Wednesday, 6 June 2018

रणकपुर : मंदिरों एवं पर्वत श्रंखला का सौन्दर्य

     अरावली पर्वत की शिखर श्रंखला पर स्थित रणकपुर का सौन्दर्य भी लाजवाब है। रणकपुर श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास के स्थल के साथ ही देश का एक सुन्दर हिल स्टेशन भी है।

    राजस्थान का रणकपुर वस्तुत: जैन मंदिर के लिए खास तौर से जाना पहचाना जाता है लेकिन यहां की रमणीयता का कहीं कोई जोड़ नहीं। 
   समुद्र तल से करीब 1100 मीटर ऊंचाई पर स्थित रणकपुर की सुन्दरता देखते ही बनती है। पर्वत श्रंखलाओं के आच्छादन के बीच रणकपुर जैन मंदिर स्थित है। पर्वत श्रंखलाओं के शिखर एवं वादियों-घाटियों में घना सुन्दर वन क्षेत्र पर्यावरण की सुन्दरता का बखान खुद-ब-खुद करता है। प्राकृतिक परिवेश की सुन्दरता मानों पर्यटकों के ह्मदय में जीवंतता के पंख लगा देती हो।
    राजस्थान वैसे तो मंदिरों एवं स्मारकों के लिए खास तौर से जाना ही जाता है लेकिन रणकपुर की सुन्दरता की बात ही निराली है। देश के शीर्ष जैन मंदिरों की दिव्यता-भव्यता को देखें तो रणकपुर जैन मंदिर की दिव्यता-भव्यता विशाल है। रणकपुर जैन मंदिर करीब 40000 वर्ग फुट में फैला है। करीब 600 वर्ष प्राचीन इस मंदिर के निर्माण में 50 वर्ष से भी अधिक का समय लगा। 
     अरावली हिल स्टेशन के मध्य में स्थित रणकपुर जैन मंदिर में चार कलात्मक प्रवेश द्वार हैं। मंदिर के मुख्य गर्भ गृह में तीर्थंकर आदिनाथ की संगमरमर की चार विशाल प्रतिमायें स्थापित हैं। लिहाजा इसे चौमुख मंदिर के तौर पर भी जाना जाता है। इसके अलावा मंदिर क्षेत्र में 76 छोटे-छोटे गुम्बदनुमा पवित्र स्थान हैं। 
    मान्यता है कि यह स्थान मनुष्य को जीवन मृत्यु की 84 योनियों से मुक्ति प्राप्त करने एवं मोक्ष प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। रणकपुर जैन मंदिर की विशेषता खम्भों की श्रंखला है। मंदिर में करीब 1444 खम्भों की लम्बी श्रंखला है।
   खास यह है कि छोटे-बड़े खम्भों की यह श्रंखला इस प्रकार है कि कहीं से भी देखने पर मुख्य पवित्र स्थल के दर्शन में कहीं कोई बाधा नहीं होती। इन खम्भों पर सुन्दर नक्काशी अंकित है। भगवान ऋषभदेव के पदचिह्न भी यहां अंकित हैं। मंदिर के मुख्य गलियारा में सभी जैन तीर्थंकरों की तस्वीरें अति सुन्दरता से अंकित है। 
    रणकपुर जैन मंदिर परिसर में नेमीनाथ एवं पारसनाथ को समर्पित दो अन्य मंदिर हैं। इन मंदिरों की नक्काशी खजुराहों को याद कराती है। रणकपुर जैन मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर अम्बा माता का मंदिर है। खास यह कि मंदिरों के शिखर पर घंटियां बंधी हैं।हवा के झोंकों से घंटियां बजती रहती हैं। लिहाजा इलाका घंटियों की टंकार से रणकपुर अनवरत अनुगूंजित होता रहता है।
     अरावली हिल स्टेशन के शिखर से रेगिस्तानी इलाका दिखता है। यह सुन्दर दृश्य अति मोहक होता है। खास यह है कि रणकपुर एरिया में बारिश कम होने के बावजूद तापमान कम ही रहता है। जिससे मौसम बेहद खुशनुमा महसूस किया जाता है।
     रणकपुर हिल स्टेशन एरिया एवं उसके आसपास अन्य रमणीक एवं दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला है। सूर्य मंदिर, देसुरी, मुच्छल महावीर आदि स्थान हैं।
      रणकपुर सूर्य मंदिर: रणकपुर सूर्य मंदिर करीब 8 किलोमीटर दूर है। इलाके का यह एक अति खूबसूरत मंदिर माना जाता है। यह स्थान खुदाबक्स बाबा की पुरानी दरगाह के लिए जाना जाता है। यहां बाराहअवतार मंदिर भी है।
    देसुरी: देसुरी रणकपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर है। यह स्थान तीन मंदिरों की श्रंखला को समर्पित है। यहां भगवान शिव, हनुमान जी एवं नवी माता का मंदिर है। निकट ही परसुराम महादेव का मंदिर है।
     मुच्छल महावीर: मुच्छल महावीर मंदिर मुख्य तौर से कुंभलगढ़ अभ्यारण में स्थित है। इस मंदिर की विशेषता है कि भगवान महावीर की प्रतिमा मूंछों वाली है। यह स्थान वास्तुशिल्प का शानदार उदाहरण है। यह क्षेत्र गरासिया जनजाति का है। जनजाति की परिधान शैली बेहद आकर्षक है। यह परिधान शैली पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती है।
      रणकपुर की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। रणकपुर का निकटतम एयरपोर्ट महाराणा प्रताप एयरपोर्ट उदयपुर है। उदयपुर से रणकपुर की दूरी करीब 98 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन फालना है। फालना से रणकपुर की दूरी करीब 35 किलोमीटर है। इसके अलावा पर्यटक सड़क मार्ग से भी रणकपुर की यात्रा कर सकते हैं।
25.115658,73.472873

No comments:

Post a Comment

तारापीठ मंदिर: धार्मिक पर्यटन    शक्ति उपासना स्थल तारापीठ को अद्भुत एवं विलक्षण धार्मिक स्थल कहा जाये तो शायद कोई अतिश्योक्ति न होगी। ज...