काशी : धर्म एवं संस्कृति का अद्भुत संगम
काशी को धर्म एवं संस्कृति का विलक्षण एवं अद्भुत संगम कहा जाना चाहिए। इस देव नगरी को तीनों लोक से न्यारी काशी कहा गया है।
धर्म, आध्यात्म, संस्कृति एवं कला के इस अनुपम संगम को महातीर्थ एवं धार्मिक पर्यटन कहा जा सकता है। हिन्दुओं की आस्था, विश्वास एवं श्रृद्धा के इस शहर काशी को वैश्विक पर्यटन का दर्जा हासिल है। पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर काशी को विशिष्ट स्थान हासिल है।
शायद इसी लिए वैश्विक पर्यटकों की काशी यात्रा का सिलसिला अनवरत जारी रहता है। भारत के उत्तर प्रदेश की धर्म नगरी काशी को वाराणसी एवं बनारस भी कहा जाता है। हिन्दुओं के इस पवित्र शहर को अविमुक्त क्षेत्र भी कहा जाता है। काशी का मुख्य आकर्षण ज्योतिर्लिंग विश्वनाथ मंदिर एवं गंगा हैं।
उत्तर भारत के धार्मिक एवं सांस्कृतिक शहर काशी का भारत की राजनीति से लेकर कला जगत सहित असंख्य क्षेत्र में अति महत्वपूर्ण स्थान है। खास तौर से काशी के गंगा घाट अति दर्शनीय हैं।
सांझ होते ही काशी के इन गंगा घाटों पर एक उत्सव जैसा दृश्य दिखता है। सामान्यत: काशी में गंगा के 100 घाटों की श्रृंखला विद्यमान है लेकिन काशी को गंगा के 84 घाटों के लिए जाना पहचाना जाता है।
देव दीपावली पर तो गंगा तट पर देव लोक उतर आता है। करोड़ों अरबों दीपकों की रोशनी से काशी इन्द्रधनुषी दिखती है। ऐसा प्रतीत होता है कि स्वप्न लोक उतर आया हो। गंगा के दशाश्वमेध घाट, राजघाट, अस्सी घाट, आदिकेशव घाट, राणामहल घाट, सिंधिया घाट, पंचगंगा घाट, भोसले घाट, पेशवा घाट एवं मणिकर्णिका घाट आदि खास तौर से प्रसिद्ध हैं।
करीब 7 किलोमीटर के दायरे मेें स्थित गंगा के यह घाट बेहद अनुपम हैं। दशाश्वमेध घाट के निकट ही ज्योतिर्लिंग विश्वनाथ मंदिर है। भगवान शिव को समर्पित बाबा विश्वनाथ मंदिर श्रद्धालुओं के आस्था एवंं विश्वास का केन्द्र है। काशी में मंदिरों की एक लम्बी श्रंृखला विद्यमान है।
इनमें खास तौर से काल भैरव, अन्नपूर्णा मंदिर, ढ़ुंढ़िराज गणेश, दुर्गा मंदिर, केदारनाथ, संकट मोचन मंदिर, तुलसी मानस मंदिर, नया विश्वनाथ मंदिर, भारत माता मंदिर, संकठा देवी मंदिर, विशालाक्षी मंदिर आदि इत्यादि सहित मंदिरों की एक लम्बी श्रंृखला है।
काल भैरव को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर को स्वर्ण मंदिर भी कहा जाता है। विशेेषज्ञों की मानें तो वर्ष 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने ज्योतिर्लिंग काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण कराया था।
इस दिव्य भव्य मंदिर की काशी में सर्वोच्च महिमा है। मंदिर का वास्तुशिल्प अति दर्शनीय है। दुर्गा मंदिर की भी स्थापत्य कला पर्यटक-श्रद्धालुओं को मुग्ध कर लेती है।
खास यह कि काशी बनारस भारत के दार्शनिक, लेखक, संगीतज्ञों एवं विविध रचनाकारों की कर्म भूमि रही है। खास तौर से गोस्वामी तुलसी दास ने महाकाव्य राम चरित मानस काशी में ही रचा था।
महर्षि अगस्त्य, महर्षि धन्वंतरि, गौतम बुद्ध, संत कबीर, स्वामी रैदास, अघोराचार्य बाबा कीनाराम, रानी लक्ष्मी बाई, पाणिनी, पाश्र्वनाथ, महर्षि पतंजलि, स्वामी रामानन्दाचार्य, बल्लभाचार्य, शंकराचार्य, महर्षि वेदव्यास आदि की तपोभूमि काशी रही। महान संगीतकार पंडित रवि शंकर, पंडित हरि प्रसाद चौरसिया एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खां आदि इत्यादि काशी की शान एवं शोभा रहे।
मान्यता है कि भगवान शिव ने करीब 5000 वर्ष पूर्व काशी की स्थापना की थी। शिव नगरी होने के कारण काशी एक अति महत्वपूर्ण महातीर्थ स्थल है। काशी हिन्दुओं की पवित्र सप्तपुरियों में से एक है। काशी वस्तुत: गंगा एवं असि नदी के संगम पर रचा बसा एक इन्द्रधनुषी शहर है। जिसमें सनातन संस्कृति के सभी रंग मिलेंगे।
काशी की संरचना बेहद विलक्षण एवं अद्भुत है। संकरी गलियों वाला यह शहर काशी शांत एवं शीतल हवाओं का ह्मदय स्पर्शी अपनापन भी प्रदान करता है। काशी की इन गलियों में ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे सुमधुर संगीत प्रवाहमान हो।
कारण गंगा के तटों के शीर्ष पर रची बसी काशी एक शीतलता प्रदान करती है। इतना ही नहीं, बनारसी साड़ियों की विशिष्टता विश्व भर में ख्याति रखती है। बनारस का पान तो मलाई की तरह होता है। निराला स्वाद दिलों को भाता है। बनारस का कलाकंद भी बेहद प्रसिद्ध है। काशी की दर्शनीयता में विशिष्टता ही पर्यटकों को लुभाती है।
काशी की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट लाल बहादुर शास्त्री इण्टरनेशनल एयरपोर्ट बाबतपुर है। एयरपोर्ट से काशी की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन वाराणसी जंक्शन एवं मंडुवाडीह जंक्शन हैं। पर्यटक सड़क मार्ग से भी काशी की यात्रा कर सकते हैं।
25.309580,83.005692
25.309580,83.005692












No comments:
Post a Comment