रामेश्वरम: श्रद्धा एवं आस्था का केन्द्र
शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम तीर्थ का अपना एक अलग एवं विशेष महत्व है। हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम को श्री रामलिंगेश्वरम के नाम से भी जाना जाता है।
तमिलनाडु के रामनाथपुरा स्थित ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम का वास्तुशिल्प भी शानदार है। खास यह है कि उत्तर भारत में जो काशी विश्वनाथ मंदिर की मान्यता है, वही मान्यता दक्षिण भारत में ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम की है।
ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम हिंद महासागर एवं बंगाल की खाड़ी से घिरा एक सुन्दर शंख के आकार का द्वीप है। भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले पत्थरों के शिलाखण्ड का समुद्र पर सेतु का निर्माण किया था।
रत्नाकर की संज्ञा रखने वाली बंगाल की खाड़ी इसी स्थान पर हिंद महासागर में मिलती है। ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम एवं श्री राम सेतु अति प्राचीन हैं। रामेश्वरम का गलियारा विश्व का सबसे लम्बा गलियारा माना जाता है। इसके परकोटे की लम्बाई भी कम नहीं है। यह मंदिर करीब 6 हेक्टेयर में फैला हुआ है।
मंदिर में विशालाक्षी जी के गर्भगृह के निकट 9 शिवलिंग स्थापित हैं। इन सभी शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग की मान्यता है। कहावत है कि यह सभी शिवलिंग रावण द्वारा स्थापित हैं। ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम का वास्तुशिल्प एवं निर्माण कला अति सुन्दर है। मंदिर का प्रवेश द्वार करीब 40 फुट ऊंचा है। मंदिर के अंदर नाना प्रकार के असंख्य खम्भे हैं।
विशेषता यह कि सभी खम्भे एक प्रकार के प्रतीत होते हैं। बारीकी से अध्ययन करें तो हर खम्भा की नक्काशी एवं बेलबूटे अलग एवं सुन्दर दिखते हैं। कारीगरी का यह विलक्षण आयाम हैं। यहीं रामनाथ की मूर्ति है। इसका परिक्रमा पथ 400 फुट लम्बा है। ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम मंदिर के निर्माण में लाखों टन पत्थरों का उपयोग किया गया है।
खास तौर से काले पत्थरों का उपयोग किया गया है। कहावत है कि मंदिर निर्माण के उपयोग में लाये गये पत्थर लंका से लाये गये थे। ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम मंदिर निर्माण का कथानक है कि भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई से पहले समुद्र तट पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजन-अर्चन किया था।
रावण का वध करने के बाद भगवान श्री राम को क्षोभ था कि ब्राह्म हत्या का पाप लगेगा। कारण रावण कोई सामान्य राक्षस नहीं था। वह पुलत्स्य ऋषि का नाती था। चारों वेदों का ज्ञाता था। शिव का अनन्य भक्त था।
लिहाजा ब्राह्म हत्या के पाप से मुक्ति के लिए श्री राम ने रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना का निश्चय किया। निश्चय करने के बाद श्री राम ने भक्त हनुमान को आज्ञा दी कि काशी से एक शिवलिंग लेकर आओ। हनुमान पवन सुत थे।
हनुमान जी चले गये लेकिन हनुमान जी नियत तिथि तक नहीं लौटे। जानकी जी ने यह देखा कि शिवलिंग स्थापना का नियत समय गुजर रहा है लेकिन हनुमान नहीं लौटे। जानकी जी ने समुद्र किनारे से रेत लेकर मुट्ठी बांध कर शिवलिंग बना दिया। यह देख श्रीराम अति प्रसन्न हुये। नियत समय पर श्रीराम ने शिवलिंग की स्थापना कर दी। यह छोटे आकार का शिवलिंग ही रामनाथ कहलाता है।
बाद में हनुमान के आने पर छोटे शिवलिंग के निकट ही काले पत्थर का बड़ा शिवलिंग स्थापित किया। मुख्य शिवलिंग को ज्योतिर्लिंग की मान्यता है। श्रद्धालु दोनों ही शिवलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम मंदिर के निकट कई अन्य तीर्थ एवं सुन्दर स्थान हैं। इनमें खास तौर से गंधमादन पर्वत, सेतु माधव, विल्लीरणि तीर्थ, एकांत राम, कोदण्ड स्वामी मंदिर, सीता कुण्ड, आदि सेतु एवं रामेश्वरम शहर आदि हैं।
गंधमादन पर्वत: गंधमादन पर्वत ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम से कुछ ही दूर पर स्थित है। यह एक छोटा सा पहाड़ है। कहावत है कि हनुमान जी ने समुद्र को लांघने के लिए इसी पर्वत से छलांग मारी थी। बाद में श्रीराम ने लंका विजय के लिए इसी स्थान पर विशाल सेना संगठित की थी। इस पर्वत पर एक सुुन्दर मंदिर है। इसे पादुका मंदिर कहते हैं।
सेतु माधव: सेतु माधव शिव मंदिर है। इसमें कई मंदिर हैं। मुख्यत: यह विष्णु मंदिर है।
बाइस कुण्ड: बाइस कुण्ड रामनाथ मंदिर परिसर का यह एक तीर्थ है। इसके जलकुण्ड की संख्या 24 थी। दो कुण्ड सूख गये। इसलिए अब इसे 22 कुण्ड कहा जाता है। कोटितीर्थ का कुण्ड जल आैषधीय है। शरीर के रोग नष्ट हो जाते हैं। स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु उर्जावान महसूस करते हैं।
आदि सेतु: आदि सेतु रामेश्वरम से सात मील दूर दक्षिण में है। इसे दर्भशयनम भी कहते हैं। इसी स्थान पर श्रीराम ने समुद्र में सेतु बांधने का कार्य किया था। इसी कारण इस स्थान को आदि सेतु के नाम से जाना जाता है।
गंधमादन पर्वत: गंधमादन पर्वत ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम से कुछ ही दूर पर स्थित है। यह एक छोटा सा पहाड़ है। कहावत है कि हनुमान जी ने समुद्र को लांघने के लिए इसी पर्वत से छलांग मारी थी। बाद में श्रीराम ने लंका विजय के लिए इसी स्थान पर विशाल सेना संगठित की थी। इस पर्वत पर एक सुुन्दर मंदिर है। इसे पादुका मंदिर कहते हैं।
सेतु माधव: सेतु माधव शिव मंदिर है। इसमें कई मंदिर हैं। मुख्यत: यह विष्णु मंदिर है।
बाइस कुण्ड: बाइस कुण्ड रामनाथ मंदिर परिसर का यह एक तीर्थ है। इसके जलकुण्ड की संख्या 24 थी। दो कुण्ड सूख गये। इसलिए अब इसे 22 कुण्ड कहा जाता है। कोटितीर्थ का कुण्ड जल आैषधीय है। शरीर के रोग नष्ट हो जाते हैं। स्नान करने के उपरांत श्रद्धालु उर्जावान महसूस करते हैं।
आदि सेतु: आदि सेतु रामेश्वरम से सात मील दूर दक्षिण में है। इसे दर्भशयनम भी कहते हैं। इसी स्थान पर श्रीराम ने समुद्र में सेतु बांधने का कार्य किया था। इसी कारण इस स्थान को आदि सेतु के नाम से जाना जाता है।
ज्योतिर्लिंग रामेश्वरम मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट मदुरै है। निकटतम रेलवे स्टेशन भी मदुरै में है। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी यात्रा की जा सकती है।
9.287625,79.312929
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