बैद्यनाथ मंदिर: देवत्व का स्थल
ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ मंदिर की खासियत है कि कभी कोई निराश नहीं लौटता। दर्शनार्थी की सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं। शायद इसी लिए ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ मंदिर को कामना शिवलिंग भी कहते है।
छत्तीसगढ़ के देवघर में स्थित इस ज्योतिर्लिंग को पुराणकालीन माना जाता है। पवित्र तीर्थ होने के कारण श्रद्धालु इसे बैद्यनाथ धाम भी कहते हैं। यह ज्योतिर्लिंग देवघर में स्थित है। देवघर का आशय देवताओं के घर से है। इस स्थान को देवघर की मान्यता है।
ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ मंदिर को सिद्धपीठ की मान्यता है। इस शिवलिंग की स्थापना का अति प्राचीन इतिहास है।
कहावत है कि शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने हिमालय पर घोर तपस्या की थी। शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण ने अपने सिर काट-काट कर अर्पित करना प्रारम्भ कर दिये। रावण ने नौ सिर काट कर शिव को अर्पित कर दिये। अंतिम सिर काटने से पहले ही शिव प्रकट हो गये। शिव ने रावण के सभी सिर यथावत कर दिये।
तत्पश्चात शिव ने रावण से वरदान मांगने को कहा। रावण ने शिवलिंग यहां से ले जाकर लंका में स्थापित करने का वर मांगा लेकिन शिव इससे सहमत नहीं थे। अंतोगत्वा, शिव वरदान देने को तैयार हो लेकिन एक शर्त रख दी कि शिवलिंग को सीधे लंका ले जाकर स्थापित करना होगा। रावण शिवलिंग को लेकर लंका रवाना हुआ लेकिन मार्ग में लघुशंका महसूस होने पर रावण ने शिवलिंग एक व्यक्ति सौंप कर भूमि पर न रखने की हिदायत दी।
लघुशंका से निवृत्त होकर लौटने पर रावण ने देखा शिवलिंग भूमि पर स्थापित हो चुका है। कोशिशों के बावजूद रावण शिवलिंग को हिला भी न सका। लिहाजा रावण निराश होकर लंका के लिए चला गया। तत्पश्चात, ब्राह्मा एवं विष्णु सहित अन्य देवी-देवताओं ने शिवलिंग की पूजा-अर्चना की। बैद्यनाथ नामक व्यक्ति शिवलिंग की नियमित पूजा-अर्चना करने लगा।
इसी कारण इस ज्योतिर्लिंग को बैद्यनाथ की मान्यता मिली। जनश्रुति एवं लोक मान्यता है कि ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ के दर्शन से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। मंदिर के निकट ही एक तालाब है। इसका जल विशेष पवित्र माना जाता है।
ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ की पवित्र यात्रा श्रावण मास में प्रारम्भ होती है। यात्रा के पूर्व तीर्थयात्री सुल्तानगंज में एकत्र होते हैं। सुल्तानगंज से पात्र में जल लेकर तीर्थयात्री बैद्यनाथ धाम के लिए प्रस्थान करते हैं। तीर्थयात्री बैद्यनाथ धाम एवं वासुकीनाथ का जलाभिषेक करते हैं।
ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ धाम मंदिर परिसर में शिव-पार्वती, लक्ष्मी-नारायण आदि देवी-देवताओं की प्रतिमायें स्थापित हैं। कहावत है कि इन सभी मंदिरों में पंचशूल लगे हैं। पंचशूल से ही रावण लंका की सुरक्षा करता था।
वासुकीनाथ मंदिर : वासुकीनाथ मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के बिना ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ की यात्रा आधी-अधूरी ही मानी जाती है। वासुकीनाथ मंदिर वस्तुत: बैद्यनाथ धाम से करीब 42 किलोमीटर दूर है।
बैजू मंदिर: बैजू मंदिर देवघर में बैद्यनाथ धाम से पश्चिम की ओर हैं। यह तीन मंदिर हैं। इनको बैजू मंदिर कहा जाता है। इन सभी मंदिर में शिवलिंग स्थापित हैं।
वासुकीनाथ मंदिर : वासुकीनाथ मंदिर में शिवलिंग के दर्शन के बिना ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ की यात्रा आधी-अधूरी ही मानी जाती है। वासुकीनाथ मंदिर वस्तुत: बैद्यनाथ धाम से करीब 42 किलोमीटर दूर है।
बैजू मंदिर: बैजू मंदिर देवघर में बैद्यनाथ धाम से पश्चिम की ओर हैं। यह तीन मंदिर हैं। इनको बैजू मंदिर कहा जाता है। इन सभी मंदिर में शिवलिंग स्थापित हैं।
ज्योतिर्लिंग बैद्यनाथ मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट रांची एवं पटना हैं। पटना से बैद्यनाथ धाम की दूरी करीब 280 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जसीडीह है। बैद्यनाथ धाम की जसीडीह रेलवे स्टेशन से दूरी करीब 10 किलोमीटर है। पर्यटक या श्रद्धालु सड़क मार्ग से भी बैजनाथ धाम की यात्रा कर सकते हैं।
25.528601,73.907786
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