंदिर हैं।
विमल वासाही मंदिर: विमल वासाही मंदिर सफेद संगमरमर पर तराशा गया एक सुन्दर मंदिर है। यह मंदिर गुजरात के चौलुक्य राजा भीम के मंत्री विमल शाह के द्वारा बनवाया गया था। यह मंदिर जैन महात्मा आदिनाथ को समर्पित है।
यह मंदिर गलियारा से घिरा आंगन के मध्य में स्थित है। इसमें तीर्थंकरों की छोटी-छोटी मूर्तियां स्थापित हैं। पच्चीकारी की कलात्मकता देखते ही बनती है। गलियारे, खम्भे, मेहराब, मंडप आदि इत्यादि बहुत कुछ आश्चर्यजनक है।
लूना वासाही मंदिर: लूना वासाही मंदिर भगवान नेमिनाथ को समर्पित है। मंदिर के मुख्य हाल को मंडप कहा जाता है। यह मंदिर खास तौर से मूर्तियों के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इस मंदिर में तीर्थंकरों की 360 प्रतिमाएं स्थापित हैं।
मंदिर में हाथी कक्ष की विशेषता खास है। इसमें 10 सुन्दर हाथियों को संगमरमर पर उभारा गया है। यहां 22वें तीर्थंकर नेमिनाथ की काली संगमरमर की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर के बायीं ओर एक बड़ा काला कीर्ति स्तंभ है। इसका निर्माण मेवाड़ के महाराणा कुंभ ने बनवाया था।
पितलहार मंदिर: पितलहार मंदिर वस्तुत: प्रथम तीर्थंकर ऋषिदेव यानी आदिनाथ को समर्पित है। यहां भगवान आदिनाथ की अष्टधातु की प्रतिमा प्रतिष्ठापित है। पांच धातुओं से बनी प्रतिमा के कारण ही इसे पितलहार कहा जाता है।
पाश्र्वनाथ मंदिर: पाश्र्वनाथ मंदिर भगवान पाश्र्वनाथ को समर्पित है। भगवान पाश्र्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे। यह तीन मंजिला मंदिर है। दिलवाड़ा मंदिर का यह सबसे ऊंचा मंदिर है।
गर्भगृह के चारों मुखों के भूतल पर विशाल मंडप हैं। मंदिर की बाहरी दीवारों के ग्रे बलुआ पत्थर पर सुन्दर कलाकृतियां दिखती हैं। यह सजावटी शिल्पांकन श्रद्धालुओं को मुग्ध कर लेता है।
महावीर स्वामी मंदिर: महावीर स्वामी मंदिर भगवान महावीर को समर्पित है। भगवान महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे। इस दिव्य भव्य मंदिर की संरचना 1582 में की गयी थी।
दीवारों पर नक्काशी युक्त यह एक अद्भुत मंदिर खास यह कि मंदिर कारीगरी का अतुलनीय उदाहरण है। असाधारण शिल्पांकन एवं वास्तुशिल्प पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देता है।
दिलवाड़ा जैन मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट उदयपुर है। उदयपुर एयरपोर्ट से दिलवाड़ा जैन मंदिर की दूरी करीब 185 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन आबु रोड है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी दिलवाड़ा जैन मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
24.884800,72.853500
दिलवाड़ा जैन मंदिर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट उदयपुर है। उदयपुर एयरपोर्ट से दिलवाड़ा जैन मंदिर की दूरी करीब 185 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन आबु रोड है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी दिलवाड़ा जैन मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
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